Ravneet Singh Bittu :कौन हैं रवनीत सिंह बिट्टू, क्यों छोड़ी मोदी सरकार में मंत्री की कुर्सी? जानिए पंजाब चुनाव से क्या है कनेक्शन

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, यह इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
पंजाब चुनाव में मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, रवनीत सिंह बिट्टू को अब पंजाब की राजनीति में सक्रिय भूमिका दी जा सकती है। माना जा रहा है कि भाजपा उन्हें अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में अहम जिम्मेदारी सौंप सकती है। चर्चा यह भी है कि वह किसी महत्वपूर्ण विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।
पहले से चल रही थीं अटकलें
काफी समय से यह चर्चा थी कि भाजपा बिट्टू को केंद्रीय मंत्री पद से हटाकर पंजाब में संगठन और चुनाव की जिम्मेदारी देना चाहती है। अब उनके इस्तीफे के बाद इन चर्चाओं को और बल मिला है।
राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद बढ़ी थीं चर्चाएं
रवनीत सिंह बिट्टू राज्यसभा सांसद के तौर पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे। उनका राज्यसभा कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो गया था, लेकिन पार्टी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा। इसके बाद से ही उनके मंत्री पद छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं।
पंजाब में भाजपा का अहम सिख चेहरा
रवनीत सिंह बिट्टू भाजपा के प्रमुख सिख नेताओं में गिने जाते हैं। उनका संबंध पंजाब के प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से है। उनके दादा बेअंत सिंह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। भाजपा उन्हें राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण चेहरा मानती है।
पंजाब में विस्तार की तैयारी में भाजपा
भाजपा लंबे समय से पंजाब में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में सुनील जाखड़, कैप्टन अमरिंदर सिंह, रवनीत सिंह बिट्टू और केवल सिंह ढिल्लों जैसे कई बड़े नेता पार्टी से जुड़े हैं।
अगले साल होने हैं विधानसभा चुनाव
अगले साल मार्च-अप्रैल में पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। पंजाब में फिलहाल आम आदमी पार्टी की सरकार है, जबकि कांग्रेस आंतरिक कलह से जूझ रही है। ऐसे में भाजपा इसे अपने विस्तार का अच्छा अवसर मान रही है।
सिख वोटों पर भी भाजपा की नजर
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा पंजाब में इस बार अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। पार्टी अब केवल शहरी हिंदू वोटों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सिख समुदाय में भी अपनी पकड़ मजबूत करने पर जोर दे रही है। रवनीत सिंह बिट्टू को इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।











