PU Special :GIS से दो महीने पहले बदलेगी MP की निवेश नीति, 3 अक्टूबर तक विभागों से मांगे संशोधन प्रस्ताव

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश में अगली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) की तैयारियों को लेकर सरकार ने निवेश नीतियों में बदलाव की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार की कोशिश है कि समिट से करीब दो महीने पहले ही विभिन्न विभागों की संशोधित निवेश नीतियां जारी कर दी जाएं ताकि देश-विदेश से आने वाले निवेशकों को नीतियों का अध्ययन करने और प्रदेश में निवेश की योजना बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपनी-अपनी मौजूदा निवेश नीतियों की समीक्षा कर 3 अक्टूबर तक संशोधन प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। विभागों ने भी उद्योग जगत, निवेशकों और विशेषज्ञों से सुझाव लेना शुरू कर दिया है।
पिछली GIS से लिया सबक, इस बार पहले जारी होंगी नीतियां
सरकार की यह कवायद पिछली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के अनुभव को देखते हुए की जा रही है। 2025 की GIS से पहले ड्रोन, सेमीकंडक्टर समेत करीब 24 क्षेत्रों के लिए अलग-अलग नीतियां तैयार की गई थीं। हालांकि इन नीतियों का अंतिम प्रकाशन समिट के ठीक पहले हुआ था। इसके चलते निवेशकों और उद्योगों को नई नीतियों के प्रावधान समझने और उनके मुताबिक अपनी निवेश योजनाएं तैयार करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया था। इस बार सरकार इस स्थिति को बदलना चाहती है। इसी वजह से विभागों को समय रहते नीतियों में जरूरी बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं।
उद्योगों और निवेशकों से सुझाव लेकर होगा बदलाव
सरकार ने विभागों से कहा है कि निवेश नीतियों में केवल औपचारिक संशोधन न किए जाएं बल्कि उन्हें उद्योगों और निवेशकों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाया जाए। इसके लिए संबंधित विभाग उद्योग संगठनों, विशेषज्ञों और संभावित निवेशकों से बातचीत कर रहे हैं। इन सुझावों के आधार पर नीतियों में जरूरी बदलाव प्रस्तावित किए जाएंगे।
जमीन से लेकर बिजली और मंजूरी प्रक्रिया तक बदलाव संभव
निवेश की संभावनाओं वाले विभिन्न क्षेत्रों में जमीन, बिजली, आधारभूत ढांचा, सरकारी अनुमति, निवेश प्रोत्साहन और अन्य सुविधाओं से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा की जा रही है। उद्योग, पर्यटन, खनन, रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और खाद्य समेत अन्य क्षेत्रों पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। संबंधित विभागों को अपने क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं और संभावित निवेशकों की पहचान करने के लिए भी काम करने को कहा गया है। GIS के दौरान विभागों को निवेशकों के सामने अपनी सेक्टर आधारित नीतियां प्रस्तुत करनी होंगी। इन प्रस्तुतियों में नीति के प्रमुख प्रावधान, निवेशकों को मिलने वाली सुविधाएं और मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं को प्रमुखता से रखा जाएगा।
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सभी विभागों को निवेश प्रस्ताव जुटाने की जिम्मेदारी
इस बार GIS की तैयारियों को केवल उद्योग विभाग तक सीमित नहीं रखा गया है। सभी विभागों को अपने स्तर पर संभावित निवेशकों से संपर्क कर निवेश प्रस्ताव जुटाने की जिम्मेदारी दी जा रही है। विभागीय अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के निवेशकों से संपर्क करेंगे। वहीं अपर मुख्य सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी दूसरे राज्यों के बड़े निवेशकों और कंपनियों से संपर्क कर उन्हें मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करेंगे। इससे सरकार का लक्ष्य अलग-अलग सेक्टर में निवेश की संभावनाओं को तलाशने और समिट से पहले ज्यादा से ज्यादा ठोस निवेश प्रस्ताव तैयार करने का है।
भोपाल में GIS के लिए पांच स्थानों पर मंथन
GIS का आयोजन भोपाल में कराने की तैयारी चल रही है। आयोजन स्थल के लिए करीब पांच विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इनमें लाल परेड मैदान, जंबूरी मैदान, मीनाल इंडस्ट्रियल एरिया और महाबड़िया-खुशीलाल अस्पताल के सामने कलियासोत डेम के पास की जमीन समेत अन्य विकल्प शामिल हैं। हालांकि सभी स्थानों को लेकर अलग-अलग व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। मीनाल इंडस्ट्रियल एरिया में बायपास चौड़ीकरण और रायसेन रोड पर मेट्रो लाइन के निर्माण को लेकर दिक्कत बताई जा रही है। वहीं जंबूरी मैदान में सीधे प्रवेश की व्यवस्था को चुनौती माना जा रहा है। इसी तरह महाबड़िया क्षेत्र में पहुंच मार्ग संकरा होने और शहर से दूरी ज्यादा होने के कारण इस विकल्प पर भी अभी विचार जारी है। अंतिम आयोजन स्थल का फैसला इन सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद किया जाएगा।
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समिट से पहले निवेशकों को मिलेगी नीतियों की जानकारी
सरकार की योजना है कि GIS से पहले ही संशोधित नीतियां निवेशकों के सामने उपलब्ध हों। इससे निवेशक अलग-अलग सेक्टर में मिलने वाली सुविधाओं, प्रोत्साहन और नियमों का पहले से अध्ययन कर सकेंगे। मध्यप्रदेश उद्योग विकास निगम के एमडी चंद्रमौली शुक्ला ने कहा कि GIS की तैयारियां जारी हैं। उनके मुताबिक उद्योग विभाग के साथ सभी विभाग भी अपने स्तर पर काम कर रहे हैं और समिट के आयोजन के लिए कुछ स्थानों का निरीक्षण किया गया है।




















