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पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक में बड़े बांधों का विरोध :दिग्विजय सिंह बोले- छोटे बांध ज्यादा कारगर, किसानों की जमीन न डूबे

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कुंभराज क्षेत्र के घाटाखेड़ी गांव में पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो लिंक परियोजना की समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में वह अपने साथ कई विशेषज्ञ इंजीनियरों को लेकर पहुंचे थे। समीक्षा के दौरान दिग्विजय सिंह ने घाटाखेड़ी में प्रस्तावित बड़े बांध को गैर-जरूरी बताया और इसके विकल्प के तौर पर 3-4 छोटे बांध बनाने का सुझाव दिया।
दिग्विजय सिंह बोले- छोटे बांध ज्यादा कारगर, किसानों की जमीन न डूबे
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    गुना। जिले के कुंभराज क्षेत्र स्थित घाटाखेड़ी गांव में रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो लिंक परियोजना की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उनके साथ कई विशेषज्ञ इंजीनियर भी मौजूद रहे। बैठक में बड़े बांध के प्रस्ताव को अव्यावहारिक बताते हुए उन्होंने इसके स्थान पर छोटे बांध बनाने की सलाह दी। स्थानीय किसानों ने भी बड़े बांध से होने वाली संभावित समस्याओं पर अपनी चिंता व्यक्त की।

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    बड़ा बांध गैर-जरूरी : दिग्विजय सिंह

    समीक्षा बैठक के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि घाटाखेड़ी में बनने वाला बड़ा बांध जमीन अधिग्रहण और लागत दोनों दृष्टि से अव्यावहारिक है। उनके साथ आए विशेषज्ञ इंजीनियरों ने भी यह राय दी कि क्षेत्र में इतने बड़े बांध की आवश्यकता नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी बताया कि यदि बड़ा बांध बनता है तो उनकी खेती योग्य जमीन डूब क्षेत्र में चली जाएगी, जिससे आजीविका प्रभावित होगी।

    किसानों का इंजीनियरों से कराया संवाद

    दिग्विजय सिंह ने ग्रामीणों व किसानों के साथ अलग से चर्चा की। इस दौरान किसानों ने बड़े बांध के कारण विस्थापन, जमीन डूबने और लागत बढ़ने जैसी चिंताएं रखीं। उन्होंने इंजीनियरों से आमने-सामने सवाल-जवाब कराए ताकि तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं को समझा जा सके।

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    सिंचाई परियोजनाओं में जमीन बचाने का रहा है सिद्धांत

    पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले बांध बनाते समय इस बात का ध्यान रखा जाता था कि कितनी जमीन सिंचित होगी और कितनी जमीन डूब में जाएगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा-

    • नरसिंहगढ़ के पास बने बांध में ज्यादातर वन भूमि अधिग्रहीत हुई थी।
    • लेकिन सुठालिया बांध में अधिकांश कृषि भूमि डूब क्षेत्र में गई, जिससे किसान प्रभावित हुए।

    उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह दीतलवाड़ा हो या घाटाखेड़ी, दोनों स्थानों पर बड़े बांध के विरोध में हैं।

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    राघौगढ़ की जमीन बचाने वाले आरोप खारिज

    दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह पर लगाए गए आरोपों कि वे राघौगढ़ की जमीन बचाने के लिए घाटाखेड़ी में बांध चाह रहे हैं— को उन्होंने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनकी नीति हमेशा छोटे बांध और अधिकतम जल संरक्षण की रही है।

    केंद्र-राज्य के नियमों का पालन नहीं करने का आरोप

    किसानों से चर्चा के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि 10,000 एकड़ से अधिक डूब क्षेत्र वाले किसी भी बांध के लिए केंद्रीय जल आयोग की मंजूरी अनिवार्य होती है। लेकिन वर्तमान परियोजनाओं में इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है।

    योजना फिर शुरू करने की सलाह

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान वाटरशेड मॉडल अपनाकर 'गांव का पानी गांव में' और 'खेत का पानी खेत में' रखने की योजना चलाई गई थी। भाजपा सरकार आने के बाद यह योजना बंद कर दी गई, जिससे जल संरक्षण के प्रयास कमजोर हुए हैं।

    पार्वती-चंबल-कालीसिंध लिंक योजना महंगी 

    उन्होंने कहा कि नदियों का पानी एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने वाली लिंक योजनाएं अत्यधिक महंगी हैं। इन परियोजनाओं में पाइपलाइन बिछानी पड़ेगी, जिससे लागत कई गुना बढ़ जाएगी।

    विशेषज्ञों का सुझाव- बड़े बांध की जगह छोटे बांध बनें

    बैठक में मौजूद तकनीकी विशेषज्ञों ने कहा कि घाटाखेड़ी क्षेत्र का भौगोलिक स्वरूप बड़े बांध के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके बजाय छोटे-छोटे बांध बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में जल संग्रहण और सिंचाई की समस्या बेहतर तरीके से हल की जा सकती है।

    छोटे बांधों को कंप्यूटर तकनीक से नियंत्रित करने का प्रस्ताव

    दिग्विजय सिंह ने सुझाव दिया कि छोटे बांधों के गेट कंप्यूटराइज्ड किए जाएं।

    • बारिश होने पर स्वत: गेट खुल सकें।
    • आवश्यकता पड़ने पर गेट बंद हो सकें।
    • इसके अलावा उन्होंने स्टॉपडेम और चेकडेम बनाकर भी जल संरक्षण की सलाह दी।

    (रिपोर्ट - राजकुमार रजक)

    Mithilesh Yadav
    By Mithilesh Yadav

    वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...Read More

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