नेपाल की तबाही के पीछे चीन का हाथ? ‘समय पर चेतावनी नहीं दी’ वाले आरोप पर बीजिंग का पलटवार!

काठमांडू। नेपाल के रसुवा इलाके में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब राहत और बचाव के साथ चेतावनी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। नेपाली मीडिया और कुछ पत्रकारों की ओर से आरोप लगाया गया कि तिब्बत की तरफ बाढ़ की जानकारी समय पर साझा नहीं की गई। इससे सीमा के पास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। चीन ने ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें गलत और भ्रामक बताया है। इस आपदा में नेपाल में कम से कम 165 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं।
बाढ़ के बाद क्यों उठे चेतावनी पर सवाल?
नेपाल में आई अचानक बाढ़ इतनी तेज थी कि कई लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में पानी और मलबे ने भारी नुकसान किया। सड़कें, पुल और इमारतें बह गईं। इसी वजह से यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या सीमा के दूसरी तरफ से खतरे की जानकारी पहले मिल सकती थी।
चीन ने आरोपों को किया खारिज
चीन ने नेपाल की तरफ से सामने आए इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। चीनी दूतावास ने बांध टूटने और चेतावनी रोकने से जुड़े दावों को गलत खबर बताया। बीजिंग का कहना है कि ऐसी प्राकृतिक आपदा के समय आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा जरूरी राहत और बचाव का काम है। चीन ने नेपाल के लिए आपातकालीन मदद और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की बात भी कही है।
चीनी राजदूत ने क्या कहा?
नेपाल में चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने रसुवा-ग्यिरोंग सीमा क्षेत्र की घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस आपदा से नेपाल और चीन दोनों तरफ भारी नुकसान हुआ है। राजदूत ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और मुश्किल समय में नेपाल के साथ खड़े रहने की बात कही। हालांकि, समय पर बाढ़ की चेतावनी देने या कथित देरी के सवाल पर उन्होंने सीधे तौर पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
नेपाल में 165 लोगों की मौत
नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या गुरुवार तक 165 पहुंच गई थी। नेपाल के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 826 लोग लापता हैं। इनमें 579 पर्यटक भी शामिल हैं। लापता लोगों में नेपाल के सुरक्षा बलों के जवान और स्थानीय लोग भी हैं। प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान लगातार चल रहा है।
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चीन की तरफ भी भारी नुकसान
नेपाल के साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी इस आपदा का असर पड़ा है। ग्यिरोंग इलाके में बाढ़ और मलबे से सड़क, बिजली और दूसरी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा। चीन की सरकारी जानकारी के अनुसार वहां भी बड़ी संख्या में लोग लापता बताए गए हैं। सीमा क्षेत्र में खराब मौसम और क्षतिग्रस्त रास्तों के कारण बचाव दलों के सामने मुश्किलें बनी हुई हैं।
असली वजह पर भी बनी हुई है चर्चा
बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआती जानकारी में भूकंप का जिक्र हुआ था लेकिन बाद के वैज्ञानिक विश्लेषण में ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों के अचानक खिसकने की संभावना ज्यादा मजबूत मानी गई। सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती अध्ययन में भी ग्लेशियर से जुड़े मलबे के नदी में पहुंचने के संकेत मिले हैं। इसके बाद नदी का रास्ता बाधित हुआ और अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर आया।


















