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मध्यप्रदेश स्थापना दिवस :70 बरस का सफर… अब निवेश और नवाचार के रास्ते पर दौड़ता प्रदेश

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70 बरस का सफर… अब निवेश और नवाचार के रास्ते पर दौड़ता प्रदेश
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। शनिवार 1 नवंबर को मध्य प्रदेश 70वें वर्ष में प्रवेश करेगा। 1956 के बाद से प्रदेश ने अपने विकास का रास्ता तय किया और बीमारू राज्य के कलंक को मिटाकर वर्तमान में 'समृद्ध और विकसित मध्यप्रदेश' का ध्येय लेकर आगे बढ़ रहा है। सरकार इस रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है कि औद्योगिक विकास में प्रदेश देश में नंबर एक बने। किसानों की आय दो गुनी हो, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की हो, महिलाओं में आत्मगौरव के मजबूत भाव बने और युवाओं के लिए सकारात्मक वातावरण उपलब्ध होना सरकार का ड्रीम है। सरकार चार सर्वस्पर्शी मिशनों गरीब कल्याण, युवा कल्याण, किसान और नारी कल्याण मिशन के अंतर्गत कार्य कर रही है।

    हर क्षेत्र में बने अग्रणी

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि, मप्र का यह 70वां स्थापना दिवस एक अवसर है अतीत की उपलब्धियों को स्मरण करने और भविष्य के स्वर्णिम लक्ष्य तय करने का। हम सब एकजुट होकर विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त मप्र के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। प्रदेश को हर क्षेत्र में सबसे आगे रखकर अग्रणी बनाने का यही सही अवसर है। 

    निवेशा यात्रा

    प्रदेश में निवेश लाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के साथ सेक्टर स्तर और संभाग स्तर पर कॉन्क्लेव प्रारंभ किए। उज्जैन से निवेश यात्रा शुरू हुई और फिर जबलपुर, ग्वालियर, सागर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, मुंबई, कोयंबटूर, बैंगलुरु, पुणे, दिल्ली, यूके, जर्मनी, जापान, दुबई तक इसे विस्तार दिया। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 26 लाख 61 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले, जिनसे 21 लाख रुपए से अधिक नए रोजगार सृजन होंगे। एक साल में 30 लाख 77 हजार करोड के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।

    लॉजिस्टिक्स पार्क

    इंदौर के पास पीथमपुर में 255.17 एकड़ में राज्य का पहला मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क बन रहा है। यह कई तरह की लॉजिस्टिक्स सुविधाओं जैसे रेलवे टर्मिनल, कंटेनर यार्ड, कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस प्रदान करेगा। 2026 में पूरा होने की उम्मीद है। इसे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। आने वाले सालों में भोपाल के पास इटायाकलां में 34 एकड़ में एक और लॉजिस्टिक्स पार्क बनाया जाएगा, जो रेलवे के संचालन में सुधार करेगा। इसमें 4 मंजिला ग्रीन बिल्डिंग, सोलर हाइब्रिड पावर, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की सुविधा होगी। इसके वर्ष 2026 में पूरा होने की संभावना है।

    नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते कदम

    प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा क्षमता में पिछले 12 वर्षों में 19 गुना वृद्धि हुई है। सोलर एवं पवन ऊर्जा क्षमता में वार्षिक वृद्धि दर क्रमशः 58 एवं 23 फीसदी है। रीवा सोलर परियोजना के साथ आगर, शाजापुर एवं नीमच में भी परियोजनाओं की स्थापना हुई है। ओंकारेश्वर में 278 मेगावॉट का देश का सबसे बड़े फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट लगाया गया है। मुरैना में प्रस्तावित सौर परियोजना से 440 मेगावॉट ऊर्जा दिन एवं रात के पीक घंटों में 95 फीसदी उपलब्धता के साथ सप्लाई की जाएगी। हर जिले में सरकारी बिल्डिंग के सौरकरण ऊर्जा के लिए ईको सिस्टम का निर्माण होगा।

    मैन्युफैक्चरिंग पॉवरहाउस

    प्रदेश अब भारत के फास्टेस्ट ग्रोइंग मैन्युफैक्चरिंग स्टेट्स में शामिल हो गया है। वर्ष 2024-25 में मैन्युफैक्चरिंग एमएसएमई इकाइयों की संख्या बढ़कर 1,13,696 तक पहुंच गई। वर्तमान में राज्य में कुल 4.26 लाख से अधिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स सक्रिय हैं। राज्य में कुल 20.43 लाख एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जिनमें 21 फीसदी मैन्युफैक्चरिंग, 29 फीसदी सर्विसेज और 50 फीसदी ट्रेड सेक्टर से जुड़ी हैं। इसके माध्यम से प्रदेश में एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।

    पर्यटन

    मप्र का पर्यटन अब देश और विदेश के नक्शे पर प्रमुखता से है। यहां के पर्यटन स्थलों पर फिल्मों की शूटिंग के साथ ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों में पर्यटकों की संख्या में भी लगातार इजाफा हुआ है। विभाग का दावा है कि एक पर्यटक के आने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 72 लोगों को रोजगार मिलता है। प्रदेश में 63 पर्यटन ग्राम विकसित किए गए हैं और 470 से अधिक होम स्टे हैं। अबतक 24 हजार से अधिक अतिथि आए। वर्ष 2026 में होम स्टे की संख्या दो गुना करने का लक्ष्य है। वर्ष 2024 में 13.41 करोड़ पर्यटक आए। यह संख्या बढ़कर वर्ष 2026 में 18 करोड़ से अधिक होने की संभावना है।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

    एआई को लेकर हाल के वर्षों में कई अहम कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने डिजिटल इंडिया और स्मार्ट शहरों के विकास को बढ़ावा देने के लिए एआई के उपयोग को बढ़ावा दिया है। एआई का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में उत्पादन और फसलों की निगरानी में किया जा रहा है। स्मार्ट सिटी योजनाओं के तहत एआई का इस्तेमाल ट्रैफिक प्रबंधन, कचरा प्रबंधन, जल आपूर्ति और अन्य शहरी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। प्रदेश के कुछ अस्पतालों में एआई आधारित उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा है। शिक्षा क्षेत्र में भी एआई को लागू करने के लिए कदम उठाए हैं।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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