मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में इस समय तेजी की लहर दिखाई दे रही है। निफ्टी 50 इंडेक्स अपने आल टाइम हाई के करीब पहुंच चुका है और निवेशकों को उम्मीद है कि इस सप्ताह एनएसई का बेंचमार्क इंडेक्स नया रिकॉर्ड बना सकता है। माना जा रहा है कि इस हफ्ते बाजार की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित कटौती, विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली में कमी, भारत-अमेरिका और अमेरिका-चीन व्यापार वार्ताओं में प्रगति, मजबूत घरेलू कॉरपोरेट नतीजे, कच्चे तेल के रुझान में बदलाव और विदेशी निवेश प्रवाह जैसे प्रमुख फैक्टर्स पर निर्भर करेगा। सबसे पहले, अमेरिकी फेड की दर कटौती की उम्मीदों ने वैश्विक निवेशकों में सकारात्मकता पैदा की है। हाल ही में जारी अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे हैं, जिससे अक्टूबर के अंत में होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में 25 बेसिस पॉइंट की नीतिगत ब्याज दर में कटौती की संभावना बढ़ गई है। यदि ऐसा होता है, तो भारत जैसे उभरते बाजारों की ओर पूंजी का प्रवाह बढ़ सकता है।
दूसरा अहम फैक्टर है कि भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते की खबरों ने निवेशकों को उत्साहित किया है। हालांकि, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत किसी भी प्रतिबंधात्मक शर्तों वाले समझौते को लेकर जल्दबाजी नहीं करेगा। यदि यह समझौता सफल होता है, तो भारतीय निर्यातों पर लगने वाले 50% टैरिफ को घटाया जा सकता है, जिससे व्यापार संतुलन सुधर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया बयान में उन्होंने संकेत दिया है कि भारत अगले दिनों में रूसी तेल पर निर्भरता घटा सकता है, इस वार्ता को और दिशा दे सकते हैं। तीसरा बड़ा कारक कच्चे तेल के दामों का उतार-चढ़ाव है। अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा रूसी तेल कंपनियों पर नए प्रतिबंधों के बाद तेल की कीमतें 5% तक बढ़ गई हैं। इससे वैश्विक आपूर्ति तंग होने और मुद्रास्फीति के जोखिम बढ़ने की आशंका है।
भारतीय रिफाइनर अब रूसी तेल आयात घटाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे अमेरिका के साथ वार्ता में नरमी आ सकती है, लेकिन इससे भारत का आयात बिल और राजकोषीय बोझ बढ़ सकता है। चौथा प्रमुख कारक अमेरिका-चीन वार्ता से जुड़ा है। बाजारों को उम्मीद है कि राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आगामी बैठक में व्यापार समझौते की दिशा में प्रगति हो सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका इस बार अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाएगा, क्योंकि चीन दुर्लभ खनिजों और मैग्नेट्स की आपूर्ति में वैश्विक प्रभुत्व रखता है। पांचवां फैक्टर कॉरपोरेट जगत के दूसरी तिमाही के नतीजे। अब तक अधिकांश कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहे हैं। रक्षा क्षेत्र की कंपनियां जैसे मझगांव डॉक और बीईएल पर निवेशकों की नजर रहेगी। निफ्टी डिफेंस इंडेक्स ने 2025 में अब तक 26% की बढ़त दर्ज की है।
इसके अलावा, कोटक महिंद्रा बैंक, पीएनबी हाउसिंग, आईओसी, कोल इंडिया, अडाणी पावर, डाबर, डीएलएफ, आईटीसी, मणप्पुरम फाइनेंस, बीएचईएल और एनटीपीसी जैसी कंपनियों के नतीजे भी बाजार दिशा तय करेंगे। छठा और अंतिम कारक विदेशी निवेशकों की गतिविधि है। लंबे समय बाद विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में खरीदारी करते दिखाई दिए हैं। यह एक अनुकूल संकेत है। 24 अक्टूबर 2025 को एफआईआई ने 621 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) 173 करोड़ रुपए के शुद्ध खरीदार रहे हैं। हालांकि, शुक्रवार को बाजार में हल्की मुनाफावसूली देखने को मिली, जब सेंसेक्स 344 अंक गिरकर 84,211 पर आ गया और निफ्टी 95 अंक गिरकर 25,795 पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन छह कारकों के एक साथ आने से इस सप्ताह निफ्टी एक नया ऐतिहासिक शिखर छू सकता है।