PlayBreaking News

Japanese Encephalitis:डेंगू-मलेरिया से भी खतरनाक हो सकता है यह वायरस! मच्छर के काटते ही दिमाग पर करता है हमला

मानसून के मौसम में मच्छरों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है, लेकिन हर मच्छर केवल डेंगू या मलेरिया ही नहीं फैलाता। कुछ मच्छर ऐसे वायरस भी फैलाते हैं, जो सीधे दिमाग को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसी ही गंभीर बीमारी जापानी इंसेफेलाइटिस है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है।
Follow on Google News
डेंगू-मलेरिया से भी खतरनाक हो सकता है यह वायरस! मच्छर के काटते ही दिमाग पर करता है हमला
डेंगू-मलेरिया से भी खतरनाक हो सकता है यह वायरस!

जापानी इंसेफेलाइटिस एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित क्यूलेक्स मच्छरों के काटने से फैलती है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य बुखार जैसे लगते हैं, लेकिन गंभीर स्थिति में यह दिमाग को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी का कोई विशेष इलाज नहीं है, इसलिए बचाव और समय पर पहचान सबसे जरूरी है। बच्चों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

क्यूलेक्स मच्छर फैलाते हैं यह खतरनाक वायरस

जापानी इंसेफेलाइटिस जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस से होने वाली बीमारी है, जो फ्लैविवायरस परिवार का सदस्य है। यही परिवार डेंगू और वेस्ट नाइल वायरस से भी जुड़ा है। यह वायरस संक्रमित क्यूलेक्स मच्छरों के काटने से फैलता है। ये मच्छर धान के खेतों, तालाबों, दलदली क्षेत्रों और बारिश के बाद जमा पानी में तेजी से पनपते हैं। डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के विपरीत, क्यूलेक्स मच्छर शाम से लेकर सुबह तक सबसे अधिक सक्रिय रहते हैं।

भोपाल: नीलबड़ में 20 दुकानों वाला अवैध कॉम्पलेक्स ध्वस्त, मुंडला की अवैध कॉलोनी पर भी कार्रवाई

भारत समेत कई देशों में हर साल सामने आते हैं मामले

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में हर साल जापानी इंसेफेलाइटिस के करीब 68 हजार मामले दर्ज किए जाते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। भारत में भी हर वर्ष इसके मामले सामने आते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग, धान के खेतों में काम करने वाले किसान और बिना टीकाकरण वाले यात्रियों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।

Breaking News

शुरुआत में सामान्य बुखार जैसे दिखते हैं लक्षण

इस बीमारी के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे दिखाई देते हैं। मरीज को बुखार, सिरदर्द, उल्टी, थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। लेकिन अगर वायरस दिमाग तक पहुंच जाए तो स्थिति गंभीर हो जाती है। इसके बाद तेज बुखार, भ्रम की स्थिति, गर्दन में अकड़न, दौरे पड़ना, चलने में परेशानी, बेहोशी और होश खोने जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी होता है।

जांच के लिए कई मेडिकल टेस्ट की पड़ती है जरूरत

डॉक्टरों के अनुसार, केवल सीटी स्कैन के आधार पर इस बीमारी की पुष्टि हमेशा संभव नहीं होती। मरीज की स्थिति के अनुसार एमआरआई, खून की जांच और सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड की जांच कर संक्रमण की पुष्टि की जाती है। समय पर सही जांच होने से बीमारी की गंभीरता का आकलन करने और मरीज को आवश्यक चिकित्सा सहायता देने में आसानी होती है। इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

फोटोग्राफी का ऐसा जुनून ! कैमरे जैसा बनवाया घर, बेटों के नाम रखे Canon, Nikon और Epson

इलाज नहीं, बचाव ही सबसे बड़ा उपाय

विशेषज्ञों का कहना है कि जापानी इंसेफेलाइटिस का कोई विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। इलाज के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर रखने और होने वाली जटिलताओं को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है। इसलिए इस बीमारी से बचाव सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। मच्छरों से बचाव, आसपास पानी जमा न होने देना, पूरी बाजू के कपड़े पहनना, मच्छरदानी का उपयोग करना और जरूरत पड़ने पर टीकाकरण करवाना संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts