Peoples Update Special :नीट-यूजी 2026 रिजल्ट के बाद सक्रिय हुए एजेंट, विदेश से MBBS के नाम पर छात्रों को दिखा रहे डॉक्टर बनने का सपना

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। पीपुल्स समाचार की पड़ताल में सामने आया कि एजेंट कम फीस, आसान एडमिशन और 100 प्रतिशत डॉक्टर बनने जैसे दावे कर रहे हैं। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश से एमबीबीएस करने के बाद भारत में प्रैक्टिस के लिए एफएमजीई परीक्षा पास करना अनिवार्य है। इस परीक्षा का पास प्रतिशत बेहद कम है, इसलिए केवल एजेंटों के भरोसे भविष्य का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है। छात्रों को एनएमसी के नियम और संबंधित कॉलेज की मान्यता की पूरी जानकारी लेने के बाद ही निर्णय लेना चाहिए।
भारत लौटने के बाद की मुश्किलें नहीं बताते एजेंट
एजेंट छात्रों को रूस, नेपाल, किर्गिस्तान, फिलीपींस, बांग्लादेश और अन्य देशों में आसानी से एमबीबीएस कराने की बात तो बताते हैं, लेकिन भारत लौटने के बाद आने वाली चुनौतियों की जानकारी नहीं देते। विदेश से डिग्री लेने के बाद भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (एफएमजीई) पास करना अनिवार्य होता है। हाल के परिणाम बताते हैं कि इस परीक्षा में केवल 4 से 5 प्रतिशत अभ्यर्थी ही सफल हो पाते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचने की सलाह दे रहे हैं।
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विदेश से पढ़ाई के बाद कई छात्र नहीं बन सके डॉक्टर
भोपाल के फैजान खान (बदला हुआ नाम) ने वर्ष 2018 में यूक्रेन से एमबीबीएस किया, लेकिन कई प्रयासों के बाद भी एफएमजीई पास नहीं कर सके। फिलहाल वे एक निजी अस्पताल में करीब 25 हजार रुपये मासिक वेतन पर कंपाउंडर के रूप में काम कर रहे हैं। इसी तरह विदिशा की नेहा पालकर (बदला हुआ नाम) कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने के बाद भी लाइसेंस परीक्षा पास नहीं कर सकीं। वर्तमान में वे एक निजी अस्पताल में मैनेजमेंट का कार्य संभाल रही हैं। ये उदाहरण छात्रों के लिए सीख माने जा रहे हैं।
ऐसे फंसाते हैं एजेंट, दो छात्रों के सामने आए मामले
इंदौर की अनुष्का सक्सेना ने बताया कि नीट में 227 अंक आने के दो दिन बाद उन्हें नेपाल में एमबीबीएस कराने का फोन आया और पूरी प्रक्रिया कराने का दावा किया गया। वहीं भोपाल के गौरव श्रीवास्तव के पास वॉट्सऐप कॉल आया, जिसमें बांग्लादेश में कम फीस और आसान प्रवेश की बात कही गई। बाद में परिवार ने जानकारी जुटाई तो पता चला कि भारत में प्रैक्टिस के लिए एफएमजीई पास करना अनिवार्य है। इसके बाद उन्होंने एजेंट का प्रस्ताव ठुकरा दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पहले पूरी जानकारी लेना जरूरी है।
एक्सपर्ट की सलाह, जल्दबाजी में न लें फैसला
पूर्व डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन डॉ. ऐके श्रीवास्तव का कहना है कि विदेश से एमबीबीएस करने का निर्णय केवल कम अंक या एजेंट के आश्वासन पर नहीं लेना चाहिए। सबसे पहले एनएमसी के नियम, संबंधित कॉलेज की मान्यता, पढ़ाई की गुणवत्ता और भारत में लाइसेंस मिलने की प्रक्रिया को अच्छी तरह समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में लिया गया फैसला भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए छात्र और अभिभावक पूरी जानकारी के बाद ही निर्णय लें।
डेटा: फीस, एफएमजीई और एजेंटों के दावे
भारत के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की फीस करीब 55 से 65 लाख रुपये तक है, जबकि कजाकिस्तान में 25 से 30 लाख, चीन में 29 से 32 लाख, रूस-यूक्रेन में 28 से 30 लाख, नेपाल में लगभग 35 लाख और बांग्लादेश में 25 से 30 लाख रुपये तक खर्च आता है। एजेंट इसी कम फीस को आधार बनाकर छात्रों को आकर्षित करते हैं। वहीं एफएमजीई परीक्षा में केवल 4 से 5 प्रतिशत अभ्यर्थी ही सफल हो पाते हैं। एजेंट अक्सर सीटें सीमित हैं, कम अंकों में भी एडमिशन, आसान लोन और 100 प्रतिशत डॉक्टर बनने जैसे भ्रामक दावे करके छात्रों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं।












