Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

मध्यप्रदेश में शुरू हुई आयुर्वेद मेडिसिन की पड़ताल, साइड इफेक्ट नहीं होने का भ्रम टूटा

प्रदेश में एलोपैथी के बाद अब आयुर्वेद दवाओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। शिकायतें मिलने के बाद लैब में टेस्टिंग शुरू की गई है। विभाग और दवाओं की जांच भी करेगा।
मध्यप्रदेश में शुरू हुई आयुर्वेद मेडिसिन की पड़ताल, साइड इफेक्ट नहीं होने का भ्रम टूटा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    राजीव सोनी,भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने अब आयुर्वेद दवाओं की गुणवत्ता को लेकर पहली बार सख्त मॉनिटरिंग के साथ पड़ताल शुरू की है। प्रदेश के ड्रग कंट्रोलर और आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों को सतर्कता संबंधी आदेश जारी किए गए हैं। शासकीय लैब में अस्पतालों और प्राइवेट सेक्टर की दवाओं का परीक्षण होगा। प्रदेश में पहली बार 7 आयुर्वेद मेडिसिन पर प्रतिबंध लगाया गया है। इनमें से कई दवाएं बिना डॉक्टर के परामर्श के लोग ले लेते  हैं। आयुष विभाग के मंत्री इंदरसिंह परमार भी मानते हैं आयुर्वेद दवाओं का साइड इफेक्ट न होेने का भ्रम भ्रम टूट गया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह संयोग है कि जहरीले कफ सीरप हादसे के बाद छिंदवाड़ा जिला एक बार फिर सुर्खियों में है। जिले में 5 माह की बच्ची की मौत के बाद एक्शन में आई सरकार ने 7 आयुर्वेद दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया। लैब टेस्टिंग में ये दवाएं अमानक पाई गर्ई।

    पहली बार सख्त कार्रवाई

    आयुष विभाग भोपाल के रिटायर्ड आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसपी तिवारी कहते हैं कि साढ़े तीन- चार दशक से आयुर्वेद की दवाओं का निरंतर अध्ययन-परीक्षण कर रहा हूं। संभवत: यह पहला मौका है जब लैब टेस्टिंग में एक साथ इतनी दवाएं अमानक पाई गईं। दवाओं के बैच को प्रतिबंध जैसी सख्त कार्रवाई सामने आई है। उचित मात्रा न होने पर आयुर्वेद दवा भी नुकसान कर सकती है। 

    गुणवत्ता में खरी नहीं 7 दवाएं

    • कासामृत सीरप- खांसी
    • गिलोय सत्व- बुखार
    • कामदुधा रस- अम्ल-पित्त, एसिडिटी
    • प्रवाल पिस्टी- कैल्सियम की कमी, हड्डी , अम्ल संबंधी
    • मुक्ता शक्ति भस्म- अम्ल पित्त (पेट संबंधी)
    • लक्ष्मी विलास रस- बुखार, सर्दी
    • कास कुठार रस- खांसी

    मंत्री बोले-गुणवत्ता के मामले में कोई समझौता नहीं

    आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार का कहना है अस्पताल से बंट रहीं एवं प्राइवेट सेक्टर की दवाओं की टेस्टिंग कराएंगे। ड्रग कंट्रोलर और चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश भी दिए गए हैं।  छिंदवाड़ा, दतिया, बैतूल और जबलपुर से शिकायतें मिली हैं। गुणवत्ता के मामले में कोई समझौता नहीं। आयुर्वेद औषधि नियमावली के अनुसार कार्रवाई होगी। शासन ने ऐसे चिकित्सकों को प्रारंभिक उपचार की ट्रेनिंग देकर नियुक्त किया है। गंभीर रोगों का इलाज तो विशेषज्ञ ही करेंगे।  

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

    Latest Posts