जेल में इश्क... पैरोल पर शादी :दो हत्यारों प्रिया-हनुमान की चौंकाने वाली लव स्टोरी

राजस्थान की ओपन जेल में बंद प्रिया सेठ और हनुमान प्रसाद उर्फ जैक ने मकर संक्रांति 23 जनवरी 2026 को शादी कर नई जिंदगी की शुरुआत की। दोनों आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं, लेकिन पैरोल पर विवाह और पारिवारिक रस्में पूरी की गईं। यह अनोखी जेल लव स्टोरी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
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दो हत्यारों प्रिया-हनुमान की चौंकाने वाली लव स्टोरी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जयपुर। राजस्थान से सामने आई यह खबर न सिर्फ अनोखी है, बल्कि देशभर में सामाजिक, कानूनी और नैतिक बहस को जन्म देने वाली भी है। हत्या जैसे जघन्य अपराधों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो कैदी शादी के बंधन में बंध गए हैं। दुष्यंत शर्मा हत्याकांड की दोषी प्रिया सेठ और अलवर सामूहिक हत्या कांड के दोषी हनुमान प्रसाद उर्फ जैक को अदालत के आदेश पर 15 दिन की पैरोल दी गई है। इसी अवधि के दौरान दोनों ने 23 जनवरी को अलवर जिले के बड़ौदामेव गांव में विवाह किया।

    ओपन जेल में शुरू हुई प्रेम कहानी

    प्रिया सेठ और हनुमान प्रसाद दोनों जयपुर की ओपन जेल (खुली जेल) में बंद हैं। राजस्थान में ओपन जेल व्यवस्था के तहत कैदियों को सीमित आजादी मिलती है, जिसमें वे काम कर सकते हैं, सामाजिक संपर्क रख सकते हैं और सामान्य जीवन की एक झलक पा सकते हैं।

    इसी खुले वातावरण में दोनों की मुलाकात हुई। बातचीत धीरे-धीरे दोस्ती में बदली और फिर यह रिश्ता प्रेम में बदल गया। करीब छह महीने तक साथ रहने के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया। इस दौरान दोनों ने अपने पुराने रिश्तों को पीछे छोड़ते हुए एक नए जीवन की शुरुआत करने का निर्णय लिया।

    हाईकोर्ट का हस्तक्षेप और पैरोल की मंजूरी

    शादी के लिए पैरोल पाने के लिए दोनों ने कानूनी रास्ता अपनाया। दोनों की ओर से अधिवक्ता विश्राम प्रजापत ने अदालत में पैरवी की। प्रिया सेठ की याचिका पर जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली की खंडपीठ ने जिला पैरोल एडवाइजरी कमेटी को 7 दिन के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद जिला पैरोल एडवाइजरी कमेटी ने प्रिया सेठ के रिप्रजेंटेशन को स्वीकार करते हुए 15 दिन की पैरोल मंजूर की।

    इसी तरह हनुमान प्रसाद को भी पैरोल दी गई। इस अवधि में दोनों शादी और पारिवारिक रस्में पूरी करेंगे, जिसके बाद उन्हें वापस जेल लौटना होगा।

    प्रिया सेठ का आपराधिक इतिहास

    प्रिया सेठ मई 2018 के चर्चित दुष्यंत शर्मा मर्डर केस की मुख्य दोषी है। पुलिस जांच में सामने आया था कि, प्रिया ने डेटिंग ऐप के जरिए दुष्यंत को प्रेम जाल में फंसाया।

    2 मई 2018 को उसने दुष्यंत को मिलने बुलाया और उसे जयपुर के बजाज नगर स्थित फ्लैट पर ले गई, जहां पहले से उसका प्रेमी दीक्षांत कामरा और उसका साथी लक्ष्य वालिया मौजूद था। तीनों ने मिलकर दुष्यंत को बंधक बनाया और उसके पिता से 10 लाख रुपए की फिरौती मांगी।

    डर के चलते उन्होंने दुष्यंत की गला घोंटकर हत्या कर दी। पहचान छुपाने के लिए उसके चेहरे पर चाकू से कई वार किए गए और शव को सूटकेस में बंद कर आमेर की पहाड़ियों में फेंक दिया गया। इस मामले में जयपुर की अदालत ने 24 नवंबर 2023 को प्रिया सेठ, दीक्षांत कामरा और लक्ष्य वालिया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

    डेटिंग ऐप और ब्लैकमेलिंग का नेटवर्क

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि, प्रिया सेठ डेटिंग ऐप्स के जरिए अमीर युवकों को फंसाकर उन्हें ब्लैकमेल करती थी। अपने महंगे शौक पूरे करने के लिए उसने गलत रास्ता चुना। कई युवकों को अपने जाल में फंसाकर उनसे पैसे ऐंठे गए और एक संगठित नेटवर्क की तरह यह गतिविधि चल रही थी।

    हनुमान प्रसाद उर्फ जैक का अपराध

    हनुमान प्रसाद अलवर के 2017 सामूहिक हत्या कांड का दोषी है। उसने अपनी प्रेमिका संतोष शर्मा के साथ मिलकर उसके पति और बच्चों की हत्या की थी। इस जघन्य अपराध में अदालत ने हनुमान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। संतोष शर्मा भी इसी केस में उम्रकैद की सजा काट रही है। अब हनुमान ने संतोष से संबंध तोड़कर प्रिया सेठ के साथ नया जीवन शुरू करने का फैसला किया है।

    मकर संक्रांति के अवसर पर हुई शादी

    दोनों की शादी 23 जनवरी 2026, मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर अलवर जिले के बड़ौदामेव गांव में हनुमान के पैतृक घर पर संपन्न हो गई है। शादी पूरे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कराई गई। पैरोल अवधि के दौरान दोनों परिवारों की मौजूदगी में विवाह संस्कार पूरे किए गए। शादी के कार्ड और तस्वीरें सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। लोग इसे जेल लव स्टोरी नाम दे रहे हैं।

    समाज और कानून के सामने खड़े सवाल

    यह घटना केवल एक अनोखी शादी नहीं है, बल्कि कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है।

    • क्या उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों को शादी की अनुमति मिलनी चाहिए?
    • ओपन जेल व्यवस्था में रिश्तों और सामाजिक संपर्क की निगरानी के क्या नियम होने चाहिए?
    • क्या समाज ऐसे मामलों को सामान्य रूप में स्वीकार करेगा?

    विशेषज्ञों का मानना है कि, यह मामला जेल सुधार प्रणाली, मानवाधिकार और सामाजिक नैतिकता के बीच संतुलन का बड़ा उदाहरण बन सकता है।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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