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एलआईसी ने 81 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई, सार्वजनिक क्षेत्र की 4 रक्षा कंपनियों में निवेश बढ़ाया

एलआईसी ने 81 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई, सार्वजनिक क्षेत्र की 4 रक्षा कंपनियों में निवेश बढ़ाया
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी और घरेलू संस्थागत निवेशक एलआईसी ने अपने 15.5 लाख करोड़ रुपए के इक्विटी पोर्टफोलियो में बड़ा फेरबदल किया है। जून 2025 तिमाही के दौरान एलआईसी ने 81 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है, जबकि चार सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों में निवेश बढ़ाया है। यह बदलाव उस समय आया है, जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, भारत की रक्षा खर्च में बढ़ोतरी और स्वदेशीकरण की नीति के चलते रक्षा क्षेत्र में खासा निवेश आकर्षित हो रहा है।

    एलआईसी ने उन कंपनियों से अपना निवेश घटाया है, जो खुदरा निवेशकों के बीच लोकप्रिय रही हैं, जैसे सुजलॉन एनर्जी, रिलायंस पावर और वेदांता। ये कंपनियां भले ही आम निवेशकों के बीच पसंदीदा रही हों, लेकिन इनका प्रदर्शन अस्थिर रहा है। दूसरी ओर, एलआईसी ने मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स में पहली बार 3.27% हिस्सेदारी खरीदी है, जिसकी कीमत 3,857 करोड़ रुपए है। इसके अलावा, उसने कोचीन शिपयार्ड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में अपनी हिस्सेदारी क्रमशः 13, 10 और 5 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ाई है।

    उच्च-गुणवत्ता वाली, स्थिर और नीति-प्रेरित कंपनियों पर बढ़ाया फोकस

    इस तिमाही में एलआईसी ने जिन प्रमुख कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है, उनमें हीरो मोटोकॉर्प (11.84% से घटाकर 6.53%), नविन फ्लोरीन, डिवीज लैब्स, एसआरएफ, मैरिको, अपोलो हॉस्पिटल्स, आईशर मोटर्स, एचडीएफसी एएमसी और जुबिलेंट फूडवर्क्स जैसी कंपनियां शामिल हैं। एलआईसी का यह रणनीतिक बदलाव यह दिखाता है कि अब उसका फोकस उच्च-गुणवत्ता वाली, स्थिर और नीति-प्रेरित कंपनियों की ओर अधिक है।

    रक्षा क्षेत्र में यह बढ़ता झुकाव ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के सैन्य खर्च में हुई वृद्धि और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण पर जोर के कारण देखा जा रहा है। पिछले छह महीनों में निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स में 34% की वृद्धि हुई है, जिसमें गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) के शेयर 71% तक बढ़े हैं।

    तकनीकी और वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों पर भी लगाया बड़ा दांव

    डिफेंस के अलावा, एलआईसी ने तकनीकी और वित्तीय क्षेत्र में भी बड़ा दांव लगाया है। उसने इंफोसिस में अपनी हिस्सेदारी 43 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 10.88% कर दी है, जिसकी बाजार कीमत 63,400 करोड़ रुपए है। वहीं, एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ में हिस्सेदारी बढ़ाकर 5.31% कर दी है। जियो फाइनेंशियल सर्विसेज में भी एलआईसी ने विश्वास दिखाते हुए 55 बेसिस पॉइंट्स की वृद्धि की और अब उसकी हिस्सेदारी 6.68% हो गई है। यह कदम मुकेश अंबानी के वित्तीय क्षेत्र में उतरने को समर्थन देने जैसा है।

    इसके अलावा, टाटा मोटर्स में भी हिस्सेदारी बढ़ाकर 3.89% की गई है, जो उसके इलेक्ट्रिक व्हीकल ट्रांजिशन पर विश्वास का संकेत है। बैंकिंग क्षेत्र में एलआईसी ने निजी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में क्रमशः 30 और 42 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई है, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक जैसे पीएसयू बैंकों में निवेश बढ़ाया गया है। इससे यह स्पष्ट है कि एलआईसी अब सार्वजनिक क्षेत्र की स्थिरता और नीति समर्थन को अधिक प्राथमिकता दे रहा है।

    Wasif Khan
    By Wasif Khan

    फिलहाल जुलाई 2024 से पीपुल्स अपडेट में सब-एडिटर हूं। बीते 3 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हूं। 12वीं म...

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