Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

बालाघाट के झामुल गांव का सामाजिक बहिष्कार मामला, हाईकोर्ट ने पुलिस जांच में हस्तक्षेप से किया इनकार

बालाघाट के झामुल गांव में अनुसूचित जाति के लोगों के सामाजिक बहिष्कार और अत्याचार के मामले में दायर जनहित याचिका का हाईकोर्ट ने निराकरण किया। पुलिस ने 21 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है।
बालाघाट के झामुल गांव का सामाजिक बहिष्कार मामला, हाईकोर्ट ने पुलिस जांच में हस्तक्षेप से किया इनकार

जबलपुर। बालाघाट जिले के झामुल गांव में अनुसूचित जाति के लोगों के कथित सामाजिक बहिष्कार और जातिगत अत्याचार से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका का मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने निराकरण कर दिया है। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि मामले में पुलिस पहले ही 21 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर चुकी है। ऐसे में याचिका को लंबित रखने से पुलिस की जांच प्रभावित हो सकती है। कोर्ट ने इसी आधार पर मामले में आगे हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए जनहित याचिका का निराकरण कर दिया।

झामुल गांव में जातिगत अत्याचार के आरोप

यह जनहित याचिका पीपुल्स काउंसिल फॉर जस्टिस एंड ह्यूमन राइट्स के डायरेक्टर आनंद कुमार बाघमारे की ओर से दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बालाघाट जिले के बिरसा थाना क्षेत्र के झामुल गांव में अनुसूचित जाति के लोगों को कथित तौर पर जातिगत अत्याचार, सार्वजनिक अपमान और भेदभावपूर्ण व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि स्थानीय पुलिस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अपेक्षित सख्त कार्रवाई नहीं कर रही है। याचिकाकर्ता ने इसे कानून के विपरीत बताते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की थी।

ये भी पढ़ें: फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर 32 साल नौकरी,नहीं मिलेगी पेंशन; हाईकोर्ट से याचिका खारिज

21 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता कनक गहरवार ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह तथ्य रखा गया कि पुलिस ने मामले में 21 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। डिवीजन बेंच ने माना कि जब पुलिस मामले की जांच कर रही है और एफआईआर दर्ज हो चुकी है, तो जनहित याचिका को लंबित रखने से जांच की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका हो सकती है।

ये भी पढ़ें: शादी की जिद पर अड़ी नाबालिग, हाईकोर्ट ने पिता को दी सख्त हिदायत

19 जून 2024 को सामाजिक बहिष्कार खत्म करने पर हुआ था समझौता

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी पाया कि दोनों पक्षों के बीच 19 जून 2024 को सामाजिक बहिष्कार समाप्त करने को लेकर समझौता हो चुका था। इस तथ्य और पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज किए जाने को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने मामले में आगे सुनवाई जारी रखने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही जनहित याचिका का निराकरण कर दिया गया।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

Latest Posts