Naresh Bhagoria
4 Feb 2026
भोपाल। कांग्रेस पार्टी के संगठन सृजन अभियान के तहत मध्य प्रदेश में चल रही बैठकों में अनुशासनहीनता और आंतरिक कलह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। शुक्रवार को राजधानी भोपाल के नरेला विधानसभा में ऐसी ही एक बैठक के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के दो गुटों के बीच वाद-विवाद इतना बढ़ गया कि हाथापाई और कुर्सियां चलने की नौबत आ गई। इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति और गुटबाजी को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
मामला उस वक्त बिगड़ा जब नरेला विधानसभा में जिला अध्यक्ष के चयन को लेकर कांग्रेस की रायशुमारी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में एआईसीसी की ओर से पर्यवेक्षक यशोमती ठाकुर उपस्थित थीं। रायशुमारी की प्रक्रिया शुरू होते ही पूर्व जिलाध्यक्ष मोनू सक्सेना और कांग्रेस के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मनोज शुक्ला के समर्थकों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ती देख पर्यवेक्षक यशोमती ठाकुर ने माइक अपने हाथ में लेकर मीटिंग तत्काल समाप्त करने की घोषणा कर दी और कहा कि अब आगे की चर्चा ‘वन टू वन’ होगी।
जैसे ही पर्यवेक्षक मीटिंग से बाहर गईं, दोनों गुटों के समर्थक आपस में भिड़ गए। बैठक स्थल पर कुर्सियां फेंकी गईं और देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई। यह स्थिति न सिर्फ पार्टी के अनुशासन पर सवाल खड़े करती है, बल्कि जनता के बीच पार्टी की छवि को भी नुकसान पहुंचाने वाली साबित हो रही है।
यह पहली बार नहीं है जब संगठन सृजन अभियान की बैठक में इस तरह की अनुशासनहीनता देखने को मिली हो। इससे पहले दो दिन पूर्व मध्य विधानसभा में हुई बैठक में आरिफ मसूद और साजिद अली के समर्थक भी आपस में भिड़ गए थे। ऐसे मामलों से यह साफ जाहिर होता है कि पार्टी के भीतर संगठनात्मक मतभेद गहराते जा रहे हैं।
बता दें कि कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान की शुरुआत 3 जून को राहुल गांधी ने भोपाल दौरे के दौरान की थी। इस अभियान का उद्देश्य पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और नए नेतृत्व को सामने लाना है। इसके लिए पूरे राज्य में 61 पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है, जो विभिन्न जिलों में संगठन की स्थिति का आकलन कर रहे हैं।