PU Special :किडनी देकर भाई-बहन ने बचाई जिंदगी, रक्षाबंधन पर रिश्ते की अनूठी मिसाल

इंदौर में रक्षाबंधन पर भाई-बहन के रिश्ते की अनूठी मिसाल सामने आई है। दो परिवारों में भाई और बहन ने एक-दूसरे की जिंदगी बचाने के लिए किडनी दान की। देवास की मीना छाबड़ा को भाई हुकुम सिंह ने किडनी देकर नया जीवन दिया, जबकि मनोज चौरसिया के लिए उनकी बड़ी बहन ने किडनी दान की।
किडनी देकर भाई-बहन ने बचाई जिंदगी, रक्षाबंधन पर रिश्ते की अनूठी मिसाल
इंदौर। मीना छाबड़ा और उनके भाई हुकुम सिंह पंवार।

प्रभा उपाध्याय, इंदौर। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का पर्व है। इस बार इंदौर में ऐसे दो परिवार सामने आए हैं, जहां राखी का रिश्ता केवल रस्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जीवन बचाने का जरिया बना। एक मामले में भाई ने बहन को किडनी देकर नया जीवन दिया, जबकि दूसरे में बड़ी बहन ने भाई की जिंदगी बचाने के लिए अपनी किडनी दान की।

भाई हुकुम सिंह ने बहन मीना को दी किडनी

देवास की 41 वर्षीय मीना छाबड़ा को किडनी खराब होने के बाद परिवार में चिंता का माहौल था। उनके 43 वर्षीय बड़े भाई हुकुम सिंह पंवार ने बहन की जिंदगी बचाने के लिए अपनी किडनी देने का फैसला किया। मीना के बेटे के मुताबिक, बीमारी की जानकारी मिलने के बाद बड़े मामा ने कहा कि वे ही अपनी बहन को किडनी देंगे। दोनों का ब्लड ग्रुप समान था, जिसके बाद ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया आगे बढ़ी। करीब चार महीने पहले मीना का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। परिवार के मुताबिक बीमारी सामने आने के करीब तीन महीने के भीतर ही ट्रांसप्लांट हो गया। इस बार मीना ट्रांसप्लांट के बाद पहली बार अपने भाई की कलाई पर राखी बांधेंगी। परिवार के लिए यह रक्षाबंधन खास है, क्योंकि भाई ने रिश्ते की डोर निभाते हुए बहन को नया जीवन दिया है।

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बड़ी बहन ने भाई को दान की किडनी

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 अपनी बहन के साथ मनोज चौरसिया

62 वर्षीय मनोज चौरसिया को वर्ष 2024 में पता चला कि उनकी दोनों किडनियां फेल हो गई हैं। मनोज ने बताया कि उनका काफी समय पहले तलाक हो गया था, इसलिए परिवार भी साथ नहीं था। बीमारी की जानकारी मिलने के बाद वे मानसिक रूप से काफी परेशान थे। उन्हें आज भी याद है कि रक्षाबंधन से करीब एक महीने पहले 8 सितंबर 2025 उनकी बड़ी बहन ने भाई की हालत देखकर किडनी देने का फैसला किया। छोटी बहन ने भी किडनी देने की बात कही थी, लेकिन बड़ी बहन ने जिम्मेदारी खुद उठाने का निर्णय लिया।

बहन के साथ ही रहते हैं मनोज

मनोज जनवरी में नरसिंहपुर से डिप्टी कलेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वे आज भी अपनी बड़ी बहन के साथ रहते हैं। उनका कहना है कि रक्षाबंधन पर बहन को राखी बांधते देखना और यह याद करना कि उसने अपनी किडनी देकर उनकी जिंदगी बचाने का फैसला किया, उनके लिए बेहद भावुक पल है। इन दोनों परिवारों के लिए इस बार रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि उस रिश्ते का उत्सव है, जिसमें भाई-बहन ने जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे के लिए अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला लिया।

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By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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