Hemant Nagle
30 Jan 2026
पल्लवी वाघेला, भोपाल। कहीं पत्नी घरेलू हिंसा का केस न लगा दें..., मेरे साथ पूरा परिवार थाने न पहुंच जाएं। कुछ इसी तरह के डर से इन दिनों पति गुजर रहे हैं। इसका खुलासा करते हैं, विभिन्न फोरम पर पहुंच रहे अग्रिम आवेदन। पतियों द्वारा अग्रिम आवेदन देकर सहायता मांगी जा रही है कि पत्नी उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर दबाव बनाती है।
अकेले भोपाल जिले में बीते साल इस तरह के 139 आवेदन पहुंचे हैं। वहीं, इंदौर में 203, जबलपुर में 106 और ग्वालियर में 91 ऐसे ही आवेदन पहुंचे हैं। प्रदेश के अन्य जिलों में भी हाल ऐसा ही है। इसमें मानसिक प्रताड़ना, दहेज उत्पीड़न, अत्महत्या के मामले में फंसाने की धमकी दी गई है। एक्सपर्ट के मुताबिक महिला हित में बने अधिकारों के दुरुपयोग के तोड़ के रूप में पुरुषों ने इस नए ट्रेंड को अपनाया है। बीते दो सालों से इस तरह के आवेदनों में इजाफा नजर आ रहा है।
महिला आयोग पहुंचे एक मामले में पति ने बताया कि पत्नी खुद को घंटों कमरे में बंद रखकर धमकाती है कि आत्महत्या कर दोष तुम पर मढ़ दूंगी। यह कहकर वह हर जिद मनवाती है। हालांकि, यहां पति का आवेदन नहीं लिया गया। ऐसे में पति ने डालसा में आवेदन दिया। यहां दोनों में समझौता हुआ।
इंदौर के मामले में पति ने थाने में लिखित आवेदन देकर कहा कि पत्नी ने उसे दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के मामले में फंसाने की धमकी दी है। पति ने कुछ साक्ष्य भी पेश कर कहा कि वह अग्रिम आवेदन इसलिए दे रहा है ताकि आगे झूठी शिकायत होने पर उसका पक्ष मजबूत हो सके।
जबलपुर के मामले में पति ने दिसंबर माह में आवेदन दिया था। उसने बताया कि बहन की शादी तय हो चुकी है। अब पत्नी पैतृक घर अपने नाम कराने के लिए धमका रही है कि उसकी बात न मानने पर वह बहन सहित सभी के नाम से थाने में शिकायत कर देगी। पत्नी ने एक दिन हाथ काटने का नाटक भी किया और धमकाया कि अगली बार थाने पहुंच जाऊंगी कि तुम सब मिलकर मारने की कोशिश कर रहे हो। थाने से समझाइश मिलने के बाद अभी पत्नी शांत है।
एडवोकेट विजय बहादुर सिंह तोमर ने कहा कि पुरुष अपने लिए कानूनी सुरक्षा चाहते हैं। वह इस तरह का माहौल देख रहे हैं, जिसमें एक शिकायत के बाद पुरुष और उनके परिवार को सालों कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं। यही वजह है कि वह अग्रिम आवेदन देकर स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि वह किस मानसिक स्थिति से गुजर रहे हैं।
इस तरह के ज्यादातर मामलों में पत्नियों की मंशा अपनी कोई बात मनवाने की होती है। जब यह मामले हमारे पास आते हैं तो दोनों पक्षों से बात करते हैं। कुछ मामलों में पत्नी की जायज मांग हो तो सुलह से बात संभल जाती है और कुछ मामलों में पत्नी को जिद छोड़ने के लिए समझाते हैं, लेकिन इस तरह के 70 फीसद मामलों में समझौते संभव होते हैं।
शैल अवस्थी, काउंसलर