बैंक में बंद खाते को अनफ्रीज करने के दिए निर्देश, हाईकोर्ट बोला-साइबर फ्रॉड के नाम पर एकाउंट पूरी तरह फ्रीज नहीं कर सकती पुलिस

इंदौर। न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने शाजापुर निवासी शाहिद की याचिका पर 18 सितंबर 2026 को यह आदेश दिया। अदालत ने शाहिद के खाते पर लगी पूरी रोक हटाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस के साइबर प्रकोष्ठ द्वारा विवादित बताई गई करीब 46,806 रुपये की राशि को सावधि जमा के रूप में सुरक्षित रखने के लिए कहा गया है। शाहिद ने अधिवक्ता सूरज शर्मा के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर बताया था कि पुलिस की सूचना के आधार पर बैंक ने खाते के पूरे लेनदेन पर रोक लगा दी थी। ऐसे में वे अपनी जमा राशि का सामान्य उपयोग भी नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने उच्च न्यायालय से खाते पर लगी रोक हटाने और उसे फिर से संचालित करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।
अदालत ने पुराने फैसले को माना लागू
अदालत ने खाते को पूरी तरह रोककर रखने की कार्रवाई को उचित नहीं माना। उच्च न्यायालय ने यस बैंक को निर्देश दिया कि शाहिद के खाते पर लगी पूरी रोक तत्काल हटाई जाए। सीज की गई राशि के अलावा खाते में उपलब्ध बाकी रकम पर खाताधारक को लेनदेन की अनुमति रहेगी।
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तीन महीने में मजिस्ट्रेट से आदेश लेना होगा
अदालत ने जांच एजेंसी के लिए समय सीमा भी तय की है। पुलिस या संबंधित जांच एजेंसी को कानूनी प्रावधानों के तहत तीन महीने के भीतर सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट से आवश्यक आदेश प्राप्त करना होगा। अगर तीन महीने के भीतर जांच एजेंसी न्यायिक मजिस्ट्रेट का स्पष्ट आदेश प्रस्तुत नहीं करती है तो खाताधारक बैंक और पुलिस को सूचित करने के बाद सावधि जमा में रखी गई विवादित राशि को भी निकाल सकेगा।
जब्ती की सूचना मजिस्ट्रेट को देना जरूरी
कई मामलों में पुलिस या साइबर प्रकोष्ठ बैंकों को सूचना भेजकर खाते पर रोक लगवा देते हैं। इसके बाद न्यायालय की ओर से जानकारी या जवाब मांगे जाने पर जांच एजेंसियों की ओर से समय पर जवाब नहीं दिया जाता। अदालत ने पूर्व न्यायिक व्यवस्था के संदर्भ में कहा कि खाते या राशि को जब्त करने की कार्रवाई होने पर संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना देना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।



















