Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

ये है रॉबिन हुड आर्मी...पांच साल से दे रहे नि:शुल्क शिक्षा, 100 बच्चों का स्कूलों में कराया एडमिशन

ग्वालियर में रॉबिन हुड आर्मी के सदस्य अपने काम के बाद समय निकालकर बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। ये हर रविवार को एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में कक्षाएं लगाते हैं।
पांच साल से दे रहे नि:शुल्क शिक्षा, 100 बच्चों का स्कूलों में कराया एडमिशन
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    राजीव कटारे, ग्वालियर। घरों का बचा हुआ खाना इकट्ठा कर जरूरतमंदों को देने के लिए शुरू हुई मुहिम अब बच्चों में शिक्षा की अलख जगाने तक पहुंच गई है। इस काम में लगे सभी 40-50 युवक राबिन हुड आर्मी के सदस्य हैं। सभी सदस्य प्राइवेट जॉब करने के साथ ही समय निकालकर बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने का कार्य कर रहे हैं।

    पहली से 11वीं तक के बच्चों को शिक्षा

    राबिन हुड आर्मी से जुड़े मोहित जोशी, शालिनी जैन बताते हैं, हर रविवार को आर्मी के सदस्य सिटी सेंटर, कैलाश विहार में एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में कक्षाएं लगाते हैं। इसके लिए कोचिंग संचालक द्वारा कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। यहां शिफ्टों में कक्षा पहली से लेकर 11वीं तक के बच्चों की कक्षाएं लगती हैं। 

    बचे भोजन का सही उपयोग

    राबिन हुड आर्मी के सदस्य बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने के अलावा जरूरतमंद बच्चों को स्कूलों में भी प्रवेश दिलाते हैं। मोहित जोशी के अनुसार, पिछले पांच साल में हमनें 100 बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिला चुके हैं। इसके लिए बच्चों के जो भी डॉक्यूमेंट जैसे-आधार कार्ड या फिर निवास प्रमाण पत्र की जरूरत होती है, उसे भी बनवाते हैं।  आर्मी के सदस्य जरूरतमंदों को खाना भी उपलब्ध कराते हैं। मोहित जोशी ने बताया कि हम शादियों एवं किसी घर में शुभ कार्य के दौरान बचा हुआ भोजन कलेक्ट कर रेलवे स्टेशन एवं धर्मशालाओं में लोगों को बांटने का कार्य भी करते हैं।

    मैं रविवार को पढ़ने जाता हूं

    शालिनी मैडम ने मेरा एडमिशन थाटीपुर सरकारी स्कूल में कराया। मेरा परिवार गरीब है। मैं हर रविवार को मैडम से पढ़ने भी जाता हूं।                      

    विनय, छात्र

    मैं तीन साल से पढ़ाई कर रहा

    एक भैया हमारे यहां आए थे। उन्होंने मुझे पढ़ाने के लिए मेरे माता-पिता को समझाया। तीन साल से मैं हर रविवार को यहां पढ़ाई करने आता हूं।

    कार्तिक, छात्र, सिटी सेंटर स्थित स्लम बस्ती 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

    Latest Posts