दुख की घड़ी में परिवार का बड़ा फैसला, जगदीश गुप्ता के निधन के बाद नेत्रदान

खिलचीपुर। किसी अपने को खोने का दुख बेहद मुश्किल होता है, लेकिन इसी दुख के बीच खिलचीपुर के एक परिवार ने मानव सेवा की मिसाल पेश की है। अमर नेत्रदानी जगदीश गुप्ता के निधन के बाद उनके परिवार ने नेत्रदान का फैसला लिया। यह मेड़तवाल समाज का 90वां और खिलचीपुर का दूसरा नेत्रदान है।
कोटा में हुआ निधन
72 वर्षीय जगदीश गुप्ता का शुक्रवार-शनिवार की मध्यरात्रि करीब 3 बजे कोटा में निधन हुआ। परिवार उनके पार्थिव शरीर को खिलचीपुर लेकर रवाना हो रहा था। इसी दौरान परिजनों ने नेत्रदान की इच्छा जताई। इसके बाद मेड़तवाल रक्त नेत्र मित्र समिति के बबलू गुप्ता अकलेरा के माध्यम से संपर्क किया गया।
एंबुलेंस में पूरी हुई नेत्रदान की प्रक्रिया
नेत्रदान के लिए समय महत्वपूर्ण होने के कारण परिवार से कोटा में ही कुछ समय रुकने का अनुरोध किया गया। जगदीश गुप्ता के तीनों बेटों आशीष, अमित और अर्पित समेत अन्य परिजनों ने सहमति दे दी। इसके बाद कमलेश दलाल भवानीमंडी के माध्यम से कोटा की शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम को बुलाया गया। करीब सुबह 8 बजे एंबुलेंस में ही नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई।
दो लोगों की जिंदगी में आएगी रोशनी
परिवार के इस फैसले से जगदीश गुप्ता के नेत्र दो नेत्रहीन लोगों के जीवन में रोशनी का माध्यम बनेंगे। अपने प्रियजन के निधन के दुख के बीच परिवार का यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है।
समय पर नेत्रदान क्यों जरूरी?
नेत्रदान की प्रक्रिया अस्पताल, घर, मुक्तिधाम या एंबुलेंस में भी परिस्थितियों के अनुसार की जा सकती है। ऐसे में अगर किसी परिवार ने नेत्रदान का संकल्प लिया है और वह कोटा या इंदौर के आसपास है, तो घर पहुंचने का इंतजार करने के बजाय समय रहते प्रक्रिया पूरी करना महत्वपूर्ण होता है।
मेड़तवाल समाज का 90वां नेत्रदान
जगदीश गुप्ता के नेत्रदान के साथ मेड़तवाल समाज में अब तक 90वां नेत्रदान हुआ है, जबकि खिलचीपुर से यह दूसरा नेत्रदान है। समाज में बढ़ रही नेत्रदान की जागरूकता और परिवार के इस फैसले की लोगों ने सराहना की। परिवार की इस पहल ने यह संदेश दिया कि दुख की घड़ी में भी किसी दूसरे के जीवन में रोशनी लाने का संकल्प लिया जा सकता है।





















