Manisha Dhanwani
12 Jan 2026
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन घुसपैठ की घटनाएं एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनती दिख रही हैं। रविवार शाम को सांबा, राजौरी और पुंछ जिलों में अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) और नियंत्रण रेखा (LoC) के पास करीब 5 संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए। इनमें से एक ड्रोन पर भारतीय सेना ने फायरिंग भी की। हालिया हथियार बरामदगी और गणतंत्र दिवस से पहले बढ़े खतरे के बीच इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक ड्रोन मूवमेंट एक साथ कई संवेदनशील सेक्टरों में देखी गई-
राजौरी जिला (नौशेरा सेक्टर):
शाम करीब 6:35 बजे गनिया-कलसियां गांव के ऊपर एक ड्रोन देखा गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना के जवानों ने मीडियम और लाइट मशीन गन से फायरिंग की।
राजौरी (तेरियाथ क्षेत्र):
इसी समय खब्बर गांव के ऊपर एक और ड्रोन दिखाई दिया, जो कलाकोट के धर्मसाल गांव की ओर से आया और भरख की दिशा में आगे बढ़ गया।
सांबा जिला (रामगढ़ सेक्टर):
शाम करीब 7:15 बजे चक बबरल गांव के ऊपर टिमटिमाती रोशनी वाला ड्रोन कुछ मिनटों तक मंडराता रहा।
शाम 6:25 बजे LoC के पास तैन से टोपा की ओर एक ड्रोन जैसी उड़ने वाली वस्तु जाती हुई देखी गई।
सैन्य अधिकारियों का कहना है कि, रविवार शाम को करीब पांच संदिग्ध ड्रोन मूवमेंट दर्ज की गईं। ये ड्रोन कुछ देर तक भारतीय सीमा के भीतर संवेदनशील इलाकों के ऊपर मंडराते रहे और फिर वापस पाकिस्तान की ओर लौट गए।
ड्रोन गतिविधि सामने आने के बाद पूरी LoC और IB पर निगरानी बढ़ा दी गई। जिन इलाकों में ड्रोन देखे गए, वहां देर रात तक सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन चलाया। फिलहाल किसी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां हर एंगल से जांच कर रही हैं।
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि, पाकिस्तान ड्रोन का इस्तेमाल भारतीय सेना की पोजीशन की रेकी करने। आतंकियों के लिए हथियार और नशीले पदार्थ गिराने के लिए कर रहा है। यह आशंका इसलिए भी मजबूत हुई है क्योंकि 9 जनवरी को सांबा जिले के घगवाल के पालूरा गांव में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास हथियारों की एक खेप बरामद की गई थी।
पालूरा गांव से मिली बरामदगी में 2 पिस्तौल, 3 मैगजीन, 16 जिंदा राउंड, 1 ग्रेनेड शामिल थे। जांच में आशंका जताई गई कि यह खेप पाकिस्तान से आए ड्रोन के जरिए ही गिराई गई थी।
देश में 26 जनवरी (Republic Day) को लेकर पहले से ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। ऐसे समय में ड्रोन की बढ़ती गतिविधियों ने सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है। सीमावर्ती इलाकों के साथ-साथ अंदरूनी क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ाई जा रही है।
ड्रोन घुसपैठ की घटनाओं का संदर्भ ऑपरेशन सिंदूर से भी जोड़ा जा रहा है। 7 मई 2025 को शुरू हुआ यह अभियान 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले (26 मौतें) के जवाब में चलाया गया था।
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ठिकाना |
स्थान |
आतंकी संगठन |
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मरकज सुभान अल्लाह |
बहावलपुर |
जैश-ए-मोहम्मद |
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मरकज तैयबा |
मुरीदके |
लश्कर-ए-तैयबा |
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सरजल |
तेहरा कलां |
जैश-ए-मोहम्मद |
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महमूना जोया |
सियालकोट |
हिज्बुल मुजाहिद्दीन |
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मरकज अहले हदीस |
बरनाला |
लश्कर-ए-तैयबा |
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मरकज अब्बास |
कोटली |
जैश-ए-मोहम्मद |
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मस्कर राहील शाहिद |
कोटली |
हिज्बुल मुजाहिद्दीन |
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शावई नाला कैंप |
मुजफ्फराबाद |
लश्कर-ए-तैयबा |
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सैयदना बिलाल कैंप |
मुजफ्फराबाद |
जैश-ए-मोहम्मद |
हाल ही में पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान CDS जनरल अनिल चौहान ने कहा था कि, ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है, केवल रोका गया है। अगर पाकिस्तान की ओर से आतंकी हमला या घुसपैठ होती है, तो इसे दोबारा सक्रिय किया जाएगा।
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