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H-1B वीजा की पाबंदियां भारत के लिए बनेंगी अवसर, पीयूष गोयल ने बताई वजह

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका के H-1B वीजा नियमों में बदलाव से भारतीय कंपनियों और प्रतिभाओं को नुकसान नहीं होगा। उनके मुताबिक, इससे भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
H-1B वीजा की पाबंदियां भारत के लिए बनेंगी अवसर, पीयूष गोयल ने बताई वजह
H-1B वीजा की पाबंदियां भारत के लिए बनेंगी अवसर

अमेरिका के H-1B वीजा नियमों में बदलाव को लेकर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि इससे भारतीय कंपनियों और प्रतिभाओं को नुकसान नहीं होगा। उन्होंने तर्क दिया कि वीजा पर पाबंदियों के कारण भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है।  गोयल ने अमेरिका में कारोबार कर रहे भारतीय उद्यमियों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि अगर इन लोगों ने अपने कारोबार खड़े करने और रिसर्च करने का काम भारत में ही किया होता, तो देश को कितना लाभ मिल सकता था। उन्होंने कहा कि अब कई तरह के कामों के लिए किसी व्यक्ति का दूसरे देश में शारीरिक रूप से मौजूद होना जरूरी नहीं रह गया है। 

वर्क फ्रॉम होम और ऑफशोर मॉडल से बदली काम करने की व्यवस्था

पीयूष गोयल के मुताबिक कोविड-19 महामारी के बाद काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। अब कई काम घर से या दूसरे देश में मौजूद टीमों के जरिए किए जा सकते हैं। ऐसे में कंपनियों को अपने काम के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों को अमेरिका बुलाने की जरूरत पहले जैसी नहीं रह गई है। कुछ चुनिंदा भूमिकाओं में ही कर्मचारियों को वहां जाने की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक कंपनियां अब भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं। बेंगलुरु, नोएडा, मुंबई और हैदराबाद जैसे शहरों में अंतरराष्ट्रीय कारोबार से जुड़े काम तेजी से आ रहे हैं।

भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर खोल रही हैं कंपनियां

गोयल ने भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित करने के बढ़ते महत्व का उल्लेख किया। ये ऐसे केंद्र होते हैं, जहां बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने वैश्विक कारोबार से जुड़े तकनीकी, वित्तीय, रिसर्च और अन्य कार्यों को संचालित करती हैं। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में कई वैश्विक कंपनियों के GCC पहले से काम कर रहे हैं। कंपनियां भारत में उपलब्ध प्रतिभा और कारोबार के अवसरों को देखते हुए यहां अपनी गतिविधियां बढ़ाने की योजनाएं बना रही हैं। गोयल के अनुसार अमेरिकी कंपनियों की ओर से भारत में कामकाज बढ़ाने की यह प्रवृत्ति भारतीय पेशेवरों और घरेलू कारोबार के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।

अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश बढ़ाने की तैयारी में

वाणिज्य मंत्री ने बताया कि अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान उन्होंने वैश्विक कंपनियों के प्रमुखों के साथ 19 अलग-अलग बैठकें की थीं। उनके मुताबिक, इन कंपनियों में से प्रत्येक ने भारत में विस्तार की योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग से लेकर बीमा क्षेत्र तक की कंपनियां भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती हैं। गोयल ने यह भी दावा किया कि अमेरिका के सबसे बड़े निवेशकों में शामिल एक निवेशक भारत में 100 से 150 अरब डॉलर तक निवेश करने का इच्छुक है। उन्होंने इसे भारतीय बाजार के आकार और कारोबारी अवसरों से जोड़कर देखा। हालांकि यह निवेश संबंधी जानकारी मंत्री के बयान पर आधारित है। निवेश की वास्तविक राशि, समयसीमा और परियोजनाओं का विवरण अलग से स्पष्ट होना बाकी है।

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H-1B वीजा पर पाबंदियां भारतीय स्टार्टअप के लिए बन सकती हैं अवसर

अमेरिका का H-1B वीजा कार्यक्रम वहां की कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। भारतीय आईटी पेशेवर और तकनीकी विशेषज्ञ इस कार्यक्रम का लंबे समय से इस्तेमाल करते रहे हैं। गोयल का तर्क है कि यदि वीजा हासिल करना कठिन होता है, तो कंपनियां अपने काम का अधिक हिस्सा भारत में मौजूद टीमों से करा सकती हैं। इससे भारतीय स्टार्टअप, तकनीकी कंपनियों और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी कंपनियां अपनी भर्ती, निवेश और कामकाज की रणनीति में किस तरह बदलाव करती हैं। H-1B वीजा पर पाबंदियों का असर सभी भारतीय पेशेवरों और कंपनियों पर एक जैसा हो यह जरूरी नहीं है।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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