कभी अहमदनगर में बीता बचपन, अब स्वीडन की संसद बनीं महाराष्ट्र के बड़े परिवार की बेटी

महाराष्ट्र के अहमदनगर से जुड़ा एक परिवार अब स्वीडन की राजनीति में भी अपनी पहचान बना चुका है। शिक्षाविद अशोक विखे पाटिल की बेटी नीला विखे पाटिल स्वीडन की सांसद चुनी गई हैं। 41 वर्षीय नीला ग्रीन पार्टी की नेता हैं और उन्होंने 13 सितंबर को हुए राष्ट्रीय चुनाव में स्टॉकहोम शहर निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज की। इसके साथ ही उन्होंने स्वीडन की 349 सदस्यीय संसद रिक्स्डैग में प्रवेश किया है। नीला की जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उनका पारिवारिक रिश्ता महाराष्ट्र के एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक परिवार से है। उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती साल महाराष्ट्र के अहमदनगर में बिताए हैं। हालांकि उनका जन्म स्वीडन में हुआ था।
41 साल की उम्र में संसद तक पहुंचीं नीला
नीला विखे पाटिल लंबे समय से स्वीडन की ग्रीन पार्टी से जुड़ी हुई हैं। करीब 25 वर्षों से पार्टी के साथ काम कर रहीं नीला ने स्थानीय राजनीति से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाली हैं। 13 सितंबर को हुए चुनाव में स्टॉकहोम शहर निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल करने के बाद अब वह राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा बन गई हैं। स्वीडन की संसद में कुल 349 सीटें हैं और नीला इसी संसद की नई सदस्य बनी हैं। सांसद चुने जाने के बाद नीला ने कहा कि 349 सदस्यीय संसद का हिस्सा बनना उनके लिए अच्छा अनुभव है। उन्होंने कहा कि वह शहर और देश के विकास में योगदान देना चाहती हैं।
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बोलीं- 'उन लोगों की आवाज बनना चाहती हूं, जो वोट नहीं दे सकते'
सांसद बनने के बाद नीला ने अपने राजनीतिक विजन को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जो खुद वोट नहीं दे सकते। नीला ने ऐसे समाज की बात की, जहां हर बच्चे को बेहतर भविष्य का मौका मिले। उन्होंने स्वच्छ पानी, प्रकृति की सुरक्षा और रहने लायक पर्यावरण को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया। उनका कहना है कि दुनिया को ऐसे विकास की जरूरत है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा हो और इंसानों की वजह से होने वाली पर्यावरणीय आपदाओं को कम किया जा सके।
महाराष्ट्र के बड़े विखे परिवार से है रिश्ता
नीला विखे पाटिल का संबंध महाराष्ट्र के चर्चित विखे परिवार से है। वह एशिया की पहली सहकारी चीनी फैक्ट्री के संस्थापक विठ्ठलराव विखे पाटिल की परपोती हैं। विठ्ठलराव विखे पाटिल ने महाराष्ट्र में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। नीला, दिवंगत केंद्रीय मंत्री बालासाहेब विखे पाटिल की पोती भी हैं। उनका रिश्ता महाराष्ट्र की राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। वह महाराष्ट्र के भाजपा नेता और मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की भतीजी हैं। इस तरह नीला का परिवार शिक्षा, सहकारिता और राजनीति से लंबे समय से जुड़ा रहा है।
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पढ़ाई में भी मजबूत रहा है बैकग्राउंड
नीला ने अपनी उच्च शिक्षा स्वीडन और स्पेन में पूरी की है। उन्होंने गोथेनबर्ग स्कूल ऑफ बिजनेस से अर्थशास्त्र और कानून की पढ़ाई की। इसके साथ ही उन्होंने एमबीए की डिग्री भी हासिल की। इसके अलावा उन्होंने स्पेन के मैड्रिड स्थित कॉम्प्लूटेंस विश्वविद्यालय से भी एमबीए किया है। शिक्षा के बाद उन्होंने राजनीति और कॉर्पोरेट क्षेत्र, दोनों में काम किया।
स्वीडिश प्रधानमंत्री कार्यालय में भी किया काम
राजनीति में सक्रिय होने से पहले नीला विखे पाटिल को प्रशासन और नीति से जुड़े कामों का अनुभव भी रहा है। उन्होंने पूर्व स्वीडिश प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन के कार्यकाल में प्रधानमंत्री कार्यालय में राजनीतिक सलाहकार के तौर पर काम किया। इस दौरान उन्होंने वित्त, टैक्स और आवास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम किया। वह स्टॉकहोम नगर परिषद की सदस्य भी रह चुकी हैं। इसके अलावा वह स्टॉकहोम ग्रीन पार्टी की चुनाव समिति से भी जुड़ी रही हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव के बाद अब वह स्वीडन की राष्ट्रीय संसद में पहुंची हैं।
PwC में भी काम कर चुकी हैं नीला
राजनीति के साथ-साथ नीला का कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी अनुभव है। साल 2020 से वह वैश्विक पेशेवर सेवा नेटवर्क PwC से जुड़ी हुई हैं। यहां उन्होंने रणनीति, प्रबंधन, तकनीक और जोखिम से जुड़े परामर्श के क्षेत्र में काम किया। अप्रैल 2025 में वह अधिकृत सार्वजनिक लेखाकार भी बनीं। इस तरह राजनीति में आने से पहले उनके पास प्रशासन, वित्त, व्यवसाय और सलाहकार के रूप में काम करने का अनुभव रहा है।
स्वीडन में विपक्षी दलों ने हासिल किया मामूली बहुमत
नीला की जीत ऐसे समय हुई है, जब स्वीडन के राष्ट्रीय चुनाव में विपक्षी दलों ने मामूली बढ़त हासिल की। स्वीडन के चुनाव प्राधिकरण के मुताबिक, चार विपक्षी दलों ने मिलकर रिक्स्डैग की 349 सीटों में से 176 सीटें जीतीं। वहीं, निवर्तमान रूढ़िवादी सरकार का समर्थन करने वाले या उसके साथ गठबंधन में शामिल चार दलों को 173 सीटें मिलीं। इस तरह दोनों पक्षों के बीच सीटों का अंतर बहुत कम रहा। इसी चुनाव में नीला विखे पाटिल ने स्टॉकहोम से जीत दर्ज कर स्वीडन की राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाई।
महाराष्ट्र से स्वीडन तक राजनीतिक सफर
नीला विखे पाटिल की कहानी दो अलग-अलग दुनिया को जोड़ती है। जन्म स्वीडन में हुआ, शुरुआती जीवन महाराष्ट्र के अहमदनगर में बीता और राजनीतिक करियर स्वीडन में आगे बढ़ा। अब वह रिक्स्डैग की सदस्य के तौर पर पर्यावरण, बच्चों के भविष्य, स्वच्छ पानी और बेहतर समाज जैसे मुद्दों पर काम करने की बात कह रही हैं। महाराष्ट्र से जुड़ी पारिवारिक विरासत और स्वीडन में लंबे राजनीतिक अनुभव के साथ नीला का संसद तक पहुंचना उनके सार्वजनिक जीवन का एक नया अध्याय है।



















