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बेटी, पत्नी या मां से आगे भी है महिलाओं की पहचान, छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने मनुस्मृति का किया जिक्र

पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता, सुरक्षा और पहचान को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने मनुस्मृति का हवाला देते हुए कहा कि महिलाओं को कभी स्वतंत्र नहीं रहने देने की सोच से अलग देश को आगे बढ़ने की जरूरत है। राहुल गांधी ने महिलाओं को भारत की सबसे बड़ी ताकत और संपत्ति बताया।
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बेटी, पत्नी या मां से आगे भी है महिलाओं की पहचान, छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने मनुस्मृति का किया जिक्र
छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने मनुस्मृति का किया जिक्र

पुणे। राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को केवल मां, पत्नी या बेटी की भूमिका तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि उनकी अपनी अलग पहचान, सपने और क्षमताएं हैं। उन्होंने मनुस्मृति का हवाला देते हुए कहा कि उसमें महिला को जीवन के अलग-अलग चरणों में पिता, पति और बेटों के अधीन रहने की बात कही गई है। राहुल गांधी के मुताबिक भारत की असली ताकत उसकी महिलाएं हैं, जो अपने लिए खड़ी होती हैं, स्वतंत्र रहती हैं और खुद पर विश्वास करती हैं। उन्होंने कहा कि देश की 70 करोड़ महिलाओं की अलग-अलग यात्राएं, कल्पनाएं और सपने भारत की सबसे बड़ी संपत्ति हैं।

पुणे में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में बोले राहुल गांधी 

22 अगस्त 2026 को पुणे के AISSMS कॉलेज ग्राउंड में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी ताकत महिलाओं का स्वतंत्र होकर अपने लिए खड़ा होना और खुद पर विश्वास करना है। राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को केवल मां, पत्नी या बेटी की भूमिका तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने मनुस्मृति का हवाला देते हुए कहा कि उसके अनुसार बचपन में महिला पिता के अधीन, युवावस्था में पति के अधीन और पति की मृत्यु के बाद बेटों के अधीन रहती है। राहुल गांधी ने कहा कि मनुस्मृति के अनुसार महिला को कभी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए, लेकिन भारत को महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मविश्वास को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

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'महिलाओं को 3 भूमिकाओं में बांटकर देखा जाता है'

कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि जब वह पुरुषों से बात करते हैं तो महिलाओं को अक्सर तीन भूमिकाओं में बांटकर देखा जाता है- बेटी, पत्नी या मां। उन्होंने कहा कि इन भूमिकाओं में पहचान होने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन यही किसी महिला की एकमात्र पहचान नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि देश में कई प्रतिभाशाली महिलाएं अलग-अलग क्षेत्रों में शानदार काम कर रही हैं। महिलाएं प्रोफेशनल हैं, खिलाड़ी हैं और कई तरह के काम करती हैं। ऐसे में उनकी पहचान केवल बेटी, पत्नी या मां तक सीमित करना उनके व्यक्तित्व और क्षमताओं को सीमित करने जैसा है।

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'महिलाएं स्वभाव से पुरुषों की तुलना में अधिक संवेदनशील होती है'

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि महिलाएं स्वभाव से पुरुषों की तुलना में अधिक संवेदनशील, कोमल, दयालु और दूर की सोच रखने वाली होती हैं। उन्होंने इसी आधार पर भारत की महिलाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया। राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं के भीतर मौजूद संवेदनशीलता और दूर की सोच देश के लिए महत्वपूर्ण है। महिलाओं को अपनी बात रखने और अपने लिए खड़े होने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उनके मुताबिक महिलाओं का आत्मविश्वास और स्वतंत्रता देश की प्रगति में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

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70 करोड़ महिलाओं के सपनों को बताया भारत की सबसे बड़ी संपत्ति

राहुल गांधी ने कहा कि जब उनसे पूछा जाता है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत क्या है, तो कोई देश की अर्थव्यवस्था, सेना, स्वास्थ्य व्यवस्था या लोगों को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताता है। भारत की सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी संपत्ति देश की महिलाओं की 70 करोड़ अलग-अलग यात्राएं, कल्पनाएं और सपने हैं। हर महिला की अपनी कहानी, अपनी सोच और अपने सपने हैं। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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