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इंदौर में परीक्षा के बीच बवाल: छात्रा ने फैकल्टी को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा टीचर की कथित अभद्र भाषा से भड़की छात्रा?

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 इंदौर में परीक्षा के बीच बवाल: छात्रा ने फैकल्टी को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा टीचर की कथित अभद्र भाषा से भड़की छात्रा?
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर। श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय में एक बार फिर अनुशासन, सुरक्षा और शैक्षणिक माहौल पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परीक्षा के दौरान शुरू हुआ मामूली विवाद कुछ ही मिनटों में हिंसक हंगामे में बदल गया। आरोप है कि एक छात्रा ने फैकल्टी सदस्य पर अपशब्दों और आपत्तिजनक व्यवहार का आरोप लगाते हुए उसे कॉलेज कॉरिडोर में सरेआम पीट दिया। पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें छात्रा फैकल्टी पर हाथ उठाते हुए साफ नजर आ रही है।

    सूत्रों के अनुसार घटना परीक्षा कक्ष की है। छात्रा कथित तौर पर आगे-पीछे बैठे छात्रों से बातचीत कर रही थी। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात फैकल्टी ने उसे टोका। आरोप है कि समझाइश के नाम पर फैकल्टी ने अभद्र भाषा और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे छात्रा मानसिक रूप से आहत हो गई। यही आक्रोश कुछ ही पलों में फूट पड़ा।

    बताया जा रहा है कि छात्रा परीक्षा कक्ष से बाहर निकली और कॉरिडोर में ही फैकल्टी पर हमला कर दिया। अचानक हुई इस घटना से पूरे फ्लोर पर अफरा-तफरी मच गई। कुछ छात्र बीच-बचाव करते नजर आए, तो कई मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने लगे। कुछ देर के लिए विश्वविद्यालय परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब सामने आया कि जिस फैकल्टी सदस्य की पिटाई हुई, वह इसी विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र रह चुका है और वर्तमान में फैकल्टी के रूप में कार्यरत है। इस खुलासे के बाद विश्वविद्यालय की आंतरिक नियुक्ति प्रक्रिया, प्रशिक्षण और व्यवहार मानकों पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    प्रबंधन की चुप्पी, सवालों के घेरे में विश्वविद्यालय

    इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। न यह स्पष्ट किया गया है कि छात्रा के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या फैकल्टी के आचरण पर कोई कार्रवाई की जाएगी। यह घटना बताती है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील माहौल में संवाद की कमी और गलत व्यवहार किस तरह हालात को विस्फोटक बना सकता है। अब सबकी नजर इस पर है कि विश्वविद्यालय प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करता है या मामला दबाने की कोशिश की जाती है।

    Hemant Nagle
    By Hemant Nagle

    हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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