बेटी से दुष्कर्म करने वाले पिता को अंतिम सांस तक उम्रकैद, रायपुर कोर्ट का सख्त फैसला।

रायपुर: राजधानी रायपुर में बेटी से दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। 47 वर्षीय पिता को अपनी ही बेटी के साथ दुष्कर्म का दोषी पाए जाने पर अंतिम सांस तक उम्रकैद की सजा दी गई है। न्यायाधीश विनय प्रधान की अदालत ने आरोपी पर 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामला वर्ष 2018 से बेटी के शोषण से जुड़ा है। 30 नवंबर 2022 की रात आरोपी ने बेटे को पीटकर घर से बाहर कर दिया और इसके बाद बेटी के साथ रातभर दुष्कर्म करने का आरोप है। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई की थी।
रायपुर में रिश्ते को शर्मसार करने वाला अपराध
रायपुर में अपनी ही बेटी से दुष्कर्म करने वाले पिता को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने कड़ी सजा सुनाई है। 47 वर्षीय आरोपी को न्यायालय ने अंतिम सांस तक उम्रकैद की सजा दी है। न्यायाधीश विनय प्रधान की अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास के साथ 500 रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है।

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2018 से बेटी का कर रहा था शोषण
अभियोजन के अनुसार आरोपी वर्ष 2018 से अपनी बेटी का शोषण कर रहा था। लंबे समय तक पीड़िता इस भयावह स्थिति को सहती रही। मामले में 30 नवंबर 2022 की रात आरोपी ने अपनी दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं।
बेटे को पीटकर घर से भगाया, फिर बेटी के साथ दरिंदगी
घटना वाली रात आरोपी ने अपने बेटे के साथ मारपीट की और उसे घर से बाहर भगा दिया। इसके बाद घर में अकेली बेटी के साथ दुष्कर्म किया। आरोप है कि आरोपी ने रातभर बेटी का शोषण किया और सुबह दोबारा उसके साथ दुष्कर्म किया।
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हिम्मत जुटाकर परिजनों को बताई पूरी घटना
लगातार शोषण का सामना कर रही पीड़िता ने आखिरकार हिम्मत जुटाई और अपने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।
कोर्ट ने अपराध को बताया घृणित
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को किसी भी तरह की उदारता का पात्र नहीं माना। न्यायालय ने माना कि अपनी ही पुत्री के साथ इस तरह का घृणित कृत्य करने वाले आरोपी को कठोर दंड मिलना चाहिए।

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अंतिम सांस तक जेल में रहेगा आरोपी
रायपुर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को जीवन के अंतिम समय तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड नहीं चुकाने पर आरोपी को एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
कोर्ट के सख्त फैसले से स्पष्ट संदेश
इस मामले में अदालत का फैसला न केवल अपराध की गंभीरता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि नाबालिग या पारिवारिक रिश्तों की आड़ में होने वाले यौन अपराधों में कानून बेहद सख्त रुख अपना सकता है।




















