रायसेन: लुटनगर गांव में मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे लोग, सड़क के अभाव में परेशान ग्रामीण

बेगमगंज। हप्सिली से करीब एक किलोमीटर दूर बसे लुटनगर गांव तक पहुंचने के लिए आज भी कच्ची सड़क ही एकमात्र साधन है। बारिश में रास्ता खराब होने से ग्रामीणों, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीण बिजली और पेयजल की समस्या से भी जूझ रहे हैं और कई बार मांग के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
न सड़क, न पानी
हप्सिली से करीब एक किलोमीटर दूर बसे लुटनगर गांव में लगभग 100 लोगों की आबादी है। गांव तक पहुंचने के लिए आज भी पक्की सड़क नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार हप्सिली से लगी कच्ची सड़क ही गांव के लिए एकमात्र आवागमन का साधन है। बारिश के दिनों में यह रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन गांव तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।
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वाहन रास्ते में छोड़कर पैदल जाते हैं ग्रामीण
बारिश में रास्ते की हालत इतनी खराब हो जाती है कि कई बार ग्रामीण अपने वाहन रास्ते में ही खड़े कर करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्र से लगभग कट जाता है।
बच्चों को भी कीचड़ भरे रास्ते से जाना पड़ता है
गांव के छात्र-छात्राओं को रोजाना इसी कच्चे और बारिश में कीचड़ से भरे रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ता है। रास्ते की खराब स्थिति के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सड़क की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान नहीं हुआ।
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गर्मी में पेयजल की समस्या
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में बिजली की भी स्थायी और समुचित व्यवस्था नहीं है। लोग अपनी निजी केबल डालकर हप्सिली से बिजली लेकर घरों में रोशनी कर रहे हैं, जबकि गर्मी के दिनों में पेयजल की समस्या भी बनी रहती है। ग्रामीण कुंदनलाल, मुन्नालाल, दीपक, दिनेश, लेखराम, रामवीर और राजेंद्र सहित अन्य लोगों ने बताया कि सड़क, बिजली और पानी की सुविधा के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की जा चुकी है, लेकिन आज तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि आबादी भले ही छोटी है, लेकिन यहां रहने वाले लोग भी शहर और अन्य गांवों के नागरिकों की तरह मूलभूत सुविधाओं के हकदार हैं। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गांव तक पक्की सड़क, नियमित बिजली और पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।





















