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PU Special :मध्यस्थता से दोबारा जुड़े भाई-बहन के रिश्ते, छह माह में प्रदेश में 44 मामलों में सुलह

मप्र में भाई-बहन के संपत्ति, पैसे और पारिवारिक जिम्मेदारियों से जुड़े विवाद अब मध्यस्थता केंद्रों तक पहुंच रहे हैं। इस साल जून तक मध्यस्थता के जरिए प्रदेश में 44 मामलों में सुलह कराई गई, जिनमें भोपाल के छह और इंदौर के नौ मामले शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संवाद से रिश्तों को टूटने से बचाया जा सकता है।
मध्यस्थता से दोबारा जुड़े भाई-बहन के रिश्ते, छह माह में प्रदेश में 44 मामलों में सुलह

पल्लवी वाघेला, भोपाल। जिस भाई की कलाई पर कभी बहन राखी बांधती थी, उसी के साथ विवाद की स्थिति बन रही है। बचपन में एक-दूसरे के लिए लड़ने वाले भाई बहन अब जमीन के टूकड़े, घर के बंटवारे या बुजुर्ग माता-पिता या दिव्यांग भाई की जिम्मेदारी को लेकर आमने-सामने खड़े हो रहे हैं। जिस रिश्ते में अधिकार की भावना थी, वहां अब हिस्से और हिसाब की बात हो रही है। यही वजह है कि मध्यस्थता केन्द्रों में अब भाई-बहन के बीच के विवाद नजर आने लगे हैं। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि भाई-बहन के रिश्तों में विवाद भले ही पेचीदा हो रहे हों, लेकिन इस रिश्ते की एक खासियत है—दोनों पक्षों के बीच साझा बचपन, परिवार और भावनात्मक जुड़ाव होता है। इसलिए सही समय पर बातचीत शुरू हो जाए तो सुलह की संभावना भी मजबूत रहती है। मप्र में फैमिली कोर्ट से जुड़े मामलों को देखें तो इस साल जून माह तक प्रदेश में मध्यस्थता के जरिए भाई-बहन के बीच के 44 विवाद सुलझाए गए। इनमें भोपाल के छह और इंदौर के नौ मामले शामिल हैं।

केस- 1 : पुश्तैनी मकान को लेकर था विवाद

भोपाल में माता-पिता की मृत्यु के बाद पुश्तैनी मकान को लेकर भाई-बहन में विवाद हुआ। बहन मकान बेचना नहीं चाहती थी, लेकिन भाई को पैसों की जरूरत थी। ऐसे में बहन ने अपना हिस्सा मांगते हुए मकान बेचने से रोक दिया। बात इतनी बढ़ी कि दोनों ने एक-दूसरे से बोलना बंद कर दिया। फरवरी में हुई मध्यस्थता में दोनों ने एक-दूसरे का पक्ष सुना। समाधान निकला कि बहन मकान को खुद क्रय कर लेगी और भाई को उसके हिस्से की राशि दे देगी, तीन साल बाद भाई-बहन के बीच दोबारा बात शुरू हुई।

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केस – 2 : भाई को बिजनेस के लिए पैसे दिए, विवाद बढ़ा

इंदौर में बहन ने भाई को कारोबार के लिए पैसे दिए। बाद में यह बात विवाद में बदल गई कि रकम मदद थी या उधार। पैसा वापस मांगने पर भाई-बहन के बीच बातचीत बंद हो गई। मध्यस्थता में दोनों को अपनी बात रखने का मौका मिला। भाई ने रकम किश्तों में लौटाने पर सहमति दी और बहन ने अतिरिक्त राशि की मांग छोड़ दी। 

केस – 3 : दिव्यांग भाई की जिम्मेदारी को लेकर था विवाद

देवास में दिव्यांग भाई की जिम्मेदारी को लेकर उसके भाई-बहन में विवाद हुआ। माता-पिता की मौत के बाद बहन दिव्यांग भाई का ध्यान रख रही थी। कुछ समय बाद दिव्यांग भाई के हिस्से की संपत्ति और भरण-पोषण को लेकर बड़े भाई से विवाद हुआ। मध्यस्थता में दिव्यांग भाई की जिम्मेदारी और भरण-पोषण दोनों को लेकर लिखित में बातें तय हुई और समझौता हो गया।

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नहीं बंटे रिश्ते

भाई-बहन के विवादों में संपत्ति या पैसा अक्सर सिर्फ ऊपर दिखाई देने वाला कारण होता है। उसके नीचे वर्षों की अपेक्षाएं, तुलना, उपेक्षा और पुराने गिले-शिकवे होते हैं। मध्यस्थता में ऐसा समाधान तलाशने की कोशिश होती है जिसे दोनों स्वीकार कर सकें। हमने देखा है कि  भाई-बहन के रिश्ते में विवाद जरूर बढ़ रहे हैं, लेकिन इस रिश्ते को बचाने की इच्छा भी उतनी ही मजबूत होती है। संपत्ति का बंटवारा हो सकता है, जिम्मेदारी बांटी जा सकती है और आर्थिक विवाद का रास्ता निकाला जा सकता है, लेकिन कोशिश यह रहती है कि रिश्ते का बंटवारा न हो।

-प्रतिभा राजगोपाल, निदेशक, मध्यस्थता केंद्र शाहपुरा, भोपाल

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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