निलंबित IPS रतनलाल डांगी मामले में हाईकोर्ट सख्त,पुलिस से 7 दिन में मांगा शपथपत्र

प्रेम कुमार, रायपुर: बिलासपुर हाईकोर्ट ने निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ महिला उत्पीड़न से जुड़े मामले में पुलिस विभाग की जवाबदेही तय करते हुए सख्त रुख अपनाया है। 2 सितंबर की सुनवाई में पुलिस की ओर से जवाब पेश नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। अब संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। जवाब नहीं आने पर ऑफिसर-इन-चार्ज को 29 सितंबर की अगली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना होगा।
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हाईकोर्ट ने पूछा- अब तक जवाब क्यों नहीं?
महिला उत्पीड़न से जुड़े इस मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग की ओर से अपेक्षित जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
एक सप्ताह की मोहलत, नहीं तो कोर्ट में पेशी
कोर्ट ने साफ किया है कि एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल किया जाए। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं आने की स्थिति में ऑफिसर-इन-चार्ज को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को निर्धारित है।
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योगा टीचर ने लगाए गंभीर आरोप
याचिका के मुताबिक, पीड़िता योगा टीचर हैं। उनका आरोप है कि तत्कालीन IG रतनलाल डांगी ने व्यस्तता का हवाला देते हुए वीडियो कॉल के जरिए उनसे योग सीखना शुरू किया। इसके बाद कथित तौर पर उनके व्हाट्सऐप नंबर पर अश्लील संदेश भेजे जाने और वीडियो कॉल के दौरान अश्लील व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया गया है।

विरोध किया तो धमकी देने का आरोप
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि विरोध करने पर उन्हें धमकियां दी गईं। शिकायत के मुताबिक, उनके और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने तथा उनके पति के खिलाफ कथित तौर पर झूठा आपराधिक मामला दर्ज कराने की धमकी भी दी गई।
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DGP से शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। इसके बाद मामले की जांच के लिए IPS अधिकारी आनंद छाबड़ा और मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।
गृह विभाग तक पहुंची शिकायत
याचिका के अनुसार, कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पीड़िता ने 20 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार के गृह विभाग के सचिव और छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग के सचिव के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत की थी। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।
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जांच अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में तर्क दिया गया कि शिकायत की जांच ऐसे अधिकारियों से कराई जा रही है, जिनकी भूमिका पर खुद याचिकाकर्ता ने आपत्ति जताई है। याचिका में आरोप लगाया गया कि जांच अधिकारी आरोपी अधिकारी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
आनंद छाबड़ा को लेकर भी याचिका में आपत्ति
याचिका में यह भी कहा गया है कि IG आनंद छाबड़ा के खिलाफ महादेव सट्टा एप से संबंधित आपराधिक प्रकरण विचाराधीन है। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने उन्हें इस संवेदनशील मामले की जांच सौंपे जाने पर सवाल उठाया और इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत बताया।
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कथित संपत्तियों की जांच की मांग
पीड़िता की शिकायत में रतनलाल डांगी से संबंधित बताई गई कथित चल-अचल संपत्तियों की जांच और वैधानिक कार्रवाई की मांग भी की गई थी। शिकायत में रायपुर, धरमपुरा, राजिम, कटघोरा, बिलासपुर समेत राजस्थान के विभिन्न स्थानों पर कथित संपत्तियों का उल्लेख किए जाने की बात कही गई है।
12 अगस्त के आदेश के बाद भी नहीं आया जवाब
मामले में 12 अगस्त 2026 की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इसे संवेदनशील मामला मानते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा था। लेकिन 2 सितंबर 2026 की सुनवाई में जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।
अब 29 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह में शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को होगी। यदि तय समय में जवाब दाखिल नहीं किया जाता है, तो ऑफिसर-इन-चार्ज को कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा।




















