गड्ढे, धुआं और जाम बेहिसाब:फिर भी इंदौर को ‘स्वच्छ वायु’ का अवॉर्ड!

इंदौर। जिस शहर की सड़कों पर इन दिनों धूल उड़ रही है, जगह-जगह गड्ढे दिखाई दे रहे हैं, वाहनों का धुआं हवा में घुल रहा है और दिनभर लगने वाले जाम में हजारों वाहन प्रदूषण बढ़ा रहे हैं, उसी इंदौर को अब ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सराहना पुरस्कार’ से नवाजा गया है। यही वजह है कि इस अवॉर्ड ने शहर के नागरिकों को हैरान करने के साथ-साथ व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नई दिल्ली के इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इंदौर को यह सम्मान प्रदान किया। महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और महापौर परिषद सदस्य अश्विनी शुक्ल ने दिल्ली पहुंचकर अवॉर्ड हासिल किया। नगर निगम की ओर से दावा किया गया कि इंदौर ने धूल नियंत्रण, वैज्ञानिक सड़क सफाई, हरित पट्टियों के विकास, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वायु गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है। लेकिन शहर की सड़कों पर नजर डालें तो तस्वीर कई जगह इस दावे से उलट दिखाई देती है।
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अवार्ड चमकदार, लेकिन सड़कों की हालत बेहाल
इंदौर को स्वच्छता में लगातार नंबर वन बनाए रखने के दावों के बीच शहर के नागरिक पिछले कुछ वर्षों से सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ती गंदगी और जगह-जगह दिखाई देने वाले कचरे के ढेर को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। अब स्वच्छ वायु के पुरस्कार ने भी इसी बहस को फिर हवा दे दी है। हल्की बारिश के बाद ही शहर की कई सड़कें गड्ढों में तब्दील नजर आने लगी हैं। जहां सड़कें ठीक हैं, वहां यातायात का दबाव और जाम लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। वाहनों की लंबी कतारों में इंजन चालू रहने से निकलने वाला धुआं आखिर हवा को कितना साफ कर रहा है, यह सवाल अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है। यानी एक तरफ सरकारी मंच से ‘स्वच्छ वायु’ के लिए इंदौर की उपलब्धियों का सम्मान, दूसरी तरफ सड़क पर धूल, धुआं, गड्ढे और जाम... दोनों तस्वीरें एक साथ दिखाई दे रही हैं।
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एक नंबर से चूका नंबर वन का ताज
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में इंदौर इस बार पहले स्थान से महज एक अंक से चूक गया। लखनऊ ने इंदौर से एक अंक अधिक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि इंदौर दूसरे और मध्य प्रदेश का जबलपुर तीसरे स्थान पर रहा। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, यातायात व्यवस्था और औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण जैसे मानकों को आधार बनाया गया था। इंदौर ने इन क्षेत्रों में किए गए प्रयासों के आधार पर दूसरा स्थान हासिल किया।
डस्ट कंट्रोल से लेकर सीएनजी तक का दिया गया हवाला
नगर निगम के अनुसार शहर में सड़क से धूल के कण हटाने के लिए स्वीपिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। डस्टबिन से कचरा नियमित रूप से उठाए जाने और ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक निष्पादन को भी वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में अहम कदम बताया गया है। यातायात व्यवस्था में रेड लाइट ऑन, इंजन ऑफ जैसे अभियान चलाए गए। इसके अलावा सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल को भी वायु प्रदूषण कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया है। औद्योगिक क्षेत्रों में भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए सीएनजी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का दावा किया गया है।
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ग्रीन-स्वच्छ सिटी के बाद अब स्वच्छ हवा का तमगा
इंदौर को पहले भी ग्रीन और क्लीन सिटी जैसे तमगे मिलते रहे हैं। अब राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में दूसरा स्थान मिलने के बाद शहर के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है।



















