Gen-Z News :'रूममेट कपल्स' कॉन्सेप्ट को अपना रहे युवा

पल्लवी वाघेला, भोपाल। 'हम दोनों चाहते हैं कि एक-दूसरे पर हमारा कंट्रोल न रहे। शादीशुदा कपल के टैग के साथ हम हर खर्च बांटने को तैयार हैं, लेकिन इमोशनल-फिजिकल कनेक्शन नहीं चाहते। इसके लिए कॉन्ट्रैक्ट तैयार करवाना है...।' यह बात अजीब लगे, लेकिन जेन जी कपल के बीच यह चलन तेजी से बढ़ रहा है। वे पार्टनर से इमोशनल-फिजिकल दूरी चाहते हैं और इंडिपेंडेंट लाइफ उनकी प्रायोरिटी है, लेकिन इसके लिए वह तलाक की बजाए 'रूममेट कपल्स' के कॉन्सेप्ट को तवज्जो दे रहे हैं। भोपाल और प्रदेश में भी इन कपल्स ने लीगल सिक्योरिटी के लिए कांट्रेक्ट बनाए हैं। एडवोकेट व काउंसलर के अनुसार भोपाल में ऐसे 19 और इंदौर में 27 मामले सामने आए हैं। कपल की शादी को तीन से 7 साल हुए हैं।
एक ही घर में रहेंगे पर कपल्स जैसा कनेक्शन नहीं
यूथ अपने एग्रीमेंट में लिखवाते हैं कि हम एक ही घर में रहेंगे, लेकिन कपल्स जैसा कनेक्शन नहीं होगा। कुछ अन्य शर्तें इस तरह हैं- सारे खर्च और सोशल रिस्पांसिबिलिटी मिलकर उठाएंगे, किसी अलगाव की स्थिति में एक दूसरे पर धोखा देने या अन्य तरह के आरोप नहीं लगाएंगे। न इस आधार पर तलाक या एलुमनी मांगेंगे। हम भविष्य में परिवार या अन्य कारण से एक दूसरे पर दांपत्य जीवन जीने का दबाव नहीं बनाएंगे। हम इस रिश्ते में केवल नाम के लिए हैं, इसलिए जीवन में अन्य व्यक्ति के चयन के लिए स्वतंत्र हैं।
नहीं चाहिए सोशल प्रेशर
काउंसलर और मनोवैज्ञानिक दिव्या मिश्रा ने बताया कि कुछ कपल में केवल एक पार्टनर इस कांसेप्ट के लिए तैयार होता है। काउंसलिंग में क्लियर हुआ कि ये कपल किसी तरह का सोशल प्रेशर नहीं चाहते। बच्चों की जिम्मेदारी से भी यह डरते हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं जो स्वच्छंद जीवन जीना चाहते हैं। इन्हें डर है कि यदि यह तलाक लेंगे तो घर वाले दूसरी शादी का प्रेशर बनाएंगे या फिर इन पर रोक-टोक बंदिशें फिर शुरू हो जाएंगी। एडवोकेट विजय बहादुर सिंह तोमर कहते हैं कि इस तरह के एग्रीमेंट भले ही दंपति बनवालें, लेकिन इनका कोई लीगल आधार नहीं है और ना ही इन्हें लीगल मान्यता मिल सकती है।
क्या है यह कॉन्सेप्ट
यह कॉन्सेप्ट लिव इन से इस तरह अलग है कि इसमें दंपति के बीच कोई इमोशनल और फिजिकल कनेक्शन नहीं होता। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यह टर्म रूममेट सिंड्रोम से इजाद हुआ है। सिंड्रोम में कपल के बीच एक-दूसरे के लिए बेरुखी देखने को मिलती थी। लेकिन इन मामलों में यह सिंड्रोम नहीं बल्कि कपल की चॉइस है। वह घर से जुड़े हर खर्च और एक दूसरे के परिवार की सोशल गैदरिंग और रिस्पांसबिलिटी शेयर करते हैं, लेकिन एक दूसरे पर अधिकार नहीं जमाते। वो किसी ओर के साथ रिलेशनशिप में जा सकते हैं। एक ही घर में रहने के चलते परिवार या आस-पड़ोसियों को भी उनके ब्वॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड के आने की भनक नहीं लगती।












