क्या इंसान कभी अमर हो पाएगा?नई रिसर्च में सामने आई उम्र की आखिरी सीमा

सदियों से इंसान की सबसे बड़ी ख्वाहिश रही है कि वह ज्यादा से ज्यादा समय तक जिए या फिर अमर हो जाए। इसके लिए इसानों ने कई तरह के प्राक्रतिक उरकरणों का भी इंतेमाल किया है, वहीं विज्ञान ने कई गंभीर बीमारियों का इलाज खोज लिया है और इंसान की औसत उम्र भी पहले से काफी बढ़ी है। लेकिन क्या ऐसा दिन आएगा जब इंसान हमेशा जिंदा रह सकेगा, एक नई वैज्ञानिक रिसर्च का जवाब है ‘नहीं’।
रूस के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी के मुताबिक, अगर भविष्य में कैंसर, दिल की बीमारी और दूसरी जानलेवा बीमारियों का इलाज भी मिल जाए, तब भी इंसान की उम्र की एक तय सीमा रहेगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सीमा लगभग 146 से 194 साल के बीच हो सकती है।
किन वैज्ञानिकों ने किया यह अध्ययन?
यह रिसर्च स्कोलकोवो इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने मिलकर की है। शोधकर्ताओं ने इंसानी शरीर में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया का गणितीय मॉडल तैयार किया। इस मॉडल के आधार पर उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि अगर बीमारियों को पूरी तरह खत्म भी कर दिया जाए, तब भी शरीर आखिर कब तक काम कर सकता है।
क्या है इंसान की अधिकतम उम्र?
रिसर्च के अनुसार, अगर भविष्य में सभी गंभीर बीमारियों पर पूरी तरह काबू पा लिया जाए, तब भी इंसान की औसत अधिकतम उम्र करीब 156 साल के आसपास रह सकती है।कुछ खास मामलों में कोई व्यक्ति 194 साल तक भी जीवित रह सकता है, लेकिन इससे ज्यादा उम्र तक जीना मौजूदा वैज्ञानिक समझ के अनुसार बेहद मुश्किल माना गया है।
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आखिर शरीर की सीमा क्यों तय है?
वैज्ञानिकों का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ हमारे शरीर में कुछ ऐसे बदलाव होते हैं जिन्हें पूरी तरह रोकना आसान नहीं है। सबसे बड़ी वजह है सोमैटिक म्यूटेशन। ये हमारे डीएनए में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव होते हैं, जो समय के साथ लगातार जमा होते रहते हैं। जैसे-जैसे ये बदलाव बढ़ते हैं, शरीर की कोशिकाएं पहले जैसी अच्छी तरह काम नहीं कर पातीं। यही कारण है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर कमजोर होने लगता है।
दिल और दिमाग की कोशिकाएं क्यों हैं सबसे बड़ी चुनौती?
हमारे शरीर की कई कोशिकाएं समय-समय पर नई बनती रहती हैं। उदाहरण के लिए, त्वचा और लिवर की कोशिकाएं लगातार बदलती रहती हैं, जिससे ये अंग लंबे समय तक खुद को ठीक रखने में सक्षम रहते हैं। लेकिन दिमाग के न्यूरॉन्स और दिल की मांसपेशियों की कोशिकाएं अलग होती हैं। ये एक बार बनने के बाद दोबारा नहीं बनतीं।
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एंटी-एजिंग रिसर्च को मिलेगी नई दिशा
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह रिसर्च भविष्य की एंटी-एजिंग तकनीकों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अब तक ज्यादातर रिसर्च बीमारियों का इलाज खोजने पर केंद्रित रही है, लेकिन यह अध्ययन बताता है कि सिर्फ बीमारियों को खत्म कर देना ही काफी नहीं होगा। अगर इंसान की उम्र और बढ़ानी है, तो दिल और दिमाग की उन कोशिकाओं को सुरक्षित रखना होगा जो समय के साथ खुद को दोबारा नहीं बना पातीं।
आगे किस पर होगी रिसर्ट?
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन अभी शुरुआती चरण में है। आने वाले समय में वे अपने मॉडल में उम्र बढ़ने से जुड़े दूसरे कारणों को भी शामिल करेंगे। इनमें माइटोकॉन्ड्रिया की कार्यक्षमता में कमी और टेलोमेयर का छोटा होना जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे यह समझने में और मदद मिलेगी कि इंसानी शरीर आखिर क्यों बूढ़ा होता है और उम्र बढ़ने की रफ्तार को किस हद तक धीमा किया जा सकता है।
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क्या अमर होना संभव है?
फिलहाल इस रिसर्च में यही सामने आया है कि इंसान हमेशा के लिए जीवित नहीं रह सकता। चाहे चिकित्सा विज्ञान कितनी भी तरक्की कर ले, शरीर की अपनी एक प्राकृतिक सीमा है। विज्ञान भविष्य में उम्र बढ़ाने के नए तरीके जरूर खोज सकता है, लेकिन मौजूदा जानकारी के आधार पर अमरता अभी भी इंसान की पहुंच से बहुत दूर है।












