राखी से पहले पुलिस का नायाब तोहफा:आधी रात सड़क पर फंसी बहन की ऐसे की मदद

रीगल चौराहे पर रात 12 बजे पेट्रोल खत्म होने से परेशान था परिवार, प्रधान आरक्षक लोकेश गाथे और आरक्षक अमर हार्डिया ने मदद कर पेश की इंसानियत की मिसाल
राखी से पहले पुलिस का नायाब तोहफा:आधी रात सड़क पर फंसी बहन की ऐसे की मदद
रीगल चैकिंग पॉइंट का दर्शय

 इंदौर।  रात में सड़क पर पुलिस की चेकिंग को लेकर अक्सर तरह-तरह की बातें सुनने को मिलती हैं। कोई इसे लोगों को रोककर परेशान करने से जोड़ता है तो कोई ड्रिंक एंड ड्राइव की कार्रवाई के नाम पर राजस्व वसूली तक की बात कह देता है। लेकिन इंदौर में देर रात चल रही पुलिस की चेकिंग का एक ऐसा मानवीय चेहरा सामने आया है, जिसे देखकर शायद हर कोई यही कहेगा। अगर ऐसी चेकिंग रोज रात को हो तो इसमें बुराई ही क्या है।

 

मामला छोटी ग्वालटोली थाना क्षेत्र के रीगल चौराहे का है। रात करीब 12 बजे चेकिंग पॉइंट पर पुलिसकर्मियों ने एक परिवार को बाइक के साथ पैदल जाते देखा। बाइक को एक युवक धक्का लगा रहा था, जबकि उसके साथ एक महिला और करीब पांच साल की मासूम बच्ची भी पैदल चल रही थी। चेकिंग पॉइंट पर तैनात प्रधान आरक्षक लोकेश गाथे की नजर परिवार पर पड़ी तो उन्होंने तत्काल उन्हें रोका और इतनी रात को पैदल जाने की वजह पूछी। युवक ने बताया कि बाइक में पेट्रोल खत्म हो गया है। आसपास के पेट्रोल पंप भी बंद हो चुके हैं और परिवार को अभी काफी दूर जाना है। स्थिति समझते ही लोकेश गाथे ने महिला और उसकी मासूम बेटी को चेकिंग पॉइंट पर सुरक्षित रुकने के लिए कहा।

 

इसके बाद उनके साथ मौजूद प्रधान आरक्षक अमर हार्डिया ने युवक की मदद करने का फैसला किया। अमर हार्डिया अपनी बाइक से बंद पड़ी बाइक के पास पहुंचे और अपनी बाइक से उसे सहारा देते हुए पेट्रोल पंप तक ले गए। पेट्रोल मिलने के बाद परिवार की परेशानी दूर हुई और वे अपने गंतव्य की ओर रवाना हो सके।

डर के बीच मिली पुलिस की मदद, महिला बोली-अब समझ आया चेकिंग क्यों जरूरी है

महिला ने बताया कि रात में अचानक बाइक का पेट्रोल खत्म होने से पूरा परिवार परेशान हो गया था। रास्ता लंबा था और इतनी रात को मदद मिलना भी मुश्किल लग रहा था। सबसे बड़ी चिंता अपनी पांच साल की बेटी को लेकर थी। लेकिन रीगल चौराहे पर पुलिसकर्मियों ने जिस तरह बिना किसी औपचारिकता के आगे बढ़कर मदद की, उससे परिवार ने राहत की सांस ली। परिवार का कहना था कि देर रात सड़क पर पुलिस की मौजूदगी सिर्फ जांच-पड़ताल तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर वही पुलिस आम लोगों की मददगार भी बन सकती है। राखी के त्योहार से ठीक पहले पुलिस की ओर से एक बहन और उसकी मासूम बेटी को मिली यह मदद किसी महंगे तोहफे से कम नहीं थी।  

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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