Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

नायका टास्क से जीता भरोसा, फर्जी मेंटर ने ठगे 4.76 लाख; ATM से USDT और टेलीग्राम के जरिए चीन तक पहुंची ठगी की रकम

सीहोर में वर्क फ्रॉम होम के नाम पर गृहिणी से 4.76 लाख रुपए की साइबर ठगी हुई। 200 रुपए देकर भरोसा जीतने वाले ठगों ने फर्जी टास्क और वॉलेट के जरिए रकम ऐंठी। जांच में ATM, USDT और टेलीग्राम के जरिए चीनी नागरिक तक पहुंचने वाले नेटवर्क का खुलासा हुआ।
Follow on Google News
नायका टास्क से जीता भरोसा, फर्जी मेंटर ने ठगे 4.76 लाख; ATM से USDT और टेलीग्राम के जरिए चीन तक पहुंची ठगी की रकम

घर बैठे कमाई का लालच, व्हाट्सएप पर भेजा गया वर्क फ्रॉम होम का ऑफर और शुरुआत में महज 200 रुपये का भुगतान... साइबर ठगों ने इसी भरोसे को हथियार बनाकर सीहोर की न्यू एवेन्यू कॉलोनी निवासी गृहिणी कंचन तोमर को अपने जाल में फंसा लिया। देखते ही देखते महिला से 4 लाख 76 हजार 999 रुपये अलग-अलग खातों और यूपीआई आईडी में ट्रांसफर करा लिए गए। मामला यहीं नहीं रुका। पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो ठगी की रकम के पीछे ATM से लेकर क्रिप्टोकरेंसी USDT और टेलीग्राम के जरिए एक विदेशी कनेक्शन भी सामने आया।

7 अप्रैल को आया था वर्क फ्रॉम होम का मैसेज

मामला सीहोर की न्यू एवेन्यू कॉलोनी निवासी गृहिणी कंचन तोमर से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, 7 अप्रैल 2026 को उनके व्हाट्सएप पर वर्क फ्रॉम होम से जुड़ा एक मैसेज आया था। उन्हें बताया गया कि ऑनलाइन टास्क पूरे करने के बदले घर बैठे कमाई की जा सकती है। शुरुआत में उन्हें नायका प्लेटफॉर्म से जुड़े छोटे-छोटे टास्क दिए गए। महिला ने जब ये टास्क पूरे किए तो उसे 200 रुपए का भुगतान किया गया। यही छोटी रकम आगे होने वाली बड़ी ठगी की नींव बनी। महिला को लगा कि सामने से मिलने वाला काम वास्तविक है और इससे कमाई की जा सकती है।

200 रुपए के बाद शुरू हुआ असली खेल

भरोसा बनने के बाद महिला को टेलीग्राम पर 'Aditi Dwivedi' नाम की आईडी और दूसरे मेंटर्स से जोड़ा गया। इसके बाद उसे बताया गया कि ज्यादा कमाई के लिए प्रीपेड टास्क पूरे करने होंगे। पहले रकम जमा करनी होगी और टास्क पूरा होने के बाद मुनाफे के साथ पैसा वापस मिल जाएगा। महिला से अलग-अलग UPI ID और बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए जाने लगे। हर बार उसे भरोसा दिलाया गया कि जमा की गई रकम उसके ऑनलाइन वॉलेट में जुड़ रही है और टास्क पूरा होते ही वह इसे निकाल सकेगी।

फर्जी वॉलेट में बढ़ता रहा बैलेंस

साइबर ठगों ने महिला को एक ऑनलाइन सिस्टम के जरिए वॉलेट बैलेंस दिखाया। स्क्रीन पर रकम लगातार बढ़ती दिखाई जाती रही। इसके बाद ठगों ने क्रेडिट स्कोर अपडेट, प्रीपेड टास्क और दूसरे शुल्क के नाम पर और पैसे मांगने शुरू कर दिए। महिला को लग रहा था कि उसके खाते में कमाई जमा हो रही है और जल्द ही पूरी रकम वापस मिल जाएगी। इसी उम्मीद में वह अलग-अलग चरणों में भुगतान करती चली गई।

4.76 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के झांसे में आकर कंचन तोमर ने कुल 4,76,999 रुपये अलग-अलग बैंक खातों और UPI ID में ट्रांसफर कर दिए। लेकिन इसके बाद भी ठगों की मांग खत्म नहीं हुई। जब महिला से दोबारा 1.50 लाख रुपये जमा करने के लिए कहा गया तो उसे शक हुआ। उसे समझ आया कि जितनी रकम वह जमा कर रही है, वह वापस मिलने के बजाय लगातार नई मांग में फंसती जा रही है। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत की।

Breaking News

कोतवाली पुलिस ने दर्ज किया केस

शिकायत मिलने के बाद सीहोर के थाना कोतवाली में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस दस्तावेज के मुताबिक, अपराध क्रमांक 238/26 दर्ज कर धारा 318(4) BNS के तहत जांच शुरू की गई। मामले को NCRP पोर्टल पर भी दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने महिला के खाते से निकली रकम की मनी ट्रेल खंगालनी शुरू की। जांच का फोकस इस बात पर था कि पैसा किन खातों में गया और वहां से आगे कहां ट्रांसफर किया गया।

ATM से नकदी निकली तो मिली पहली बड़ी कड़ी

तकनीकी जांच में पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम में से कुछ राशि 9 और 10 अप्रैल 2026 को अलग-अलग ATM से निकाली गई थी। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और स्थानीय मुखबिर तंत्र की मदद से इंदौर तक जांच पहुंचाई। पुलिस ने बाणगंगा निवासी गोपाल सेन और परदेशीपुरा निवासी सुमित कोष्ठी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि दोनों कथित तौर पर ATM से निकाली गई रकम को आगे पहुंचाने का काम करते थे।

5 प्रतिशत कमीशन के बदले करते थे कैश कलेक्शन

पुलिस पूछताछ के मुताबिक, गोपाल और सुमित ATM से निकाली गई रकम बाणगंगा निवासी आर्यन अम्बेडकर को देते थे। इसके बदले उन्हें करीब 5 प्रतिशत कमीशन मिलता था। यानी साइबर ठगी से ऑनलाइन हासिल की गई रकम को पहले ATM के जरिए नकद में बदला जाता था और फिर उसे नेटवर्क की अगली कड़ी तक पहुंचाया जाता था। इसी मनी ट्रेल ने पुलिस को इस गिरोह की अगली परत तक पहुंचाया।

नकदी के बाद USDT में बदली जाती थी रकम

आर्यन अम्बेडकर और उसके साथी ऋतेश प्रजापत को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया। पूछताछ में पुलिस को साइबर ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने की जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, आर्यन ने पूछताछ में बताया कि साइबर फ्रॉड से मिली रकम से USDT खरीदी जाती थी। इसके बाद इस रकम को आगे भेजने के लिए टेलीग्राम का इस्तेमाल किया जाता था।

पूर्व SDOP पर शादी का झांसा देकर यौन शोषण का आरोप, 2017 में हुई थी पहचान; SC/ST एक्ट में भी केस दर्ज

टेलीग्राम से चीनी नागरिक तक पहुंचती थी रकम

जांच में इस नेटवर्क का विदेशी कनेक्शन भी सामने आया। पुलिस के मुताबिक, आर्यन ने बताया कि USDT खरीदने के बाद उसे टेलीग्राम ग्रुप के जरिए 'मैटी (Matty)' नाम के चीनी नागरिक को भेजा जाता था। इसके बदले आर्यन को करीब 10 प्रतिशत कमीशन मिलने की बात पुलिस पूछताछ में सामने आई है। इस जानकारी के बाद पुलिस की जांच का दायरा स्थानीय आरोपियों से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क तक पहुंच गया।

पांचवां आरोपी भी गिरफ्तार

पुलिस ने आर्यन से मिली जानकारी के आधार पर इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र के रहने वाले अनुराग पटेल को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, अनुराग ने भी साइबर फ्रॉड की रकम से USDT खरीदकर उसे टेलीग्राम के जरिए चीनी नागरिक मैटी तक पहुंचाने की बात स्वीकार की। पूछताछ में उसने इस काम में शिवेंद्र सिंह राजपूत के शामिल होने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने शिवेंद्र की तलाश शुरू कर दी है।

पांच गिरफ्तार, एक फरार

कोतवाली थाना प्रभारी रविंद्र यादव के मुताबिक, मामले में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें गोपाल सेन, सुमित कोष्ठी, आर्यन अम्बेडकर, ऋतेश प्रजापत और अनुराग पटेल शामिल हैं। वहीं, पुलिस के अनुसार शिवेंद्र सिंह राजपूत अभी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

Featured News

पुलिस खंगाल रही पूरी मनी ट्रेल

नगर पुलिस अधीक्षक अभिनंदना शर्मा ने बताया कि पुलिस इस मामले की पूरी मनी ट्रेल की जांच कर रही है। बैंक खातों, UPI ट्रांजेक्शन, ATM से निकाली गई रकम, USDT खरीद और टेलीग्राम पर हुए संपर्कों का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग जुड़े हैं और क्या इसी तरीके से दूसरे लोगों के साथ भी साइबर ठगी की गई है।

छोटे भुगतान से बड़े फर्जीवाड़े तक पहुंचा मामला

इस पूरे मामले में ठगों ने भरोसा जीतने के लिए पहले छोटी रकम का इस्तेमाल किया। 200 रुपए का भुगतान मिलने के बाद महिला को लगा कि उसे वास्तविक ऑनलाइन काम मिला है। इसके बाद फर्जी मेंटर्स, प्रीपेड टास्क और ऑनलाइन वॉलेट के जरिए उसे लगातार ज्यादा रकम जमा करने के लिए तैयार किया गया। मामला तब खुला, जब लाखों रुपये जमा कराने के बाद भी पैसे वापस नहीं मिले और ठगों ने फिर 1.50 लाख रुपए की मांग कर दी। महिला की शिकायत से शुरू हुई जांच अब ATM से नकदी निकालने वालों से लेकर USDT और टेलीग्राम के जरिए विदेशी कनेक्शन तक पहुंच चुकी है। पुलिस अब फरार आरोपी की तलाश के साथ इस पूरे नेटवर्क की बाकी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच आगे बढ़ने पर इस साइबर ठगी से जुड़े और लोगों के नाम सामने आने की संभावना है।

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

सुनील शर्मा, सीहोर जिला ब्यूरो, पीपुल्स समाचार ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक भास्कर, पत्रि...Read More

Latest Posts