MP में आज ‘नो UPI डे’! इंदौर-भोपाल समेत बड़े शहरों में डिजिटल पेमेंट बंद करने की तैयारी, जानें क्या है पूरा विवाद

मध्य प्रदेश में आज व्यापारी ‘नो UPI डे’ मनाने की तैयारी में हैं। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर समेत प्रदेश के कई बड़े शहरों में व्यापारी UPI से भुगतान स्वीकार नहीं करने का अभियान चलाएंगे। व्यापारियों का कहना है कि UPI पेमेंट से जुड़े नए नियम उनके कारोबार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकते हैं। इसी के विरोध में उन्होंने नियम लागू होने से पहले ही UPI भुगतान बंद करने का फैसला लिया है। इस विरोध की शुरुआत इंदौर से हुई है। यहां 125 से ज्यादा व्यापार संघों और करीब 2 लाख व्यापारियों ने ‘नो UPI डे’ आंदोलन को समर्थन देने का दावा किया है। सराफा बाजार, कपड़ा बाजार और मारोठिया बाजार जैसे प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में भी इस अभियान का असर देखने को मिल रहा है।
इंदौर में सड़कों पर उतरे व्यापारी
इंदौर में मंगलवार रात व्यापारियों ने UPI से जुड़े प्रस्तावित शुल्क के विरोध में प्रदर्शन किया। टाइल्स एंड सेनेटरी वेयर व्यापारी एसोसिएशन की अगुवाई में रीगल स्क्वायर पर हुए प्रदर्शन में 150 से ज्यादा व्यापारी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने UPI शुल्क के खिलाफ नारे लगाए। व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय अगर उस पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो इसका सीधा असर छोटे और मध्यम कारोबारियों पर पड़ेगा। व्यापारी संगठनों ने सरकार से इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है।
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आखिर किस नियम का हो रहा विरोध?
व्यापारियों के मुताबिक, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपए से अधिक के मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR शुल्क लगाए जाने का प्रस्ताव है। इसी प्रस्ताव को लेकर कारोबारी विरोध कर रहे हैं। व्यापारियों का तर्क है कि किराना, कपड़ा, सराफा और पेट्रोल पंप जैसे कारोबार में मुनाफे का मार्जिन पहले से सीमित रहता है। ऐसे में बड़े UPI लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगने से कारोबारियों का खर्च बढ़ जाएगा। व्यापारी संगठनों के दावे के अनुसार, अकेले भोपाल और इंदौर के कारोबारियों पर हर महीने करीब 14.4 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
75 हजार के भुगतान पर 300 रुपए तक शुल्क का दावा
व्यापारियों के मुताबिक, अगर 2,000 रुपए से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू होता है, तो 75,000 रुपए के लेनदेन पर करीब 300 रुपए तक शुल्क बन सकता है। कारोबारियों का कहना है कि थोक व्यापार में यह समस्या ज्यादा बड़ी हो सकती है, क्योंकि यहां बड़ी रकम के लेनदेन आम हैं। उनके अनुसार, थोक कारोबार का करीब 90 प्रतिशत लेनदेन 2,000 रुपए से अधिक का होता है। छोटे कारोबारियों का कहना है कि अगर दिनभर में कई बड़े UPI लेनदेन होते हैं, तो कुल शुल्क की रकम भी काफी बढ़ सकती है। इसी वजह से व्यापारी संगठन सरकार से प्रस्तावित शुल्क पर दोबारा विचार करने की मांग कर रहे हैं।
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पेट्रोल पंपों ने भी किया विरोध का ऐलान
UPI शुल्क के विरोध में अब पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन भी व्यापारियों के साथ खड़ा नजर आ रहा है। मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने भी इस अभियान का समर्थन किया है। एसोसिएशन के अनुसार, 16 अक्टूबर से प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर 2,000 रुपए से ज्यादा के ईंधन भुगतान के लिए केवल नकद भुगतान स्वीकार करने का फैसला किया गया है। इस फैसले से पेट्रोल-डीजल खरीदने वाले ग्राहकों को भी परेशानी हो सकती है, खासकर उन लोगों को जो बड़ी रकम का भुगतान डिजिटल माध्यम से करना पसंद करते हैं।
सरकार से नियम वापस लेने की मांग
व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान आज कारोबार का अहम हिस्सा बन चुका है। UPI के जरिए लेनदेन आसान और तेज हुआ है, लेकिन प्रस्तावित शुल्क से कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। फिलहाल व्यापारिक संगठनों ने सरकार से प्रस्तावित नियम को वापस लेने की मांग की है। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित संस्थाएं व्यापारियों की मांग पर क्या फैसला लेती हैं और ‘नो UPI डे’ के इस अभियान का आगे क्या असर देखने को मिलता है।



















