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‘न गुरु, न संगीत की क्लास… सब हनुमान जी की कृपा’: सुनील लोधी ने सुनाई संघर्ष की कहानी, गाया लोकप्रिय भजन

बुंदेलखंड की माटी से निकले गायक सुनील लोधी ने सिद्धपुर में अपने संघर्ष की कहानी सुनाई। बोले- न गुरु मिला, न संगीत की क्लास ली, लता जी से प्रेरणा और हनुमान जी की कृपा ने पहचान दिलाई
‘न गुरु, न संगीत की क्लास… सब हनुमान जी की कृपा’: सुनील लोधी ने सुनाई संघर्ष की कहानी, गाया लोकप्रिय भजन
सीहोर। सुनील लोधी ने बताया कैसे संघर्ष से पहचान तक पहुंची आवाज

सीहोर। बुंदेलखंड की माटी से निकली एक आवाज जब लाखों लोगों के दिलों तक पहुंची तो उसके पीछे किसी बड़े संगीत विद्यालय की डिग्री नहीं, बल्कि वर्षों का संघर्ष, सुरों के प्रति जुनून और भगवान हनुमान के प्रति अटूट आस्था थी। लोकप्रिय भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई’ से देशभर में पहचान बनाने वाले गायक सुनील लोधी ने सिद्धपुर में अपनी संघर्ष यात्रा साझा की। श्री लोधी प्रादेशिक मटकी फोड़ आयोजन में शामिल होने सीहोर आए थे।

‘जो कुछ मिला, हनुमान जी की कृपा से मिला’

सुनील लोधी ने कहा कि उन्हें सिद्धपुर आने का सौभाग्य मिला, इसके लिए वे टीवी, सृष्टि और देशवासियों सहित सभी दर्शकों का दिल से धन्यवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके ‘हनुमान अंश’ फिल्म में आए गाने के पीछे बहुत बड़ी कहानी, सीख और संघर्ष छिपा है। आज वह जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, वह केवल उनकी मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि हनुमान जी की कृपा, उनका आशीर्वाद और दर्शकों का प्यार है।

‘मेरे पास न संगीत की क्लास थी, न कोई गुरु’

अपनी संगीत यात्रा के बारे में पूछे जाने पर सुनील लोधी ने बताया कि उन्होंने संगीत सीखने के लिए कोई औपचारिक क्लास नहीं ली और न ही उनके पास कोई संगीत गुरु रहा। उन्होंने महान गायिका लता मंगेशकर को अपना प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि उनके चरणों में शत-शत नमन है। लता जी को भारत में स्वर की देवी और कोकिला के रूप में जाना जाता है और उनके गीतों से ही सुनील को संगीत के प्रति गहरा लगाव हुआ।

‘लता जी के गानों से बहुत कुछ सीखा’

सुनील ने बताया कि लता जी के गानों से ही उनकी भेंट हुई और उन्हीं गीतों को सुनते-सुनते उन्होंने बहुत कुछ सीखा। उन्होंने बताया कि StarMaker ऐप और YouTube पर कराओके म्यूजिक देखकर वे गीतों का अभ्यास करते थे। गाने के बोल, बोलने का अंदाज और सुरों को समझने की उनकी यात्रा इसी तरह आगे बढ़ी। उन्होंने अपनी पढ़ाई को लेकर भी सहजता से कहा कि उन्होंने ज्यादा पढ़ाई नहीं की, लेकिन संगीत के प्रति उनका लगाव लगातार उन्हें आगे ले जाता रहा।

जब सुनील ने छेड़ा ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’

प्रेस के समक्ष सुनील लोधी ने अपने चर्चित भजन की पंक्तियां भी सुनाईं। एकतारा/तानपुरा हाथ में लेकर उन्होंने गाना शुरू किया तो माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। उन्होंने गाया—‘हो मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई।’ उनकी आवाज के साथ मौजूद लोगों में भी भक्ति का भाव दिखाई दिया।
उन्होंने भजन की आगे की पंक्तियां गाते हुए कहा—‘अरे काहे की बनाव बनाई, काहे की पतवार, रामा काहे की लगा दई जंजीर, सागर में नैया डार दई।’ भजन की इन पंक्तियों में जीवन की कठिनाइयों के बीच भगवान के भरोसे आगे बढ़ने का संदेश दिखाई देता है।

‘ये तानपुरा मेरे लिए करोड़ों से भी ज्यादा कीमती’

सुनील लोधी ने अपने वाद्य यंत्र के प्रति भावनात्मक जुड़ाव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि यह यंत्र उनके साथ बचपन से है। उन्होंने कहा कि इसकी कीमत उनके लिए पैसों से नहीं आंकी जा सकती। यहां तक कि यदि कोई उन्हें इसके बदले 10 करोड़ रुपये देने की बात कहे, तब भी वे इसे देने को तैयार नहीं होंगे। उनके लिए यह वाद्य यंत्र केवल संगीत का साधन नहीं, बल्कि उनकी पूरी संगीत यात्रा और संघर्ष की निशानी है।

‘बुंदेलखंड की माटी का छोटा-सा आर्टिस्ट हूं’

अपने बारे में बताते हुए सुनील ने बेहद विनम्र अंदाज में कहा कि वे बुंदेलखंड की माटी से निकले एक छोटे-से आर्टिस्ट हैं। उन्होंने बॉलीवुड के बड़े गायकों का जिक्र करते हुए कहा कि वे खुद को उनके सामने तौलने की स्थिति में नहीं मानते। सुनील ने अपनी सफलता का श्रेय किसी बड़े मंच या संसाधन को नहीं, बल्कि अपने दर्शकों के प्रेम और हनुमान जी की कृपा को दिया।

‘दर्शकों का प्रेम ही मेरी सबसे बड़ी ताकत’

सुनील लोधी ने कहा कि आज उन्हें जो भी पहचान मिली है, उसमें उनके दर्शकों का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि लोगों का प्यार, आशीर्वाद और हनुमान जी की कृपा ही उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देती है। उनके शब्दों में अपने प्रशंसकों के प्रति गहरी कृतज्ञता साफ दिखाई दी।

सिद्धपुर बुलाने वालों का भी जताया आभार

सिद्धपुर आने के अवसर को सुनील लोधी ने सौभाग्य बताते हुए बजरंग दल के विवेक राठौर का विशेष रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उन्हें यहां बुलाने के लिए वे हृदय से आभारी हैं। साथ ही उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर का भी धन्यवाद किया और कहा कि उन्हें सिद्धपुर तक लाने में उनकी योजना और योगदान रहा है। उन्होंने सीहोरवासियों के प्रति भी दिल से आभार व्यक्त किया।

आंखों के इलाज को लेकर मुख्यमंत्री के आश्वासन का किया जिक्र

बातचीत के दौरान सुनील लोधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी आंखों के इलाज की बात कही और कहा कि वे चाहते हैं कि उनकी आंखें ठीक हों। सुनील ने कहा कि यदि ऊपर वाले की कृपा और हनुमान जी का साथ रहा तो वे इसके लिए जरूर प्रयास करेंगे। इस प्रसंग को बताते हुए उनके शब्दों में विश्वास और आस्था दोनों नजर आए।

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

सुनील शर्मा, सीहोर जिला ब्यूरो, पीपुल्स समाचार ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक भास्कर, पत...Read More

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