🌤️
--Bhopal, India

PlayBreaking News

ई-सिगरेट को समझ रहे हैं ‘सेफ’? ये गलती पड़ सकती है भारी, जानिए क्या कहती है रिसर्च

ई-सिगरेट यानी वेपिंग को अक्सर सामान्य सिगरेट से सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसके लंबे समय तक इस्तेमाल के प्रभावों को लेकर वैज्ञानिक शोध अभी जारी है। कुछ रिसर्च फेफड़ों की क्षति और कैंसर के संभावित खतरे की ओर इशारा करती हैं। खासकर ड्यूल यूजर्स यानी सिगरेट और वेप दोनों इस्तेमाल करने वालों को ज्यादा सावधानी की जरूरत है।
Follow on Google News
ई-सिगरेट को समझ रहे हैं ‘सेफ’? ये गलती पड़ सकती है भारी, जानिए क्या कहती है रिसर्च

आज के समय में नॉर्मल सिगरेट को फेफड़ों के कैंसर का एक बड़ा कारण माना जाता है। लेकिन अब जब सामान्य सिगरेट पीने वालों की संख्या कम हो रही है, तो ई-सिगरेट यानी वेपिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ई-सिगरेट को कई बार नॉर्मल सिगरेट से कम नुकसान वाला विकल्प या स्मोकिंग छोड़ने का आसान तरीका बताया जाता है। लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसके लंबे समय तक इस्तेमाल को लेकर अभी भी कई सवाल बाकी हैं। खासकर फेफड़ों पर इसके असर और कैंसर के खतरे को लेकर रिसर्च जारी है।

क्या वेपिंग से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है?

अब तक हुई कुछ रिसर्च में संकेत मिले हैं कि ई-सिगरेट का इस्तेमाल फेफड़ों के कैंसर के खतरे से जुड़ा हो सकता है। खास चिंता उन लोगों को लेकर है, जो ई-सिगरेट के साथ नॉर्मल सिगरेट भी पीते हैं। यानी अगर कोई व्यक्ति यह सोचकर ई-सिगरेट शुरू करता है कि इससे नॉर्मल सिगरेट की आदत छूट जाएगी, लेकिन दोनों का इस्तेमाल करता रहता है, तो वह खुद को एक अलग तरह के जोखिम में डाल सकता है।

ये भी पढ़ें: तांबे की बोतल में पानी पीना कितना सही? जानें फायदे, सही तरीका और जरूरी सावधानियां

वेपिंग में मौजूद रसायन क्यों चिंता बढ़ाते हैं?

ई-सिगरेट से निकलने वाले वेपर में कई तरह के केमिकल हो सकते हैं। इनमें कुछ ऐसे पदार्थ भी पाए गए हैं जो शरीर की कोशिकाओं और DNA को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ अध्ययनों में यह भी देखा गया है कि लंबे समय तक ई-सिगरेट के वेपर के संपर्क में रहने से फेफड़ों पर गंभीर असर पड़ सकता है। पशुओं पर किए गए एक अध्ययन में करीब एक साल तक ई-सिगरेट के वेपर के संपर्क में रहने वाले चूहों में फेफड़ों के कैंसर का एक प्रकार विकसित हुआ था। हालांकि, जानवरों पर मिले नतीजों को सीधे इंसानों पर लागू नहीं किया जा सकता और इंसानों में लंबे समय के जोखिम को समझने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।

ई-सिगरेट के लिक्विड में भी कई केमिकल

ई-सिगरेट में इस्तेमाल होने वाले लिक्विड में अलग-अलग तरह के रसायन होते हैं। इनमें प्रोपिलीन ग्लाइकोल और बेंजोइक एसिड जैसे तत्व शामिल हो सकते हैं। इनसे शरीर में:

  • कोशिकाओं में जलन और नुकसान हो सकता है।
  • फेफड़ों में सूजन की समस्या हो सकती है।
  • सांस से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
  • लंबे समय तक इनके संपर्क के प्रभाव को लेकर अभी रिसर्च जारी है।

पहले से स्मोकिंग कर चुके लोगों के लिए भी चिंता

जिन लोगों को पहले से सिगरेट पीने की आदत रही है, उनके लिए वेपिंग को पूरी तरह सुरक्षित मानना सही नहीं है। कुछ रिसर्च में संकेत मिले हैं कि पहले धूम्रपान कर चुके लोगों में ई-सिगरेट का इस्तेमाल कैंसर के जोखिम को और बढ़ा सकता है। इसलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि फेफड़ों के कैंसर की जांच के दौरान मरीज से उसके वेपिंग और स्मोकिंग इतिहास के बारे में भी जानकारी ली जानी चाहिए।

ये भी पढ़ें: ‘बस 5 मिनट और…’ सुबह की नींद क्यों बन जाती है इतनी खास? जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक राज

वेपिंग से फेफड़ों की गंभीर बीमारी के मामले

पिछले कुछ वर्षों में वेपिंग से जुड़ी गंभीर फेफड़ों की बीमारी के मामले भी सामने आए हैं। कुछ मरीजों को सांस लेने में इतनी ज्यादा परेशानी हुई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ा। खासकर उन मामलों में जोखिम और बढ़ सकता है, जहां ई-सिगरेट के प्रोडक्ट की क्वालिटी का सही तरीके से नियमन न हो या उसमें इस्तेमाल किए गए केमिकल की पूरी जानकारी न हो।

‘सिगरेट छोड़ने’ के चक्कर में कहीं दोनों तो नहीं पी रहे?

ई-सिगरेट शुरू करने वाले कई लोग नॉर्मल सिगरेट पूरी तरह छोड़ नहीं पाते। वे दोनों चीजों का इस्तेमाल करने लगते हैं। इस स्थिति में:

  • निकोटीन की लत बनी रह सकती है।
  • व्यक्ति दोनों तरह के प्रोडक्ट के संपर्क में आता है।
  • हानिकारक रसायनों का एक्सपोजर बढ़ सकता है।
  • सिगरेट छोड़ने का मकसद पूरा नहीं हो पाता।

यानी सिर्फ नॉर्मल सिगरेट के साथ ई-सिगरेट जोड़ लेना सुरक्षित रास्ता नहीं माना जा सकता।

‘फिल्टर वाली सिगरेट’ जैसा दावा तो नहीं?

ई-सिगरेट को लेकर होने वाली बहस कई दशक पुरानी एक गलत धारणा की याद दिलाती है। एक समय में फिल्टर वाली सिगरेट को भी ज्यादा सुरक्षित बताकर प्रचारित किया गया था। बाद की रिसर्च से साफ हुआ कि फिल्टर होने के बावजूद सिगरेट स्वास्थ्य के लिए गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इसी तरह ई-सिगरेट को भी बिना पर्याप्त वैज्ञानिक सबूत के पूरी तरह सुरक्षित मानना सही नहीं होगा।

ये भी पढ़ें: जहां देखा वहीं लगा दिया फोन चार्जर? ये छोटी सी गलती खाली कर सकती है बैंक अकाउंट, जानें कैसे बचें

सबसे जरूरी बात क्या है?

ई-सिगरेट के लंबे समय तक इस्तेमाल से फेफड़ों पर पड़ने वाले असर और कैंसर के जोखिम को समझने के लिए अभी और मजबूत रिसर्च की जरूरत है। लेकिन मौजूदा सबूतों को देखते हुए इसे ‘पूरी तरह सुरक्षित’ मानना सही नहीं है। अगर कोई व्यक्ति धूम्रपान छोड़ना चाहता है, तो सिर्फ ई-सिगरेट पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani
icon

Latest Posts