PU Special :पति को ब्रेन ट्यूमर हुआ तो बदले ससुराल के तेवर, तीन बच्चों को लेकर घर से निकली मां, महिला आयोग को बताया 3 साल से हो रही प्रताड़ित

भोपाल। जिस घर में 15 साल पहले शादी होकर आई थी, उसी घर से तीन बच्चों का हाथ थामकर मजबूरी में निकलना पड़ा। पहले उस घर में हर वक्त सब मेरे नाम की माला जपते थे, लेकिन पति की बीमारी ने सब बदल दिया। तीन साल में इतनी प्रताड़ना मिली कि आखिर घर से निकलना पड़ा। यह व्यथा लेकर एक पीड़िता, महिला आयोग पहुंची। दरअसल, तीन साल पहले पति को ब्रेन ट्यूमर हुआ। बीमारी के कारण उनकी याददाश्त प्रभावित हुई तो ससुराल वालों ने उसे परेशान करना शुरू कर दिया।
विवाद और प्रताड़ना के बाद राशन-पानी भी बंद
धीरे-धीरे विवाद, मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक दबाव बढ़ता गया। हालात यहां तक पहुंच गए कि उसका राशन-पानी तक बंद कर दिया गया। महिला के मुताबिक तीन महीने तक उसने उधार लेकर बच्चों का पेट पाला। आखिरकार एक माह पहले घर छोड़कर वह मायके वालों की मदद से किराए के मकान में रह रही है। मामले में महिला ने कहा कि वह ससुराल वालों से विवाद नहीं बल्कि अपने और बच्चों के लिए सुरक्षित जीवन चाहती है।
पति की बीमारी के बाद परिवार का रवैया बदलने का आरोप
महिला ने आयोग के सामने अपना दर्द बताते हुए कहा कि शादी के शुरुआती सालों में सब ठीक था। तीन साल पहले पति को ब्रेन ट्यूमर होने के बाद सब कुछ बदल गया। बीमारी के कारण उन्हें कई बातें याद नहीं रहतीं। महिला का आरोप है कि ससुराल वालों ने पति को भी उसके खिलाफ कर दिया है। महिला ने कहा- मेरे पति अब मेरी बात नहीं समझते। उनके माता-पिता जो कहते हैं, वही उन्हें सच लगता है। मैं तीन बच्चों को लेकर कहां जाऊं? उनकी पढ़ाई, घर का खर्च और अपनी सुरक्षा... सबकी चिंता अकेले कैसे करूं।
बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षित जीवन की मांग
उसने कहा कि सास-ससुर, देवर-देवरानी सबका रवैया बदल गया है। उसे घर से निकालने के लिए उस पर परिवार में विवाद कराने, झगड़ा करने और मारपीट करने जैसे आरोप लगाए गए। उसका राशन-पानी तक बंद कर दिया गया। तीन महीने तक आर्थिक संकट से जूझती रही और परिचितों से उधार लेकर बच्चों का खर्च चलाया। बाद में नौकरी शुरू की, लेकिन ससुराल वालों का दबाव कम नहीं हुआ और उसे लगातार घर खाली करने के लिए कहा जाता रहा। मजबूरी में बच्चों की शिक्षा की खातिर वह भोपाल में ही किराए का मकान लेकर रह रही है। पीड़िता ने अपने बच्चों के लिए न्याय की मांग की है। उसने कहा कि वह सिर्फ इतना चाहती है कि बच्चों की पढ़ाई न रुके, उन्हें भरण-पोषण का खर्च मिले और वह अपने बच्चों के साथ सुरक्षित जीवन जी सके।



















