Garima Vishwakarma
2 Feb 2026
कानूनी मामले अक्सर जटिल और तनावपूर्ण होते हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग किसी एडवोकेट की मदद लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय कानून में किसी व्यक्ति को अपने केस खुद लड़ने का अधिकार भी है? हां, यह संभव है। हाल ही में पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी ने वोटर लिस्ट रिवीजन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और खुद अपनी दलील पेश की। यानि कोई भी व्यक्ति कोर्ट में बिना वकील के भी अपना पक्ष रख सकता है।
भारतीय संविधान और अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में इसे स्पष्ट किया गया है। अधिनियम की धारा 32 के तहत किसी भी अदालत का जज यह अनुमति दे सकता है कि व्यक्ति खुद अपने मामले में बहस करे। इसे पार्टी-इन-पर्सन कहा जाता है। इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति जिसकी कानूनी डिग्री (LLB) नहीं है, वह कोर्ट में अपने मामले का पक्ष रख सकता है।
बिना वकील के केस लड़ने के लिए कुछ जरूरी शर्तें होती हैं-
स्वयं केस लड़ना हमेशा आसान नहीं होता। इसके लिए समय, धैर्य और कानूनी समझ जरूरी है। यह विकल्प अक्सर तब अपनाया जाता है जब कोई व्यक्ति वकील के खर्च वहन करने में असमर्थ हो। वकील किसी कारणवश मामला नहीं लेना चाहते। व्यक्ति अपने मामले को पूरी तरह समझता हो और खुद अपनी दलील पेश करना चाहता हो। इस प्रक्रिया में सावधानी बरतना जरूरी है, क्योंकि जटिल कानूनी मुद्दों में अनुभवहीन व्यक्ति को नुकसान हो सकता है।
पार्टी-इन-पर्सन होने का मतलब सिर्फ यह नहीं कि आप कोर्ट में खुद बहस कर सकते हैं। इसका एक और मतलब है कि व्यक्ति को अपनी दलील तैयार करने और प्रस्तुत करने का पूरा अधिकार है। यह अधिकार संविधान और अधिनियम द्वारा सुरक्षित किया गया है।
हालांकि, ध्यान रहे कि अदालत अपने विवेक के आधार पर ही अनुमति देती है। कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के अदालत में बहस नहीं कर सकता।
सरल शब्दों में कहें तो- आप बिना वकील के भी केस लड़ सकते हैं।