उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या से ही शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे हैं। पिछले 6 दिनों से वह धरने पर हैं और उनकी तबीयत बिगड़ गई है। जानकारी के अनुसार, शंकराचार्य को बुखार है। वह अब तक दिन में केवल दो बार ही पालकी पर आए हैं। फिलहाल वह अपने वैन में आराम कर रहे हैं। मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन के रवैये से नाराज होने के कारण वह अभी तक अपने शिविर में वापस नहीं लौटे हैं।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वे सवा लाख शिवलिंग स्थापित नहीं कर पाए और जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता, तब तक बसंत पंचमी का स्नान नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या के दिन उन्हें पालकी में संगम स्नान से रोका गया और उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद उन्होंने धरना शुरू किया।
छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम से सवा लाख शिवलिंग लाने की योजना थी। इन शिवलिंगों को प्रयाग में लाकर जनता को दर्शन के लिए उपलब्ध कराना था और विधिवत पूजन भी होना था। वर्तमान में शंकराचार्य धरने पर हैं, जबकि शिविर में रखे शिवलिंग साधना और पूजन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कुछ शिवलिंग ही यहां पहुंच पाए हैं, बाकी कार्टून में पैक हैं और आने वाली खेप भी है। भक्त इस स्थिति को देखकर अपना आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।
इस विवाद के बीच संत समाज ने शांति और संयम बरतने की अपील की है। नासिक के संत महंत रामस्नेही दास और महंत बैजनाथ ने कहा कि ऐसे मामलों का समाधान टकराव से नहीं, बल्कि सम्मानजनक बातचीत और आपसी समझ से होना चाहिए।