पीटी उषा के पति वी. श्रीनिवासन का निधन :67 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, PM मोदी ने जताया दुख

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद पीटी उषा के पति वी. श्रीनिवासन का शुक्रवार तड़के निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे। अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। पीएम मोदी ने फोन कर पीटी उषा को सांत्वना दी।
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67 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, PM मोदी ने जताया दुख
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    स्पोर्ट्स डेस्क। भारतीय खेल जगत के लिए शुक्रवार की सुबह एक बेहद दुखद खबर लेकर आई। उड़नपरी के नाम से विख्यात भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद पीटी उषा के पति वी. श्रीनिवासन का शुक्रवार तड़के निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे। जानकारी के अनुसार, श्रीनिवासन अपने आवास पर अचानक गिर पड़े। जिसके बाद उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।

    इस दुखद खबर के सामने आते ही खेल, सामाजिक और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। देशभर से नेताओं, खिलाड़ियों और खेल संगठनों की ओर से शोक संदेश आने लगे। श्रीनिवासन के निधन को पीटी उषा के जीवन का एक बड़ा व्यक्तिगत नुकसान माना जा रहा है, क्योंकि वे न सिर्फ उनके जीवनसाथी थे, बल्कि उनके पूरे करियर के सबसे मजबूत स्तंभ भी माने जाते थे।

    PM मोदी ने फोन कर जताया दुख

    वी. श्रीनिवासन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीटी उषा से फोन पर बात की और गहरा दुख व्यक्त करते हुए सांत्वना दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि, इस कठिन समय में पूरा देश उनके साथ खड़ा है और ईश्वर उन्हें और उनके परिवार को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।

    प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि श्रीनिवासन का जीवन सादगी, सेवा और समर्पण का प्रतीक रहा है। उन्होंने हमेशा पर्दे के पीछे रहकर पीटी उषा के संघर्ष और सफलता को मजबूती दी।

    किरेन रिजिजू ने जताया शोक

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    उषा के जीवन का सबसे मजबूत सहारा

    केंद्र सरकार के पूर्व कर्मचारी रहे वी. श्रीनिवासन, पीटी उषा के खेल और राजनीतिक जीवन में हमेशा उनके साथ खड़े रहे। चाहे खेल का कठिन दौर हो या सार्वजनिक जीवन की जिम्मेदारियां, हर मोड़ पर उन्होंने उषा का साथ दिया। उन्हें उषा की सफलता के पीछे सबसे मजबूत स्तंभ और प्रेरणा शक्ति माना जाता था। वे कभी लाइमलाइट में नहीं रहे, लेकिन उनके योगदान को जानने वाले लोग उन्हें पर्दे के पीछे का हीरो कहते हैं। खेल प्रशासन, खिलाड़ियों की मदद और खेल से जुड़े सामाजिक कार्यों में उनकी गहरी रुचि रही।

    कौन थे वी. श्रीनिवासन?

    वी. श्रीनिवासन एक सादगीपूर्ण लेकिन मजबूत व्यक्तित्व के धनी इंसान थे। वे केंद्र सरकार के पूर्व कर्मचारी रहे और उन्होंने CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) में इंस्पेक्टर के पद पर सेवाएं दी थीं। इससे पहले वे सीमा शुल्क (Customs) विभाग से भी जुड़े रहे थे।

    सिर्फ सरकारी सेवा ही नहीं, बल्कि खेल से भी उनका गहरा रिश्ता था। वे स्वयं कबड्डी खिलाड़ी रह चुके थे और खेलों के प्रति उनकी रुचि हमेशा बनी रही। खेल प्रशासन और खिलाड़ियों के सहयोग से जुड़े कई कार्यों में उनकी सक्रिय भूमिका रही।

    उनकी शादी 25 अप्रैल 1991 को पीटी उषा से हुई थी। दंपति का एक बेटा उज्ज्वल है। पारिवारिक जीवन में श्रीनिवासन को एक शांत, सहयोगी और समर्पित व्यक्ति के रूप में जाना जाता था।

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    पीटी उषा का गौरवशाली

    पीटी उषा भारतीय खेल इतिहास का एक बड़ा नाम हैं। वे 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में 400 मीटर बाधा दौड़ के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। उस ऐतिहासिक दौड़ में वे सिर्फ 1/100 सेकंड से कांस्य पदक से चूक गई थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पूरे देश का दिल जीत लिया था।

    उनकी इसी उपलब्धि ने उन्हें उड़नपरी का खिताब दिलाया। भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री और अर्जुन पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया है। खेल से संन्यास के बाद भी वे खेल प्रशासन में सक्रिय रहीं और आज भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष के रूप में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। साथ ही वे राज्यसभा सांसद भी हैं।

    खेल और सामाजिक जगत में शोक की लहर

    वी. श्रीनिवासन के निधन की खबर फैलते ही खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई। कई खिलाड़ियों, खेल संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने सोशल मीडिया के जरिए शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। सभी ने उन्हें एक सादा जीवन जीने वाले, सहयोगी और प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में याद किया।

    खेल जगत से जुड़े कई लोगों का कहना है कि, श्रीनिवासन भले ही कैमरों के सामने नजर नहीं आते थे, लेकिन उनका योगदान किसी बड़े अधिकारी या पदाधिकारी से कम नहीं था।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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