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Vande Mataram @150 Years : 'कांग्रेस ने जानबूझ कर वंदे मातरम से देवी दुर्गा स्तुति के छंद हटाए'

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा सांप्रदायिक एजेंडे के कारण कांग्रेस ने राष्ट्र गीत का संक्षिप्त रूप अपनाया
'कांग्रेस ने जानबूझ कर वंदे मातरम से देवी दुर्गा स्तुति के छंद हटाए'
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में 1937 में वंदे मातरम के संक्षिप्त संस्करण को अपनाने को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस की आलोचना की। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने 'सांप्रदायिक एजेंडे' को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्र गीत से देवी दुर्गा की स्तुति वाले छंदों को हटा दिया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केशवन ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि नेहरू की 'हिंदू विरोधी मानसिकता' की तीखी प्रतिध्वनि कांग्रेस नेता में सुनाई देती है, जिन्होंने हाल में छठ पूजा को नाटक बताकर उसका अपमान किया, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुईं। 

    1937 के फैजपुर अधिवेशन का किस्सा

    केशवन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, हमारी युवा पीढ़ी के लिए यह जानना जरूरी है कि कैसे नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस पार्टी ने बेशर्मी से अपने सांप्रदायिक एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए, 1937 के फैजपुर अधिवेशन में केवल एक संक्षिप्त वंदे मातरम को पार्टी के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया। उन्होंने कहा, यह किसी विशेष धर्म या भाषा से संबंधित नहीं था। लेकिन कांग्रेस ने इस गीत को धर्म से जोड़ने का ऐतिहासिक पाप और भूल की। नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस ने धार्मिक आधार पर जानबूझकर वंदे मातरम के उन छंदों को हटा दिया जिनमें देवी मां दुर्गा का गुणगान किया गया था।

    नेहरू ने लिखा मुसलमान नाराज हो सकते हैं

    केशवन ने दावा किया कि नेहरू ने 1 सितंबर, 1937 को लिखे एक पत्र में द्वेषपूर्ण रूप से लिखा था कि जो कोई भी वंदे मातरम के शब्दों को देवी से संबंधित मानता है, वह बेतुका है। उन्होंने कहा कि नेहरू ने व्यंग्यात्मक रूप से यह भी कहा था कि वंदे मातरम राष्ट्र गीत के रूप में उपयुक्त नहीं है। भाजपा नेता ने दावा किया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने वंदे मातरम के पूर्ण मूल संस्करण की पुरजोर वकालत की थी। उन्होंने कहा, 20 अक्टूबर, 1937 को, नेहरू ने नेताजी बोस को पत्र लिखकर दावा किया कि वंदे मातरम की पृष्ठभूमि मुसलमानों को नाराज कर सकती है। उन्होंने आगे कहा कि वंदे मातरम के खिलाफ हो-हल्ले में ठोस तथ्य दिखाई देते हैं और सांप्रदायिकता की ओर झुकाव रखने वाले लोग इससे प्रभावित हुए हैं। केशवन ने कहा कि वंदे मातरम राष्ट्र की एकता और एकजुटता की आवाज बन गया। उन्होंने कहा कि यह हमारी मातृभूमि का उत्सव मनाता है, राष्ट्रवादी भावना का संचार करता है और देशभक्ति को बढ़ावा देता है।

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    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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