सीएम योगी ने 912 अभ्यर्थियों को बांटे नियुक्ति पत्र, कहा- अगले 6 महीने में 1 लाख युवाओं को मिलेगी सरकारी नौकरी

लखनऊ। कार्यक्रम में पुलिस उपनिरीक्षक और सहायक उपनिरीक्षक के पदों पर चयनित अभ्यर्थी शामिल हुए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक 9.30 लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। सीएम योगी ने कहा कि अगले छह महीनों में प्रदेश में एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर चयन को सरकार की प्राथमिकता बताया।
912 चयनित अभ्यर्थियों को मिले नियुक्ति पत्र
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की सीधी भर्ती-2023 के तहत चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इन अभ्यर्थियों का चयन पुलिस उपनिरीक्षक (गोपनीय), पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के पदों के लिए हुआ है। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद चयनित अभ्यर्थी प्रदेश पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं शुरू करेंगे।
ये भी पढ़ें: सीहोर का झरखेड़ा दुकान घोटाला फिर गर्माया, 6 माह से FIR का इंतजार! दो IAS के पत्र भी पुलिस कार्रवाई की राह देखते रहे
9.30 लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक 9.30 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। सरकार की ओर से अलग-अलग विभागों में भर्ती प्रक्रिया के जरिए युवाओं का चयन किया गया है। पिछले महीने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि विभाग में नवनियुक्त 3572 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे थे। रविवार के कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है और युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर अवसर दिया जा रहा है।
अगले छह महीने में एक लाख से ज्यादा नौकरियां
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि 2017 से पहले नियुक्ति पत्र बांटने को लेकर हंगामा करने वालों को अब देखना चाहिए कि सरकार लगातार नियुक्तियां कर रही है। उन्होंने कहा कि अगले छह महीनों में उत्तर प्रदेश में एक लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य है। सीएम योगी ने कहा कि चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलना उनके परिवार के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सरकार की बात रखी।
पिछली सरकारों पर लगाए भर्ती में भेदभाव के आरोप
सीएम योगी ने पिछली सरकारों की भर्ती व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय भर्ती आयोगों और बोर्डों में अपने लोगों को बैठाया जाता था। उनके मुताबिक, इससे भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई और युवाओं के बीच निराशा का माहौल बना। उन्होंने कहा कि पहले अभ्यर्थियों को यह आशंका रहती थी कि बिना सिफारिश और लेन-देन के भर्ती पूरी नहीं होगी। योगी ने कहा कि मौजूदा सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव किया है।
कानून व्यवस्था को लेकर भी गिनाईं उपलब्धियां
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्रदेश की कानून व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले माफिया खुलेआम हथियार लेकर घूमते थे, लेकिन अब किसी की ऐसी हिम्मत नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज है और अब दंगे नहीं होते, बल्कि दंगों की मॉक ड्रिल कराई जाती है। सीएम ने पहले की भर्ती व्यवस्था में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का आरोप लगाते हुए कहा कि अब चयन प्रक्रिया में योग्यता और पारदर्शिता पर जोर दिया जा रहा है।
'पारदर्शी चयन से बढ़ता है व्यवस्था पर भरोसा'
सीएम योगी ने कहा कि जब किसी अभ्यर्थी का चयन निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होता है, तो इससे केवल उसके परिवार का भरोसा नहीं बढ़ता, बल्कि शासन और आम लोगों के बीच विश्वास भी मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले उन्होंने प्रदेश की व्यवस्था को करीब से देखा था और उस समय युवाओं में भर्ती प्रक्रिया को लेकर निराशा थी। योगी के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी होने पर युवाओं का सिस्टम पर भरोसा कमजोर होता है। सरकार का प्रयास है कि योग्य युवाओं को बिना सिफारिश और भेदभाव के रोजगार के अवसर मिलें।




















