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पचास करोड़ की लागत से होगा कूनो चीता सफारी का विस्तार, राज्य सरकार ने एप्को को सौंपी जिम्मेदारी

इंटरप्रिटेशन सेंटर सहित अन्य सुविधाएं होंगी विकसित, डीपीआर बनाने में आधा दर्जन एजेंसियों ने दिखाई दिलचस्पी
पचास करोड़ की लागत से होगा कूनो चीता सफारी का विस्तार, राज्य सरकार ने एप्को को सौंपी जिम्मेदारी

संतोष चौधरी 

भोपाल। राज्य सरकार ने श्योपुर जिले के कूनो चीता सफारी का विशेष विस्तार करने की तैयारी कर ली है। इसकी जिम्मेदारी पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) को सौंपी गई है। वह यहां पर करीब पचास करोड़ रुपए की लागत से इंटरप्रिटेशन सेंटर, इनक्लोजर, रेस्क्यू सेंटर सहित अनेक सुविधाएं डेवलप करेगा। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने के लिए एप्को ने टेंडर बुलाए थे। सोमवार को टेंडर खोले गए। इसमें आधा दर्जन एजेंसियों ने दिलचस्पी दिखाई है। अब इनमें से स्कूटनी कर किसी एक एजेंसी का चयन किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही उच्च स्तरीय मीटिंग बुलाई जाएगी।

पीएमओ करता है प्रोजेक्ट की निगरानी

 उल्लेखनीय है कि चीता प्रोजेक्ट पीएम मोदी का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। इसकी निगरानी पीएमओ द्वारा की जा रही है। कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया और अफ्रीकी चीतों को बसाया गया है। एक अक्टूबर से पर्यटकों और वन्य प्रेमियों के लिए चीता सफारी भी शुरू हो चुकी है। सरकार अब इसी चीता सफारी का विस्तार कर रही है। सेंट्रल जू अथारिटी से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद एप्को की देखरेख में इसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने का काम शुरू हो गया है। इससे पहले एप्को मुकुंदपुर को सफेद बाघ सफारी को डेवलप कर चुका है।

फैक्ट फाइल

-देश में चीते साल 1952 में विलुप्त पोषित किए गए थे।

-चीता प्रोजेक्टः दुनिया का पहला इंटरकॉन्टिनेटल ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट है।

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को श्योपुर जिले के कूनों में छोड़े थे चीते।

-अब तक कूनो में 25 चीते हो चुके हैं, जिनमें से 16 भारत में जन्म लेने वाले शाक्क हैं।

-नए ठिकानों में गांधी सागर व नौरादेही शामिल किए गए हैं।

टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर कम इंटरप्रिटेशन सेंटर

फिलहाल इस प्रोजेक्ट की लागत 50 करोड़ रुपए तय की गई है। इसकी लागत बढ़ने की संभावना है। प्रोजेक्ट को चीता सकारी" कम टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर कम इंटरप्रिटेशन सेंटर (चीता सफारी सह पर्यटक सुविधा केंद्र सह व्याख्या केंद्र) नाम दिया गया है, जिसमें पर्यटक चीता प्रजाति की स्थिति और इतिहास जान पाएंगे। एष्को के सूत्रों के मुताबिक, इसके अलावा अन्य सुविधाएं भी विकसित की जाएगी। डीपीआर बनाने वाली एजेंसियां यह बताएगी कि इसमें और क्या-क्या हो सकता है। 

स्कूटनी के बाद शुरू होगा आगे का काम

कूनों में चीता सफारी को 50 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जाना है। इस प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने के लिए ऑनलाइन टेंडर बुलाए गए थे। टेंडर सोमवार को खोले गए है। अब इनकी स्कूटनी शुरू होगी। इसके बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।

दीपक आर्य, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, एप्को

People's Reporter
By People's Reporter

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