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वीकेंड पर पूरा दिन बिस्तर में पड़े रहते हैं? जान लें शरीर के साथ क्या होता है

वीकेंड पर पूरे दिन बिस्तर में पड़े रहना आरामदायक लग सकता है, लेकिन लगातार कम एक्टिव रहने से शरीर की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। मांसपेशियों की सक्रियता कम होने, शरीर में अकड़न, सुस्ती और नींद का रूटीन बिगड़ने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। जानिए वीकेंड पर आराम और एक्टिविटी के बीच संतुलन कैसे बनाए रखें और दिन को बेहतर तरीके से बिताएं।
वीकेंड पर पूरा दिन बिस्तर में पड़े रहते हैं? जान लें शरीर के साथ क्या होता है
वीकेंड पर पूरे दिन बिस्तर में पड़े रहना आरामदायक लग सकता है

पूरे हफ्ते काम, पढ़ाई और दूसरी जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने के बाद वीकेंड पर आराम करने का मन करता है। ऐसे में शनिवार या रविवार को देर तक सोना और घंटों बिस्तर पर लेटे रहना कई लोगों की आदत बन जाती है। कुछ समय आराम करना शरीर और दिमाग के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन अगर हर वीकेंड लगभग पूरा दिन बिना ज्यादा हिले-डुले बिस्तर पर ही गुजरे, तो इसका असर आपकी रोजमर्रा की एक्टिविटी पर पड़ सकता है।

मांसपेशियों की एक्टिविटी हो सकती है कम

लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे या लेटे रहने से शरीर की मांसपेशियों की सक्रियता कम हो जाती है। अगर शारीरिक गतिविधि लगातार कम रहे, तो समय के साथ मांसपेशियों की ताकत और फिटनेस प्रभावित हो सकती है। वीकेंड पर कुछ घंटे आराम करना सामान्य है, लेकिन पूरे दिन बिल्कुल एक्टिव न रहना अच्छी आदत नहीं है। घर के छोटे-मोटे काम करना, कमरे से बाहर निकलना या थोड़ी देर पैदल चलना शरीर को एक्टिव रखने में मदद कर सकता है।

शरीर में अकड़न और सुस्ती बढ़ सकती है

लगातार बिस्तर पर पड़े रहने से शरीर में अकड़न और सुस्ती महसूस हो सकती है। खासकर जब लंबे समय तक शरीर की स्थिति नहीं बदली जाए। इसके बजाय बीच-बीच में उठकर कुछ कदम चलना, हल्की स्ट्रेचिंग करना या रोजमर्रा के छोटे काम करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

देर तक सोने से नींद की रूटीन बिगड़ सकती है

पूरे हफ्ते नींद पूरी नहीं हुई हो तो वीकेंड पर थोड़ी देर ज्यादा सोना राहत दे सकता है। लेकिन अगर शनिवार-रविवार को रोजाना से बहुत ज्यादा देर तक सोया जाए या दिन में लंबे समय तक झपकी ली जाए, तो रात में समय पर नींद आने में परेशानी हो सकती है। इससे धीरे-धीरे सोने और जागने का रूटीन प्रभावित हो सकता है। इसलिए छुट्टी के दिन भी सोने का समय बहुत ज्यादा बदलने से बचना बेहतर है।

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मूड पर भी पड़ सकता है असर

शारीरिक गतिविधि का संबंध सिर्फ शरीर से नहीं, बल्कि मूड और मानसिक ताजगी से भी है। थोड़ी देर बाहर टहलना, परिवार या दोस्तों के साथ समय बिताना और अपनी पसंद का कोई काम करना दिन को ज्यादा एक्टिव बना सकता है। इसके उलट पूरा दिन कमरे में रहकर बिस्तर पर पड़े रहने से कई लोगों को ज्यादा सुस्ती और आलस महसूस हो सकता है।

वीकेंड पर क्या करें?

वीकेंड आराम के लिए है, इसलिए खुद को पूरी तरह थकाने की जरूरत नहीं है। बस पूरे दिन बिस्तर पर रहने के बजाय बीच-बीच में उठते रहें। सुबह या शाम थोड़ी देर टहल सकते हैं, घर के छोटे काम कर सकते हैं या हल्की स्ट्रेचिंग कर सकते हैं। इसके अलावा किताब पढ़ना, पसंदीदा हॉबी के लिए समय निकालना या अगले हफ्ते की तैयारी करना भी अच्छा विकल्प हो सकता है। यानी वीकेंड में आराम भी करें और दिन में थोड़ी एक्टिविटी भी बनाए रखें।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...Read More

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