पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन : 89 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, काशी में होगा अंतिम संस्कार

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पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन : 89 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, काशी में होगा अंतिम संस्कार
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वाराणसी। भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत से दुखद खबर सामने आई है। पद्मविभूषण से सम्मानित महान शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार तड़के निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे। जानकारी के अनुसार, उन्होंने सुबह 4.15 बजे अपनी बेटी नम्रता मिश्र के मिर्जापुर स्थित घर पर अंतिम सांस ली। काशी की संगीत परंपरा को नई पहचान दिलाने वाले इस दिग्गज कलाकार के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है।

    मणिकर्णिका घाट पर होगा अंतिम संस्कार

    नम्रता मिश्र ने बताया कि, पंडित जी का अंतिम संस्कार आज शाम वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

    लंबे समय से बीमार चल रहे थे

    पंडित छन्नूलाल मिश्र बीते सात महीने से अस्वस्थ थे। 11 सितंबर को मिर्जापुर में उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। सीने में दर्द के बाद उन्हें रामकृष्ण सेवाश्रम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इसके बाद 13 सितंबर की रात उन्हें BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल लाया गया। यहां जांच में डॉक्टरों ने एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS), डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और फेफड़ों में सूजन की पुष्टि की। हालत में सुधार होने पर 27 सितंबर को उन्हें डिस्चार्ज किया गया था, लेकिन गुरुवार सुबह उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

    पारिवारिक जीवन 

    पंडित जी का जन्म 3 अगस्त 1936 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के हरिहरपुर गांव में हुआ था। पिता बद्री प्रसाद मिश्र और दादा गुदई महाराज शांता प्रसाद संगीत से गहरा जुड़ाव रखते थे। पंडित जी ने छह साल की उम्र से ही संगीत की शिक्षा शुरू कर दी थी।

    उनके परिवार में चार बेटियां और एक बेटा हैं। पत्नी मनोरमा मिश्रा और बड़ी बेटी संगीता का 2021 में कोरोना संक्रमण के दौरान निधन हो गया था। महज चार दिन के अंतराल में पत्नी और बेटी को खोना उनके लिए गहरा सदमा साबित हुआ था।

    संगीत साधना और उपलब्धियां

    पंडित छन्नूलाल मिश्र ने अपनी शिक्षा बिहार के मुजफ्फरपुर में हासिल की और चार दशक पहले वाराणसी को अपनी कर्मभूमि बनाया। वे खयाल, ठुमरी, भजन, दादरा, कजरी और चैती के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध रहे।

    • 2000 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला।
    • 2010 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।
    • 2021 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मविभूषण प्रदान किया।
    • उनका गीत “खेले मसाने में होली…” आज भी श्रोताओं की जुबां पर है।

    मोदी से विशेष संबंध

    पंडित जी 2014 लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक रहे। उन्होंने उस समय कहा था कि “काशी में गंगा और संगीत का ख्याल रखना।” प्रधानमंत्री मोदी ने उनके निधन पर लिखा कि “पंडित जी ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाया और विश्व पटल पर देश की परंपरा को प्रतिष्ठित किया। मुझे सदैव उनका स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त हुआ।”

    योगी बोले- साधकों के लिए प्रेरणा

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पंडित जी ने अपना पूरा जीवन भारतीय शास्त्रीय गीत-संगीत के उत्थान में समर्पित कर दिया। उनका गायन कला साधकों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

    संगीत जगत की अमूल्य क्षति

    पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन से भारतीय शास्त्रीय संगीत ने एक अमूल्य धरोहर खो दी है। उनकी गूंजती आवाज, ठुमरी और भजन साधना आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। काशी ने अपने प्रिय संगीत साधक को खो दिया है, लेकिन उनकी अमर धुनें सदियों तक संगीतप्रेमियों के दिलों में जीवित रहेंगी।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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