ग्लेशियर टूटा, नेपाल डूबा! 472 मौतें, 1500 लापता, 290 भारतीयों की तलाश, 84 सुरक्षित निकले

काठमांडू। नेपाल में बुधवार को आया अचानक जलसैलाब कई परिवारों को उजाड़ गया। रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और आसपास के इलाकों में पानी के साथ मिट्टी और पत्थरों का तेज बहाव पहुंचा। कई घर, सड़कें और पुल इसकी चपेट में आ गए। सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है, जिनसे हादसे के बाद संपर्क नहीं हो पाया। नेपाल और तिब्बत को मिलाकर करीब 1500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 290 भारतीय भी शामिल हैं। बचाव दल लगातार हेलिकॉप्टर, ड्रोन और जमीनी टीमों की मदद से लोगों की तलाश कर रहे हैं, लेकिन कई इलाकों तक पहुंचना अब भी मुश्किल बना हुआ है।
ग्लेशियर की घटना होने की संभावना
बाढ़ के साथ जमीन में तेज कंपन दर्ज हुआ था। इसी वजह से शुरुआत में इसे भूकंप माना गया लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की जानकारी के मुताबिक यह कंपन ग्लेशियर का हिस्सा टूटने और उसके साथ भारी मलबे के नीचे गिरने से पैदा हो सकता है यानी जिस झटके को भूकंप समझा गया, उसके पीछे ग्लेशियर की घटना होने की संभावना ज्यादा मजबूत है।
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ग्लेशियर टूटा और नदी में बढ़ गया मलबा
लैंगटांग लिरुंग के पास ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूटकर करीब 1200 मीटर नीचे घाटी में गिरा। इसके बाद बर्फ, पानी, मिट्टी और चट्टानों का बड़ा हिस्सा नदी की तरफ बढ़ा। कुछ समय के लिए पानी का रास्ता रुका और फिर जमा पानी तथा मलबा अचानक तेज बहाव के साथ नीचे की ओर चला गया। इसी ने बाढ़ को बेहद खतरनाक बना दिया।
सबसे बड़ा सवाल: आखिर इतने लोग गए कहां?
इस आपदा के बाद सबसे ज्यादा चिंता लापता लोगों को लेकर है। नेपाल में करीब 910 और तिब्बत में 558 लोगों से संपर्क नहीं होने की जानकारी सामने आई है। सीमा के दोनों तरफ लापता लोगों की संख्या करीब 1468 बताई जा रही है। इनमें विदेशी नागरिक भी बड़ी संख्या में हैं। कई लोग ट्रेकिंग, पर्यटन और कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इस इलाके में पहुंचे थे।
290 भारतीयों से भी नहीं हो पाया संपर्क
भारत के करीब 290 नागरिकों से संपर्क नहीं होने की जानकारी सामने आई है। भारतीय अधिकारियों ने लापता लोगों की जानकारी जुटाने और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए स्थानीय प्रशासन से संपर्क बढ़ाया है। परिवारों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि बाढ़ के बाद कई सड़कें और पुल टूट गए हैं। कुछ जगहों पर रास्ते बंद होने से राहत और खोज टीमों की पहुंच धीमी हो रही है।
हेलिकॉप्टर और ड्रोन से जारी है तलाश
बचाव दल प्रभावित इलाकों में लगातार खोज अभियान चला रहे हैं। हेलिकॉप्टर से लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ नदी के किनारे और मलबे वाले क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी की जा रही है। कई जगहों पर पानी और कीचड़ इतना ज्यादा है कि जमीन से तलाशी लेना मुश्किल है। नदी के बहाव के साथ शवों और लापता लोगों की तलाश दूसरे जिलों तक भी बढ़ाई गई है।
नई बैरियर झील ने बढ़ाई दूसरी बाढ़ की चिंता
पहली आपदा के बाद अब एक और खतरा सामने आया है। चीन के मुताबिक रसुवागढ़ी सीमा से करीब 18 किलोमीटर ऊपर ल्हेंदे नदी में एक नई बैरियर झील बनी है। इसमें बड़ी मात्रा में पानी जमा होने की बात कही गई है। अगर प्राकृतिक बांध कमजोर हुआ या झील का पानी अचानक बाहर निकला, तो नेपाल की तरफ फिर तेज बाढ़ आ सकती है।
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क्या जलवायु परिवर्तन भी जिम्मेदार है?
हिमालय के तेजी से बदलते मौसम और बढ़ते तापमान ने ग्लेशियरों को लेकर चिंता बढ़ाई है। गर्मी बढ़ने से ग्लेशियर और पर्माफ्रॉस्ट कमजोर हो सकते हैं। इससे भूस्खलन, ग्लेशियल झीलों और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि वैज्ञानिक किसी एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ने से पहले लंबे समय के आंकड़ों का अध्ययन करते हैं।


















