इटारसी में दो दिवसीय बैठक खत्म, जल-जंगल-जमीन की रक्षा का संकल्प

इटारसी। बैठक में छह जिलों से किसान, मजदूर, आदिवासी, महिला, विद्यार्थी और सामाजिक न्याय आंदोलनों से जुड़े 17 से अधिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान आदिवासी संगठन केसला के वरिष्ठ नेता और पूर्व जिला पंचायत सदस्य फागराम ने की, वहीं संचालन जन संघर्ष समन्वय समिति मध्यप्रदेश के विजय कुमार ने किया।
जल-जंगल-जमीन समेत मुद्दों पर साझा संघर्ष का निर्णय
बैठक में जल, जंगल, जमीन, विस्थापन, पुनर्वास, वनाधिकार, किसान-मजदूरों के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को अलग-अलग देखने के बजाय साझा जनपक्षीय आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि बिखरे हुए संघर्षों को एक साथ जोड़कर ही इन मुद्दों पर मजबूत आवाज खड़ी की जा सकती है।
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भोपाल में बनेगा सहयोग समूह
बैठक में तय किया गया कि भोपाल स्तर पर पत्रकारों, वक्ताओं, अधिवक्ताओं, शोधकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक सहयोग समूह बनाया जाएगा। यह समूह जनआंदोलनों को कानूनी और मीडिया स्तर पर मजबूत संबल देने का काम करेगा।
आंदोलनों में आधुनिक संचार माध्यमों पर जोर
रचनात्मक प्रतिरोध और नई कार्यनीति के तहत केन-बेतवा संघर्ष के अनुभवों से सीखने पर जोर दिया गया। पारंपरिक प्रदर्शनों के साथ तथ्यात्मक बहसों, जनभागीदारी और सोशल मीडिया जैसे आधुनिक संचार माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल को भी आंदोलनों की रणनीति में शामिल करने का निर्णय लिया गया।
निशा बांगरे ने सामाजिक न्याय से जोड़ने की बात कही
पूर्व डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे की मौजूदगी में यह रेखांकित किया गया कि जल-जंगल-जमीन की लड़ाई को सामाजिक न्याय के व्यापक दायरे से जोड़े बिना समग्र बदलाव संभव नहीं है। बैठक में जनअधिकारों की रक्षा और आंदोलनों को व्यापक स्तर पर मजबूत करने की जरूरत पर भी चर्चा हुई।
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4 अक्टूबर को होगी अगली बैठक
मध्यांचल स्तर की अगली साझा बैठक आगामी 4 अक्टूबर 2026 को स्थानीय स्तर पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसमें क्षेत्र के अन्य सभी संघर्षशील समूहों को जोड़ने का आह्वान किया गया है। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि जल-जंगल-जमीन और जनअधिकारों की रक्षा के लिए बिखरे संघर्षों को अपनी ताकत जोड़नी होगी और सरकार की दमनकारी नीतियों और कॉरपोरेट लूट के खिलाफ मध्यांचल की धरती से मजबूत संयुक्त पहल खड़ी की जा रही है।




















