Naresh Bhagoria
27 Jan 2026
Garima Vishwakarma
27 Jan 2026
भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद मध्यप्रदेश में 1 दिसंबर से कान्हा, बांधवगढ़, सतपुड़ा सहित सभी टाइगर रिजर्व और सेंक्चुरीज में नाइट टाइगर सफारी को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लागू कर दिया गया है। पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) शुभरंजन सेन ने पुष्टि करते हुए कहा कि अब किसी भी सेंक्चुरीज, टाइगर रिजर्व में नाइट सफारी की अनुमति नहीं होगी। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा 17 नवंबर को दिए गए उस आदेश के अनुपालन में किया गया है, जिसमें वन्यजीवों को होने वाले खतरे और असुविधा को ध्यान में रखते हुए रात के समय पर्यटन रोकने के निर्देश दिए गए थे।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि रात के समय वाहनों की आवाजाही, हेड लाइट्स की तेज रोशनी और मानवीय गतिविधियों से वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। लगातार जांच और अध्ययन में पाया गया है कि नाइट सफारी के दौरान उत्पन्न शोर और रोशनी से टाइगर सहित अन्य वन्यजीव अपनी प्राकृतिक दिनचर्या का पालन नहीं कर पाते। इसका असर उनकी गतिविधियों, भोजन की तलाश और प्रजनन व्यवहार तक पर पड़ता है। इसी वजह से कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में नाइट सफारी पर तत्काल रोक लगाई जाए।
विशेष बात यह है कि जिन पर्यटकों ने पहले से नाइट सफारी की बुकिंग कराई थी, उनकी डिपॉजिट फीस विभाग द्वारा वापस की जाएगी। इसके लिए पर्यटक संबंधित टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर के कार्यालय में आवेदन दे सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि रिफंड प्रक्रिया को सरल और त्वरित रखने के निर्देश जारी किए गए हैं ।
वन विभाग ने बताया कि यह निर्णय प्रदेश के कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा और पन्ना जैसे प्रमुख टाइगर रिजर्व सहित सभी सेंक्चुरियों पर लागू होगा। सभी संरक्षित क्षेत्रों को निर्देशित किया गया है कि वे पर्यटकों को तुरंत इसकी जानकारी दें और रात की सफारी की नई बुकिंग को रोक दें।
इस बारे में वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे नेक हा कि हम नाइट सफारी का शुरू से विरोध कर रहे हैं। रात में वन संरक्षित क्षेत्रों को किसी भी मानवीय हस्तक्षेप से दूर रखना वन्यजीवों के संरक्षण और उनके स्वाभाविक आवास को सुरक्षित करने के लिए बेहद आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश में अब नाइट सफारी का कोई संचालन नहीं होगा।