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आचार्य बालकृष्ण को बड़ी राहत! फर्जी दस्तावेज से पासपोर्ट मामले में 15 साल बाद कोर्ट ने किया बरी

देहरादून की CBI विशेष अदालत ने पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण को फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट हासिल करने के मामले में बरी कर दिया। करीब 15 साल पुराने इस केस में कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त किया। 2011 में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगी थी, जबकि 2018 में हाई कोर्ट ने पासपोर्ट वापस लेने और नवीनीकरण की अनुमति दी थी।
आचार्य बालकृष्ण को बड़ी राहत! फर्जी दस्तावेज से पासपोर्ट मामले में 15 साल बाद कोर्ट ने किया बरी
देहरादून की CBI विशेष अदालत ने पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण को फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट हासिल करने के मामले में बरी कर दिया।

देहरादून की CBI विशेष अदालत ने पतंजलि योगपीठ के महामंत्री और बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें फर्जी दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट हासिल करने के मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया है। करीब 15 साल तक चले इस मामले में अब जाकर फैसला आया है। तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सुनवाई के बाद आचार्य बालकृष्ण को सभी संबंधित धाराओं से मुक्त कर दिया। इसके साथ ही करीब डेढ़ दशक से चल रहा यह मामला औपचारिक रूप से खत्म हो गया।

फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट लेने का था आरोप

आचार्य बालकृष्ण पर आरोप था कि उन्होंने पासपोर्ट बनवाने के लिए बरेली स्थित पासपोर्ट कार्यालय में कुछ शैक्षणिक दस्तावेज जमा किए थे। इन दस्तावेजों में खुर्जा के एक संस्कृत महाविद्यालय से जुड़े होने का दावा किया गया था। मामले में आरोप लगाया गया था कि ये दस्तावेज सही नहीं थे। इसी आधार पर CBI ने जांच शुरू की और आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ मामला दर्ज किया।

प्रोफेसर नरेश द्विवेदी भी बनाए गए थे सह-आरोपी

इस मामले में खुर्जा के संस्कृत महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य प्रोफेसर नरेश द्विवेदी को भी CBI ने सह-आरोपी बनाया था। आरोप था कि उन्होंने आचार्य बालकृष्ण को संबंधित प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए थे। जांच एजेंसी ने इन दस्तावेजों को फर्जी बताते हुए दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

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2011 में गिरफ्तारी पर लगी थी रोक

मामले की जांच के दौरान जुलाई 2011 में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने आचार्य बालकृष्ण की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी। साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट अदालत में जमा कराने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद लंबे समय तक उनका पासपोर्ट अदालत में ही जमा रहा।

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2018 में पासपोर्ट वापस लेने की मिली अनुमति

करीब सात साल बाद 2018 में हाई कोर्ट ने आचार्य बालकृष्ण को अपना पासपोर्ट वापस लेने और उसका नवीनीकरण कराने की अनुमति दे दी थी। हालांकि, पासपोर्ट से जुड़ा यह मामला अदालत में चलता रहा। आखिरकार करीब 15 साल बाद अब कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए आचार्य बालकृष्ण को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

फैसले के बाद क्या बोले आचार्य बालकृष्ण?

कोर्ट के फैसले के बाद आचार्य बालकृष्ण ने इसे न्याय व्यवस्था में अपने भरोसे की जीत बताया। फैसले के साथ ही लंबे समय से चल रहे इस मामले पर अब कानूनी तौर पर विराम लग गया है।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...Read More

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