PU Special :बहनों ने निभाया रक्षा का वचन, भाइयों की जिंदगी बचाने दे दी अपनी किडनी

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। रक्षाबंधन पर भाई अपनी बहनों की रक्षा का वचन देते हैं लेकिन कुछ बहनों ने इस रिश्ते की तस्वीर ही बदल दी। जब बीमारी से जूझ रहे भाइयों की जिंदगी बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट ही रास्ता बचा, तो बहनों ने बिना हिचक अपने शरीर का एक हिस्सा उन्हें देने का फैसला किया। परिवार की चिंताओं, ऑपरेशन के जोखिम और अपनी जिम्मेदारियों के बावजूद इन बहनों ने भाई की जिंदगी को सबसे ऊपर रखा। इनके लिए किडनी दान करना सिर्फ अंगदान नहीं बल्कि उस रिश्ते को निभाने का तरीका था, जो बचपन से सुख-दुख में साथ रहने का वादा करता आया है। रक्षाबंधन के मौके पर इन बहनों की कहानी भाई-बहन के रिश्ते की गहराई और त्याग की मिसाल बन गई है।
राखी का वचन आज मैं निभाऊंगी, भाई के लिए बहन ने दी किडनी
पश्चिम बंगाल के पुलिया जिले के रहने वाले सप्पू प्रसाद की जिंदगी में साल 2022 में मुश्किल दौर शुरू हुआ। उन्हें पता चला कि उनकी किडनी में गंभीर परेशानी है। इलाज के बावजूद स्थिति ऐसी बनी कि डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत बताई। दिसंबर 2025 में भोपाल में उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद बंसल अस्पताल में डॉक्टर कार्तिक शर्मा ने जांच और उपचार के दौरान किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी। परिवार के सामने बड़ा सवाल था कि किडनी कौन देगा। इसी बीच सप्पू की 46 वर्षीय बड़ी बहन मैगी सिन्हा आगे आईं। उन्होंने भाई की जिंदगी बचाने के लिए अपनी किडनी देने का फैसला किया। परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं था लेकिन मैगी अपने निर्णय पर कायम रहीं। सप्पू प्रसाद कहते हैं कि रक्षाबंधन पर आमतौर पर भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है लेकिन इस बार उनकी बहन ने उनकी जिंदगी बचाकर उस रिश्ते को एक नई मिसाल दी है।
दो बच्चों की मां ने भी भाई के लिए नहीं सोचा पीछे
भोपाल के रहने वाले कोमल प्रसाद को अपनी किडनी की बीमारी के बारे में अचानक पता चला था। वह एक रिश्तेदार को ब्लड डोनेट करने गए थे, इसी दौरान जांच में उनकी किडनी में खराबी सामने आई। इसके बाद वर्ष 2020 से 2024 तक दवाओं के जरिए उनका इलाज चलता रहा। हालांकि समय के साथ उनकी बीमारी बढ़ती गई और वर्ष 2025 में डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत बताई। परिवार के सामने एक बार फिर वही सवाल था कि भाई को किडनी कौन देगा। ऐसे समय में उनकी छोटी बहन लता ने आगे बढ़कर अपनी किडनी देने का फैसला किया। लता के दो बच्चे हैं और परिवार की अपनी जिम्मेदारियां भी हैं। इसके बावजूद उन्होंने भाई की जिंदगी को प्राथमिकता दी। उनके इस फैसले को परिवार ने भी स्वीकार किया और उनका विरोध नहीं किया। लता का कहना था कि भाई को इस हालत में देखकर वह खुद को रोक नहीं सकती थीं। उनके लिए भाई की जिंदगी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण थी।
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रक्षाबंधन पर रिश्ते की नई मिसाल
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार, भरोसे और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प का पर्व है। आमतौर पर इस दिन बहन भाई की लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना करती है जबकि भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। लेकिन इन बहनों की कहानी में रक्षा का यह वचन दूसरी दिशा में दिखाई देता है।
सप्पू और उनकी बहन मैगी
इन घटनाओं ने यह दिखाया कि भाई-बहन का रिश्ता सिर्फ त्योहार पर बांधी जाने वाली राखी या दिए जाने वाले वचन तक सीमित नहीं है। मुश्किल वक्त में लिया गया एक बड़ा फैसला भी इस रिश्ते की मजबूती को साबित कर सकता है।




















