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कब और कैसे गाना चाहिए ‘वंदे मातरम’?राष्ट्रीय गीत मिलेगा राष्ट्रगान जैसा दर्जा, सरकार ने की हाई-लेवल चर्चा

केंद्र सरकार ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान औपचारिक दर्जा देने पर गंभीरता से विचार कर रही है। गृह मंत्रालय की एक उच्चस्तरीय बैठक में इस राष्ट्रीय गीत के गायन के नियम, समय, स्थान और सम्मान से जुड़े मसलों पर चर्चा हुई।
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राष्ट्रीय गीत मिलेगा राष्ट्रगान जैसा दर्जा, सरकार ने की हाई-लेवल चर्चा
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AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    केंद्र सरकार ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत के रूप में और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। हाल ही में गृह मंत्रालय की एक हाई-लेवल बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई, जिसमें यह तय करने की कोशिश की गई कि क्या ‘वंदे मातरम’ को भी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ जैसा औपचारिक नियम और सम्मान मिलना चाहिए।

    मीटिंग में क्या बात हुई?

    सूत्रों के अनुसार बैठक में मुख्य रूप से तीन सवाल उठाए गए:

    • वंदे मातरम कब और कहां गाया जाना चाहिए?
    • क्या गाते समय खड़ा होना अनिवार्य होना चाहिए?
    • अगर कोई वंदे मातरम का अपमान करे तो क्या सजा हो?
    • इन सवालों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन सरकार इस दिशा में गंभीरता से सोच रही है।

    क्यों चर्चा हो रही है?

    यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब केंद्र सरकार पूरे साल ‘वंदे मातरम उत्सव’ का आयोजन कर रही है। यह उत्सव चार चरणों में चल रहा है-

    • पहला चरण: नवंबर (पहले पूरा हो चुका है)
    • दूसरा चरण: इस महीने
    • तीसरा चरण: अगस्त 2026
    • चौथा चरण: नवंबर 2026

    बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस ने 1937 में ‘वंदे मातरम’ के कुछ महत्वपूर्ण हिस्से हटाकर इसे कमजोर किया था। बीजेपी इसे ‘इतिहास की गलत व्याख्या’ बताती है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा बताकर खारिज करती है।

    क्या ‘वंदे मातरम’ के लिए कानून बनेगा?

    कुछ सालों से अदालतों में याचिकाएँ दायर हो रही हैं कि ‘वंदे मातरम’ के लिए भी राष्ट्रगान जैसी कानूनी व्यवस्था होनी चाहिए। यानी  कब गाया जाए? कौन-सा व्यवहार अनिवार्य हो? अपमान पर दंड हो? 2022 में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ में केवल राष्ट्रगान के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने पर सजा का प्रावधान है। वहीं वंदे मातरम के लिए ऐसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है।

    राष्ट्रगान-राष्ट्रीय गीत में क्या अंतर है?

    संविधान दोनों को समान सम्मान देता है, लेकिन व्यवहार और नियमों में फर्क है-  राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ संविधान के अनुच्छेद 51A(a) के तहत नागरिकों का कर्तव्य है कि वे राष्ट्रगान का सम्मान करें। गृह मंत्रालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि  राष्ट्रगान के समय खड़ा होना अनिवार्य है।

    अपमान पर कानूनी सजा (तीन साल तक जेल) का प्रावधान है।  तो वहीं राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ संविधान में सम्मान है, लेकिन कानूनी संरक्षण कम है। अभी तक किसी लिखित नियम या अधिकारिक दिशा-निर्देश की कमी है। गाने के समय खड़ा होना जरूरी या किसी विशेष व्यवहार का आदेश नहीं है। अपमान पर दंड का प्रावधान नहीं है।

    क्या सरकार वंदे मातरम को राष्ट्रगान जैसा बनाएगी?

    गृह मंत्रालय की बैठक में यही सवाल उठे कि क्या वंदे मातरम के लिए भी उसी तरह के नियम बनाए जाएं, जैसे राष्ट्रगान के लिए हैं। इसमें ये विकल्प भी शामिल हैं कि  क्या वंदे मातरम को राष्ट्रगान के साथ ही गाया जाए? क्या इसे केवल खास अवसरों पर ही गाने का निर्देश दिया जाए? क्या अपमान पर दंड तय किया जाए? हालांकि अभी तक सरकार ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन चर्चा जारी है।

    वंदे मातरम का ऐतिहासिक महत्व

    ‘वंदे मातरम’ बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित गीत है। यह 1905-08 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान आज़ादी की लड़ाई का प्रमुख नारा बनकर उभरा था। अब सरकार इसे फिर से उसी गौरवपूर्ण स्थान पर लाने की कोशिश कर रही है।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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